*रात - दिन और सुकून*
_© अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'_
ऐ मालिक,
अभि न ऐसी रात दे जिसका कभी सवेरा न हो,
ॲंधेरा भी ज़रूरी हैं, उजाले की क़दर के लिए।
न ऐसी सुबह दे जिसकी कभी रात ही न आए,
थकान न हो तो सुकून का मतलब क्या बचे।
ख़ुशियाँ भी अगर बिना विराम मिलें,
तो दिल उन्हें पहचानना भूल जाता है।
बस इतनी सी दुआ है
रात भी मिले, सुबह भी आए,
इनके बीच जीने का हुनर भी आए.....
✍️अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'.....✍️