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ArUu

ArUu Matrubharti Verified

@aruuprajapat6784
(689.9k)

देख बहन
इस दुनिया में कोई भी भरोसे के लायक नहीं है
और मैं तो बिल्कुल नहीं
क्योंकि मैं पैसे उधार दे के वापस मांग लेती हूं🙈🤣
ArUu ✍️

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अब ये जो फरवरी वाला सीज़न होता है
ये हमारे लिए वेलेंटाइन वीक नहीं होता
ये हमारे लिए गिरदावरी और CCE का सीजन होता है बस।
🤣आधी भाग दौड़ इसी लिए लगी रहती है कि फसल कट न जाए

7 Feb =फॉर्मर रजिस्ट्री day
8 Feb =गिरदावरी day
9feb =CCE day
10 feb =आदान अनुदान day
11 feb =पंचायती राज चुनाव day
12 Feb=सिंचाई गणना day
13 feb =सीमांकन day
14 Feb =सबसे इंपॉर्टेंट अतिक्रमण report day
patwari Life 🧬

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अब ये जो फरवरी वाला सीज़न होता है
ये हमारे लिए वेलेंटाइन वीक नहीं होता
ये हमारे लिए गिरदावरी और CCE का सीजन होता है बस।
🤣आधी भाग दौड़ इसी लिए लगी रहती है कि फसल कट न जाए

7 Feb =फॉर्मर रजिस्ट्री day
8 Feb =गिरदावरी day
9feb =CCE day
10 feb =आदान अनुदान day
11 feb =पंचायती राज चुनाव day
12 Feb=सिंचाई गणना day
13 feb =सीमांकन day
14 Feb =सबसे इंपॉर्टेंट अतिक्रमण report day
patwari Life 🧬

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मैं कभी जिक्र नहीं करती या शायद कह नहीं पाती।
पर मेरे पास एक नायाब हीरा है।
बेशकीमती या यू कहूँ अमूल्य
जब सारी दुनियां मेरे खिलाफ हो जाएगी न
मुझे यकीन है
उस वक्त भी वो मेरे साथ खड़ी होगी
भले ही मैं गलत हूं
वो मेरा साथ देगी।
उसके सामने मुझे किसी चीज का डर नहीं रहता।
मैं उसके लिए हर हाल में सही हूं।
❤️

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अकेलापन बहुत घातक है
जब आप इसे नजरअंदाज करते है।
पर जब आप उसपे काम करना शुरू करते है तो
ये एक बेहिसाब उपलब्धि है😻
ArUu ✍️

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मुझे प्रेम है अपने देश से,
पर सुविधा की चादर ओढ़े,
कर्तव्य की ठंड से काँपता हूँ,

प्रोफाइल में तिरंगा सजाता हूँ,
पर
ज़मीनी सच से आँखे चुराता हूँ।

मुझे प्रेम है अपने देश से,
पर भूखा बच्चा जब राह में रोता है,
सिस्टम का दोष बताकर
मैं चैन की नींद फिर सोता हूं

जाति, धर्म, भाषा के नाम पर,
मैं दीवारें ऊँची खड़ी करता हूँ,
उसी मलबे पर चढ़कर फिर,
देशभक्ति की हुंकार भरता हूँ।

कहता हूँ बदलाव चाहिए,
पर खुद बदलने से घबराता हूँ,

उँगली हमेशा औरों पर उठाता हूँ,
आईना देखने से कतराता हूँ।

शोर में सच को दबा देता हूँ,
भीड़ के साथ बह जाता हूँ,

गलत जब ताक़त बन जाए,
मैं चुप्पी को समझदारी बताता हूँ।

देश मेरा सपना नहीं,
सिर्फ़ बहस का विषय बन जाता है,
कुर्सी, सत्ता, स्वार्थ की आग में
हर आदर्श जल जाता है।

पर शायद अब भी वक़्त है,
इस नींद से जाग जाने का,
देश नहीं बदलेगा नारों से,
खुद को बेहतर बनाने का।
जब ईमान मेरी आदत बने,
संवेदना मेरी पहचान बने,
तभी कह सकूँगा गर्व से —
हाँ, मुझे सच में अपने देश से प्रेम है।

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चली जा रही हूं
जाना किस तरफ है ... नहीं जानती
बस... चली जा रही हूं
जिस मोड़ मुड़ी
वो सही है या गलत... नही जानती
बस... चली जा रही हूं
जहां जा रही
वहा खुशी है या गम ... नहीं जानती
बस... चली जा रही हूं
क्या चाहिए जिंदगी से
नहीं जानती
बस... चली जा रही हूं

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मैं ऐसी क्यों हो गई हूं ?
कोई भी ऐसा क्यों हो जाता है?
कैसे हो सकता है कोई इतना निष्ठुर।
कोई कैसे इतने बड़े घर में अकेले रह सकता है।
पूरे दिन ,पूरे हफ्ते, पूरे महीने...
बिना किसी से बात किए...
मैं कैसे अकेले रहना सिख सकती हूं।
क्यों मुझे अब किसी की दरकार नहीं...?
शायद किसी बहुत अपने को खोने के बाद इंसान निष्ठुर हो जाता है।
उसे समझ आ जाता है कि दुनिया छलावा है
या वो फिर किसी को खोने से डरता है।
शायद इसलिए हो जाता है इंसान इतना निष्ठुर हृदयविहीन
और जब मैं खुद में खोई रहती हूं तब मुझे ये अकेलापन इतना डरावना नहीं लगता।
पर जब मुझे इसका अहसास होता है।
ये बहुत डरावना सा दिखता है
ArUu ✍️

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अब मैं अलार्म नहीं लगाती
क्योंकि अब मेरा जगने का मन नहीं करता। जब तक सोती हूं पूरी दुनियां भूल जाती हूं जगते ही जगत के झमेले याद आने लगते है ।मुझे किसी का इंतजार नहीं।
अब मुझे कही नहीं जाना होता।
ऐसा नहीं है कि जाने के लिए जगह नहीं है।
पर अब बस मन नहीं करता।
ArUu ✍️

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सोना सबको पसंद है
गहरी नींद सबको भाती हैं
पर कोई शारीरिक रूप से सो रहा है तो कोई मानसिक रूप से।
शारीरिक रूप से सोने वाले लोगों को उठाना फिर भी आसान है।
थोड़ी मेहनत करो तो वो उठ जाते है।
पर मानसिक रूप से सोए लोगों को उठाना बहुत कठिन है।
पर जो उठना ही नहीं चाहता उनको गहरी सुषुप्त अवस्था से उन्हें उठाना असंभव है

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