hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • टूटता हुआ मन - भाग 1

    टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इ...

  • पवित्र बहु - 11

    दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थ...

  • भोर की गलती (मां का कहर)

    मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था।...

ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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भोर की गलती (मां का कहर) By Suman

मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था। पंडित जी रोज पूजा करने जाते थे। और मैया जी ने पंडित जी को सपना दिया - अरे बेटा तू सो रहा है अभी तक।...

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अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 By archana

1. पीढ़ियों का चक्रव्यूहये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में...

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सादगी का मजाक By Jeetendra

श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ जाता था या बिना कारण हंसता रहता था। अजीब इसलिए कि वह साफ कपड़े पहनता था, कम बोलता था, सीधा चलत...

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माँ के कमरे का रहस्य By Raju kumar Chaudhary

मेरी शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन मेरा पति हर रात अपनी माँ के कमरे में सोता था। एक रात मैंने चुपके से उसका पीछा किया… और जो सच्चाई मैंने जानी, उस पर मुझे गहरा पछतावा हुआ…शादी...

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शोषण बना पीड़ा का कारण By Gauri Katiyar

आज के समय में शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन यह सुनने को मिलता है कि आज किसी के साथ अत्याचार हुआ, कल किसी और के साथ। ऐसे दरिंदों की वजह से लड़कियों की पूरी ज़िंदगी ब...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

नमस्कार मित्रो आज उजाले की ओर में डॉ. रश्मि चौबे की कविता की पुस्तक, `उद्गार` के बारे में परिचय.... मन के प्रांगण में प्रस्फुटित ‘उद्गार’ –डॉ. रश्मि चौबे  &#...

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जनाजा By Vishram Goswami

                   उस ढलती हुई रात को भोर होने से पहले जमुना देवी की चीख ने मोहल्ले वासियों की नींद तोड़ दी। उसका करुण क्रंदन सर्द रात की हवा के झोंके के साथ मानों खिड़कियों के शीश...

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Sugar Mommy By kalpita

“आपका फॉर्म ठीक से भरा नहीं है, मैम।”“ओह, सॉरी... मैं पहली बार जिम जॉइन कर रही हूँ, थोड़ा घबरा रही हूँ।”रिसेप्शन पर खड़ा लड़का मुस्कुराया। “कोई बात नहीं, मैं मदद कर देता हूँ। मैं र...

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रंग चुराने वाले बादल By Piyu soul

कहानी: “रंग चुराने वाला बादल”एकबार की बात है, एक छोटा सा गाँव था—सतरंगीपुर इस गाँव की खास बात थी कि यहाँ हर चीज़ रंग-बिरंगी थी। पेड़ नीले, फूल सुनहरे, और आसमान कभी गुलाबी तो कभी बै...

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बरगद की छाया By prem chand hembram

बरगद की छायाहरखू जन्म से ऐसा न था।उसका दिमाग एकदम साफ और संतुलित था—मानो किसी कुशल कारीगर ने हर नट-बोल्ट कसकर लगाया हो।पर एक दिन दिहाड़ी मजदूरी करते समय मचान पर काम करते हुए अचानक...

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अम्मा - 2 By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा -२ मेरे सामने ' वाले घर से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। सुबह - सुबह सामने घर में कौन लड़ रहा है।घर जाना उचित न समझा अभी तो इस घर में खुशिया मनायी जा रही थी। घर मे नय...

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प्रकृति का महत्व और पिपलांत्री गांव की प्रेरणादायक कहानी By Gauri Katiyar

संस्कृत श्लोक :तरु-लतानां विविध-वर्गाः शं दधाने।सर्वमास्ते जन-हितार्थं संहतम्।वन्य-सम्पद् रक्षणीया सन्ततम्।शाश्वतम्, प्रकृति-मानव-सङ्गतम्।।अर्थ : ये सुंदर-सुंदर लताएँ और ये सुंदर-स...

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ममता की मिसाल सिंधूताई सपकाल By Gauri Katiyar

"अगर मन में सेवा और करुणा की भावना हो, तो एक इंसान हजारों जिंदगियों को बदल सकता है।"भारत की महान सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत थीं, जिन्होंने अपने जी...

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पर्दे के पीछे - 6 By ARTI MEENA

दादा जी ने डॉक्टर की बात सुनकर आश्चर्य से पूछा,“ऐसा क्या हो गया डॉक्टर साहब, जो आपको इतनी रात को आना पड़ा?”डॉक्टर कुछ क्षण चुप रहा।फिर वह धीरे से दादा जी के पास आया और उनके कान के...

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खेतों में खड़े खंभे By ARTI MEENA

आज काफी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रही थी।ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए मन में कई पुरानी यादें घूम रही थीं — बचपन, खेत, मिट्टी की खुशबू, और वो लोग जिनके बीच हम बड़े होते हैं।मे...

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सर्वभूतेषु By कमल चोपड़ा

​सर्वभूतेषु कमल चोपड़ा                          ​देवियाँ थीं कि प्रगट नहीं हो रही थीं। हलवा-पूड़ी-छोले सब-कुछ तो तैयार कर चुकी थी विमला। इन्तजार था तो बस कन्याओं का। मुहल्ले में से...

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एक चिड़िया स्कूल जाती थी By Mohit Rajak

एक चिड़िया स्कूल जाती थी एक चिड़िया स्कूल जाती थी, पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था, पर वह गाना बहुत अच्छा गाती थी। जंगल के सभी जानवर चिड़ियों के दोस्त हुआ करते थे, वे चिड़ियों के सा...

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सिमटती दुनिया, बढ़ते दायरे By Vishram Goswami

             मई के महीने में बहुत गर्मी हो गई थी, विद्यालयों का सत्रांत होने में कुछ ही दिन बचे थे। तृष्णा चिलचिलाती धूप में बस से उतरी, मुंह पर स्कार्फ बांधे, पैदल ही घर की ओर चल...

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डिजिटल दुनिया का गाँव: गाँव 2.0 By ASHISH KUMAR

सुबह की पहली किरणें जब 'शांतिग्राम' की धूल भरी पगडंडियों पर पड़ती थीं, तो आमतौर पर बैलों की घंटियाँ या दूर से आती भजन की धुन सुनाई देती थी। लेकिन आज, यह सब बदल चुका था। हवा...

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प्रिंस By Ritik Sandilya

कहानी की शुरुआत कहीं से भी हो, किरदार यदि दिलचस्प होता है तो कहानी स्वतः ही खूबसूरत लगने लगती है। मैं ऐसे ही एक व्यक्ति को जानता हूँ; उनकी आयु वर्तमान में 65 वर्ष के आसपास होगी। उन...

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ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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भोर की गलती (मां का कहर) By Suman

मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था। पंडित जी रोज पूजा करने जाते थे। और मैया जी ने पंडित जी को सपना दिया - अरे बेटा तू सो रहा है अभी तक।...

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अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 By archana

1. पीढ़ियों का चक्रव्यूहये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में...

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सादगी का मजाक By Jeetendra

श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ जाता था या बिना कारण हंसता रहता था। अजीब इसलिए कि वह साफ कपड़े पहनता था, कम बोलता था, सीधा चलत...

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माँ के कमरे का रहस्य By Raju kumar Chaudhary

मेरी शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन मेरा पति हर रात अपनी माँ के कमरे में सोता था। एक रात मैंने चुपके से उसका पीछा किया… और जो सच्चाई मैंने जानी, उस पर मुझे गहरा पछतावा हुआ…शादी...

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शोषण बना पीड़ा का कारण By Gauri Katiyar

आज के समय में शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन यह सुनने को मिलता है कि आज किसी के साथ अत्याचार हुआ, कल किसी और के साथ। ऐसे दरिंदों की वजह से लड़कियों की पूरी ज़िंदगी ब...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

नमस्कार मित्रो आज उजाले की ओर में डॉ. रश्मि चौबे की कविता की पुस्तक, `उद्गार` के बारे में परिचय.... मन के प्रांगण में प्रस्फुटित ‘उद्गार’ –डॉ. रश्मि चौबे  &#...

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जनाजा By Vishram Goswami

                   उस ढलती हुई रात को भोर होने से पहले जमुना देवी की चीख ने मोहल्ले वासियों की नींद तोड़ दी। उसका करुण क्रंदन सर्द रात की हवा के झोंके के साथ मानों खिड़कियों के शीश...

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Sugar Mommy By kalpita

“आपका फॉर्म ठीक से भरा नहीं है, मैम।”“ओह, सॉरी... मैं पहली बार जिम जॉइन कर रही हूँ, थोड़ा घबरा रही हूँ।”रिसेप्शन पर खड़ा लड़का मुस्कुराया। “कोई बात नहीं, मैं मदद कर देता हूँ। मैं र...

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रंग चुराने वाले बादल By Piyu soul

कहानी: “रंग चुराने वाला बादल”एकबार की बात है, एक छोटा सा गाँव था—सतरंगीपुर इस गाँव की खास बात थी कि यहाँ हर चीज़ रंग-बिरंगी थी। पेड़ नीले, फूल सुनहरे, और आसमान कभी गुलाबी तो कभी बै...

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बरगद की छाया By prem chand hembram

बरगद की छायाहरखू जन्म से ऐसा न था।उसका दिमाग एकदम साफ और संतुलित था—मानो किसी कुशल कारीगर ने हर नट-बोल्ट कसकर लगाया हो।पर एक दिन दिहाड़ी मजदूरी करते समय मचान पर काम करते हुए अचानक...

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अम्मा - 2 By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा -२ मेरे सामने ' वाले घर से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। सुबह - सुबह सामने घर में कौन लड़ रहा है।घर जाना उचित न समझा अभी तो इस घर में खुशिया मनायी जा रही थी। घर मे नय...

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प्रकृति का महत्व और पिपलांत्री गांव की प्रेरणादायक कहानी By Gauri Katiyar

संस्कृत श्लोक :तरु-लतानां विविध-वर्गाः शं दधाने।सर्वमास्ते जन-हितार्थं संहतम्।वन्य-सम्पद् रक्षणीया सन्ततम्।शाश्वतम्, प्रकृति-मानव-सङ्गतम्।।अर्थ : ये सुंदर-सुंदर लताएँ और ये सुंदर-स...

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ममता की मिसाल सिंधूताई सपकाल By Gauri Katiyar

"अगर मन में सेवा और करुणा की भावना हो, तो एक इंसान हजारों जिंदगियों को बदल सकता है।"भारत की महान सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत थीं, जिन्होंने अपने जी...

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पर्दे के पीछे - 6 By ARTI MEENA

दादा जी ने डॉक्टर की बात सुनकर आश्चर्य से पूछा,“ऐसा क्या हो गया डॉक्टर साहब, जो आपको इतनी रात को आना पड़ा?”डॉक्टर कुछ क्षण चुप रहा।फिर वह धीरे से दादा जी के पास आया और उनके कान के...

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खेतों में खड़े खंभे By ARTI MEENA

आज काफी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रही थी।ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए मन में कई पुरानी यादें घूम रही थीं — बचपन, खेत, मिट्टी की खुशबू, और वो लोग जिनके बीच हम बड़े होते हैं।मे...

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सर्वभूतेषु By कमल चोपड़ा

​सर्वभूतेषु कमल चोपड़ा                          ​देवियाँ थीं कि प्रगट नहीं हो रही थीं। हलवा-पूड़ी-छोले सब-कुछ तो तैयार कर चुकी थी विमला। इन्तजार था तो बस कन्याओं का। मुहल्ले में से...

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एक चिड़िया स्कूल जाती थी By Mohit Rajak

एक चिड़िया स्कूल जाती थी एक चिड़िया स्कूल जाती थी, पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था, पर वह गाना बहुत अच्छा गाती थी। जंगल के सभी जानवर चिड़ियों के दोस्त हुआ करते थे, वे चिड़ियों के सा...

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सिमटती दुनिया, बढ़ते दायरे By Vishram Goswami

             मई के महीने में बहुत गर्मी हो गई थी, विद्यालयों का सत्रांत होने में कुछ ही दिन बचे थे। तृष्णा चिलचिलाती धूप में बस से उतरी, मुंह पर स्कार्फ बांधे, पैदल ही घर की ओर चल...

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डिजिटल दुनिया का गाँव: गाँव 2.0 By ASHISH KUMAR

सुबह की पहली किरणें जब 'शांतिग्राम' की धूल भरी पगडंडियों पर पड़ती थीं, तो आमतौर पर बैलों की घंटियाँ या दूर से आती भजन की धुन सुनाई देती थी। लेकिन आज, यह सब बदल चुका था। हवा...

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प्रिंस By Ritik Sandilya

कहानी की शुरुआत कहीं से भी हो, किरदार यदि दिलचस्प होता है तो कहानी स्वतः ही खूबसूरत लगने लगती है। मैं ऐसे ही एक व्यक्ति को जानता हूँ; उनकी आयु वर्तमान में 65 वर्ष के आसपास होगी। उन...

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