"गुमराह"
- रोजमर्रा की भागदौड़ के बाद आज कुछ पर ठहरने का मन किया,
पहले मन में उठ रहे हैं हजारों सवालों को शांत किया, फिर उठाई यह कलम और डायरी, बड़े अरसे बाद आज कुछ लिखने का मन किया !
क्या मैं खुश हूं? मैंने अपने दिल से सवाल किया..
फिर दिल ने दिमाग से सलाह कर मुझे गुमराह किया, हैरानी मुझे इस बात की है, यह फैसला मैंने अपने लिए किया, या मेरे अपनों के लिए किया!
क्या मैं आजाद हूं? फिर उठा दूसरा, सवाल सब कुछ तो अच्छा है जीवन में, फिर किस चीज का गम है और किस बात का मलाल, ये चार दीवारें यह गलियां मेरी ही तो है, फिर क्यों इस घुटन की वजह से हर रोज होता बवाल.
पहले अपनों से दूर थे अब उनके पास रहते हैं, जिन पलों को छोड़ आए उनकी फरियाद करते हैं,
दिन में हजार बार बीती बातों का जिक्र करते हैं, उस खुले आसमान में अपने आज आंखों को याद करते हैं!
क्या कमी थी उस समय और क्या अब है? खुद से पूछो-
घर, काम, पैसा क्या जिंदगी में अब यही सब है? मत हो गुमराह मेरे साथी, नहीं तो जिंदगी इसी सोच में खत्म हो जाएगी, कि हंसना कब है और रोना कब है, जीना कब है, और मरना कब है!
#kavyotsav2 .0
-आँचल नलवाया