मैं और मेरे अह्सास
प्रेम विवाह
प्रेम विवाह का बंधन निराला होता हैं l
दिल से जुड़ा रिसता सुहाना होता हैं ll
दिवाने मोहब्बत का वास्ता है कि l
जज़्बातों का यकी दिलाना होता हैं ll
जिसकी चाहतों में जुडे हों उसकी l
आगोश में ख़ुद को मिटाना होता हैं ll
१६-२-२०२६
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह