अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।
अब बता बात क्या है? अभी अम्मा तो जिन्दा है । मर थोडी गयी हूँ। जो ऐसे दहाड़ मार -मार कर रो रहा है।
खुशी बोलती है। आज मैने अपने माँ-बाप रास्ते में देखे थे।
तो क्या हुआ अम्मा ' खुशी मैने इतनी बुरी हालत कभी नही देखी थी । जब तक मैं उन के पास रहता था।
अम्मा ' अब मैं ही तेरे माँ-बाप हूं। वो तेरे माँ-बाप जब ही मर गये जब उन्होंने तेरे लिय समाज से लड़ने की हिम्मत ही नहीं रखी थी। अम्मा - अब तो तुझे हमारे समाज मे रहने की आदत हो गयी है। नाँचना सजना संवरना ' पैसे मांगना जगह -जगह घूमना । खुशी - मजबूरी अम्मा मजबूरी अम्मा अब तो सोशल मिडिया का जमाना है।
सारी दुनिया जरा सी देर मे जान लेती है। अपने हुनर को जाहिर करना होता है। खुशी कुछ खोये हुए दिनो में कहती है। जो हम है ही नही उस को अपने शरीर मे ढालना होता है।
अम्मा - बोलती है। ये दुनिया ऐसी ही है। जिस की दीवानी उसी में हम ने ढाल लिया , हम किन्नर बचपन मे इसी तरह रहते थे। जैसे आम लोग ' उम्र बढ़ते ही ऐसी क्या? आग लग जाती है। दुनिया वालो को दूसरे परिवार मे टांग अडानी है । क्यों? कि हम किन्नर जब आदमी के पहनावे मे नांचेंगे तो ' उन का हम पर ध्यान नही जायेगा।
औरत जैसा शरीर बनावट पहनावा ढाल लेते हैं। बाजार चलता आदमी भी मुड -मुड कर देखता है। जो देखेगा वही तो पैसा फैंकेगा । हमारा काम धन्धा चलेगा '
खुशी - फिर तो आदमी बहुत गन्दा सोच वाला आदमी है। तमाशा देखने वाला इस तमाशे की जगह उन्हे किन्नर को काम दिया जाये। तो पैशा ही बदल जाये । अम्मा - जिस के पास जो नही होता ' उसी चीज को तरसता है। आज हम न औरत है न आदमी तो सोचते है। काश अपने परिवार के पास रहते , मां बाप के पास रहते उन की सेवा करते रिश्ते निभाते खिलखिलाता परिवार होता
अम्मा मुझे मालूम है। आज जो तू रोया अपने माँ - बाप को देखकर क्योंकि उन का बुढापा दुःखमय चल रहा है। जो उस के साथ बहू बेटे साथ रहते हैं। बस पैसे जायदाद के लिय और सामज मे नाक रखने के लिए रोटी देते हैं।
चाहे वो दो रोटी कोसी हुई खाते हैं। बृद्ध आश्रम भेजने से भी दिखावा उजागर हो जायेगा। बहुत से ऐसे परिवार है। जो बस घर मे समाज को दिखाने के लिय बहु बेटे के पास रहते हैं। चाहे घर की चार दीवारी के अन्दर अपमानित होते हो । खुशी - यही तो अम्मा अगर वो मेरा साथ देते तो आज मे श्रवण कुमार बन कर उनकी सेवा करता मेरा साथ देते पढ़ाई कर कुछ तो हासिल करता क्या कमी है। मेरे शरीर मे बस परिवार आगे नही बढा पाता वैसे तो सारे अंग है। मेहनत करने के लिए । मजदूरी करता छोटा काम करता पर नाचने वाला हिजड़ा तो नही बनता घृणा की नजरो से तो देखा नही जाता मेरा कसूर क्या? है।
जिस परमात्मा ने लड़का लड़की बनाये है। उसी ने ये बीच वाले बना दिये। राम भजन करता धर्म कार्यक्रम करता -
मा-बाप का दास बन जाता समाज को हमारे परिवार से अलग कर क्या? मिला कुछ भी तो नही बस अपनी गन्दी सोच ही निकाल दी । इसी को ये दुनिया कहते हैं ।
जैसे रूप मे आया है वैसे ही जीवन जीने का अधिकार है।
न कि सड़कों पर नाचने गाते बजाने का तमाशा न बनने का । अम्मा - खुशी को समझाते हुए खशो अब तेरा जीवन ऐसे हो कटेगा । बस यह दुआ कर आगे ये चलन ना बढ़े किसी का बालक अपने परिवार से अलग ना हो खास कर किन्नर नाम का जिससे समाज अपनी सोच बदले इस समाज में सभी लोग नफरत लायक नहीं है कुछ दयावान भी होते है। बस यहीं हैं कि एक मच्छली सारे तालाब को गंदा कर देती है। और इनसानअच्छाई को कम बुराई को ज़्यादा याद रखते है और उजाकर करती है । क्योंकि सुख कब आया और चला गया पता नहीं चलता दुख एक काँटे की तरह चुबता रहता है समय वही होता हे बस कट्टा मुश्किल से है प्रभू भजन गृन्थो को पढना तो हम किन्नर भी कर सकते है । इस में कौन रोक सकता है भगवान सब का है। कर्म हमारे फल उस के हाथ छोड़ दो । रास्ता खुदवा खुद बन जायेगा।
खुशी अम्मा से मुझे सीने से लगा लो अम्मा बस यही आप का धैर्य विशाल दिल जो कि आप सभी किन्नर की अम्मा बन निभाती हो , माँ का दूसरा रूप हो जो हमारा मार्गदर्शन करती हो।
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