वात्सल्य रस (रोला छंद)
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ठुमक ठुमक की चाल, चले हैं केशव लाला।
देख देख ये चाल , नंद जी भये निहाला।।
झूला झूला रही , लाल को मैया देखो ।
ऎसा सुंदर रूप,जोय खुश होती देखो।।
नटखट कान्हा करें ,रोज ही माखन चोरी।
पकड़े माँ तो कहे, क्षमा कर मैया मौरी।।
माटी खाये लाल, देख माँ क्रोधित होती।
तीन लोक की देख, झलक माँ हर्षित होती।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित