The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
अकेलापन बहुत घातक है जब आप इसे नजरअंदाज करते है। पर जब आप उसपे काम करना शुरू करते है तो ये एक बेहिसाब उपलब्धि है😻 ArUu ✍️
मुझे प्रेम है अपने देश से, पर सुविधा की चादर ओढ़े, कर्तव्य की ठंड से काँपता हूँ, प्रोफाइल में तिरंगा सजाता हूँ, पर ज़मीनी सच से आँखे चुराता हूँ। मुझे प्रेम है अपने देश से, पर भूखा बच्चा जब राह में रोता है, सिस्टम का दोष बताकर मैं चैन की नींद फिर सोता हूं जाति, धर्म, भाषा के नाम पर, मैं दीवारें ऊँची खड़ी करता हूँ, उसी मलबे पर चढ़कर फिर, देशभक्ति की हुंकार भरता हूँ। कहता हूँ बदलाव चाहिए, पर खुद बदलने से घबराता हूँ, उँगली हमेशा औरों पर उठाता हूँ, आईना देखने से कतराता हूँ। शोर में सच को दबा देता हूँ, भीड़ के साथ बह जाता हूँ, गलत जब ताक़त बन जाए, मैं चुप्पी को समझदारी बताता हूँ। देश मेरा सपना नहीं, सिर्फ़ बहस का विषय बन जाता है, कुर्सी, सत्ता, स्वार्थ की आग में हर आदर्श जल जाता है। पर शायद अब भी वक़्त है, इस नींद से जाग जाने का, देश नहीं बदलेगा नारों से, खुद को बेहतर बनाने का। जब ईमान मेरी आदत बने, संवेदना मेरी पहचान बने, तभी कह सकूँगा गर्व से — हाँ, मुझे सच में अपने देश से प्रेम है।
चली जा रही हूं जाना किस तरफ है ... नहीं जानती बस... चली जा रही हूं जिस मोड़ मुड़ी वो सही है या गलत... नही जानती बस... चली जा रही हूं जहां जा रही वहा खुशी है या गम ... नहीं जानती बस... चली जा रही हूं क्या चाहिए जिंदगी से नहीं जानती बस... चली जा रही हूं
मैं ऐसी क्यों हो गई हूं ? कोई भी ऐसा क्यों हो जाता है? कैसे हो सकता है कोई इतना निष्ठुर। कोई कैसे इतने बड़े घर में अकेले रह सकता है। पूरे दिन ,पूरे हफ्ते, पूरे महीने... बिना किसी से बात किए... मैं कैसे अकेले रहना सिख सकती हूं। क्यों मुझे अब किसी की दरकार नहीं...? शायद किसी बहुत अपने को खोने के बाद इंसान निष्ठुर हो जाता है। उसे समझ आ जाता है कि दुनिया छलावा है या वो फिर किसी को खोने से डरता है। शायद इसलिए हो जाता है इंसान इतना निष्ठुर हृदयविहीन और जब मैं खुद में खोई रहती हूं तब मुझे ये अकेलापन इतना डरावना नहीं लगता। पर जब मुझे इसका अहसास होता है। ये बहुत डरावना सा दिखता है ArUu ✍️
अब मैं अलार्म नहीं लगाती क्योंकि अब मेरा जगने का मन नहीं करता। जब तक सोती हूं पूरी दुनियां भूल जाती हूं जगते ही जगत के झमेले याद आने लगते है ।मुझे किसी का इंतजार नहीं। अब मुझे कही नहीं जाना होता। ऐसा नहीं है कि जाने के लिए जगह नहीं है। पर अब बस मन नहीं करता। ArUu ✍️
सोना सबको पसंद है गहरी नींद सबको भाती हैं पर कोई शारीरिक रूप से सो रहा है तो कोई मानसिक रूप से। शारीरिक रूप से सोने वाले लोगों को उठाना फिर भी आसान है। थोड़ी मेहनत करो तो वो उठ जाते है। पर मानसिक रूप से सोए लोगों को उठाना बहुत कठिन है। पर जो उठना ही नहीं चाहता उनको गहरी सुषुप्त अवस्था से उन्हें उठाना असंभव है
हम भारतीय लोग भी कितने दोगले है न हर किसी के फट्टे में टांग अड़ाना अच्छे से जानते है। दोगले है इसलिए कहते है कि ये नववर्ष हमारा नहीं पर जब अंग्रेजों के दिए खेल की बात हो तो करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति जाग जाती है बड़ा सा हुजूम उमड़ पड़ता है। ईसाइयों के त्यौहारों पर सबको तुलसी पूजा याद आ गई और घर में लगाने को एक पौधा नहीं मिल रहा इनको। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की कोई कसर नहीं छोड़ते और बात करेंगे देशभक्ति की। हां भाई हम भारतीय तो दोगले है। ArUu ✍️
एक दिन मैं इस दुनिया के सारे बंधन तोड़ दूंगी एक दिन मैं वो चुनूंगी जो मुझे चाहिए ArUu ✍️
अच्छा मैंने सुना है कि आप जलते हो मुझसे सच है क्या🙈😌 ArUu ✍️
इस अतरंगी-सी दुनिया में वो एक मर्यादित-सा लड़का है— जहाँ लोग चालाकी को हुनर समझते हैं, वहाँ वो साफ़ नीयत को अब भी आदत कहता है। छल-कपट से कोसों दूर, वो उन रास्तों पर चलता है जहाँ भीड़ नहीं ...ज़मीर साथ चलता है। स्त्रियों पर लिखे गए लाखों हर्फ़ वो है उन सभी का सादा-सा प्रत्युत्तर। उसकी स्मृति में रहते है चंद नाम ज़िम्मेदारी, मर्यादा, विश्वास और प्रेम। उसके कंधों पर दिखावे का बोझ नहीं, वचन टिके रहते हैं। और आँखों में वादों की थकान नहीं, ईमान की शांत रोशनी है। वो प्रेम करता है अधिकार से नहीं, आदर से। इस अतरंगी-सी दुनिया में वो थोड़ा अकेला पर बहुत पूरा लड़का है और सच यही है— इन्हीं जैसे लोग दुनिया को अब भी थामे हुए हैं। ArUu ✍️
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser