Hindi Quote in Poem by Rajeev Namdeo Rana lidhori

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बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-263 परिणाम

शनिवार, दिनांक - 11/04/2026

*प्रदत्त शब्द- कंठी (तुलसी माला)*

*संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*

आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

*प्राप्त प्रविष्ठियां:-*
*1*
बाबा कंठी डार कैं, रचें भौत छल छंद।
संत बेष धारन करें, बिदयँ सत्तरा दंद।।
***
एस आर सरल,टीकमगढ़
*2*
पैरौ कंठी कंठ में, जेई पार लगात।
तुलसी माला जपत जो, भवसागर तर जात।।
***
-डॉ रेणु श्रीवास्तव,भोपाल
*3*
मीरा नै जेवर तजे, तजो राजपरिवार।
कंठी धर खैं हाथ मै, जोगन हो गइ यार।।
***
--तरुणा खरे'तनु' जबलपुर

*4*
गुरिया गुरिया गूँथ कैं, कंठी बन गइ एक।
जोरौ सब खाँ सूत नें, काज करौ जौ नेक।।
***
-विद्या चौहान ,फरीदाबाद

*5*
कंठी तुलसी की बनी,दूनौ फल भी देत।
जो बैठे हरि नाम खौ‌ , सुमर- सुमेर कैं लेत।।
***
-सुभाष सिंघई , जतारा
*6*
जो पैरै कनठी गले,मन पावन हो जाय।
ऐसे मानुष के लिगां, कौनउँ दोष न आय।।
***
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
*7*
कंठी माला डार कें, कर रय खोटे काम।
ऐसे दुष्टन कौ भलौ, कैसें करबें राम।।
***
- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
*8*
पैरें कंठी कंठ में,माथें तिलक लगायँ।
कथा सत्तनारांन की, हमें पुरेत सुनायँ।।
***
- प्रभुदयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
*9*
कंठी तिलक जनेउ हो, सत्य सनातन वेश।
संध्या वंदन सिर शिखा,हिरदे में अवधेश। ।
***
-आशा रिछारिया (निवाड़ी)

*10* (द्वितीय स्थान प्राप्त दोहा)
कंठी माला का करै,हिरदय नैंया राम।
रसना जप ले प्रेम सें,दो अक्षर कौ नाम।।
***
-भगवान सिंह लोधी "अनुरागी",हटा
*11*
कंठी तुलसी पैर कै,लओ कमंडल हात।
घर-घर मांगै भीख सी,है ऊकी खै रात ।।
***
-शोभाराम दाँगी, नदनवारा

*12* (तृतीय स्थान प्राप्त दोहा)
कंठी धारें कंठ में, हिरदें धारें राम।
बिना मुकट धारें भरत,करत राज के काम।।
-**
-गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी

*13*
कंठी मोतिन की सिया, दइ हनुमत बलधाम।
फोर फोर मोतीं तकें, इनमें काँ हैं राम।।
***
- डॉ देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
*14*
कंठी जो पैरें सदा, भजबै सीताराम।
यम के दूत सताँय नै, जाँय उनइँ के धाम। ।
***
-रामानन्द पाठक, नैगुवां
*15*
कंठी ड़ारें गरे में,तिलक लगायें भाल।
मांस खांय मदिरा पियें,जे पंड़न के हाल।।
***
- मूरत सिंह यादव दतिया

*16*( प्रथम स्थान प्राप्त दोहा)
कंठी फेरत गइ उमर, समज न पाए सार।
रसना रटवै राम खों, बेई करहें पार।।
***
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा

*17*
कंठी कान्हा के गले,सिर धारहिं जे पंख।
कम्मर बांधी बांसुरी,बजौ समर बिच शंख।।
***
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़

*©संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

Hindi Poem by Rajeev Namdeo Rana lidhori : 112021802
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