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आरजु-ऐ- उल्फत , तुजसे क्या शिकवा करे ?बहलाने से भी ना बहले दील तो कोई क्या करे?जब तक मुकद्दर साथ ना दे तो भला कोई कया करे ? कारवाँ -ए -उलफत युं ही बढ़ता जा रहा !!!! रोक सका ना कोई आरजु -ऐ -उलफत !! जींदगी बहोत छोटी है ! ,जो पल मीले ! चैनसे जीले जरा.
વાહરે કિસ્મત!! કાશ! તકદીર નામકી કોઈ બલા ના હોતી , હોઠોપે ફરીયાદ,ઓર દામનમે આંસુઓ કી સોગાત ના હોતી. ખુશીઓ કી કિલકારીઓસે ઘરઆંગન ગુંજતે રહેતા. સ્વપ્નોકી મુસકાનોસે જીવન બાગ મહેકતા રહેતા. કાશ!!!
યાદે:~ કહેવાતી આ જીંદગી આપની ! પણ એ પણ પરછાઇ બની ! હાથતાળી દઉં સરકીજ જાયછે તો પછી યાદો તે પણ કોઇ બીજાની ! જેને માની બેઠા આપણી તો તેમાં બીચારી યાદોનો શુ કસુર !!!
में मुक्त गगनका पंछी अपनी आज़ादी मुजे जानसे भी प्यारी तोड सारेजगके बंधनकी डोर उड़ जाउमें मुक्त गगनकी ओर ना सीमाओका बंधन ना क्षितिजों के सलीके खुला आश्मां मेरा आशियाना जहाँ जाके थहरा हर कौना दे रहा है फैलाके बाहोका इशारा आके बसजाओ नीलगगनके महेमान
क़तरा क़तरा बीखर गये हम तुमसे दूर क्या बीछडगये हम जीनाथा तुम्हारे आंगनकी छाँव बनके तीनके तीनके बन सीमट गये हम
एक अजबसी उलजन है क्या उसे वफ़ा कहुं या कहु जफ़ा ? एक अनजानसे दील लगा बैठी जीसके लीए स्त्री एक पाँवकी जुटी से कुछ कम नही क्या करुना क्रहते बने ना सुलजते बने खामोशीयांके समुंन्दरमें डूबके या सँभलते तैरते ना बने !
हम तो ठहरे बगिया के माली कलियाँ मुरजाये या महेके ये उपरवालेकेी मर्ज़ी हमें तो सिर्फ़ नीगेबानी करनी है हार ओर जीत ये तो मुक़द्दर का फ़ैसला हमें तो सिर्फ़ कोशिश करनी है कोशिश करनेवाले की कभी हार ना होती रात ओर दीन उनके हाथ जिसने ए जहाँ बनाया हमें तो सिर्फ़ शीश जूकानाहै नमन में ही हमारी ख़ुशी है ज़िंदगी ओर मोत उपरवालेके हाथ ना ज़्यादा ना कम जीतनी तुम लीखाके लाये
दीन उगते ही शुरु होता है फ़रियादों का शीलशीला शीकवा तो एक बहाना है तुम्हें याद करनेका एक तरीक़ा है तुम्हें याद कीये बीन चैन कहाँ ? तुम्हें परेशान करनेका नया बहाना तो है वरना तुम्हें फ़ुरसत कहाँ हमारी ओर नज़रें👀!!! उठाना “कान्हा “! बस पलकें झुकाए मन ही मन मुस्कुराते रहते हो .
चाहत गजबकी है ये चाहतकी तड़प ना पा सके तो बीरहकी आग बन अश्रुजलमें डूबके रह जाती है अगर पा भी लीया तो फीर जीम्मेवारी ओके बोज तले प्यारकी तड़प बन फरीयादोके जमेलेमें आह बन सीमटजाती
ज़िंदगी एक अणसुलजी अनपढ़ी एक किताब है हर रोज़ एक नई कहानी दस्तक देती है कभी खुन के आंसू रूलाके जाती है कभी हसीॉके गुलददस्ता खीलाके जाती है मुशकीलतो है सुलझाना ए पहेली पर कच्ची दोर नहीं जो काट दी जाए जो पल मीले नई आशाओके सहारे जीएँ जाओ कुछ नए लेशन सीखते जाओ बसयुं ही बसर कर लो जींदगी
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