सारे दिन आईंने के सामने निहारती रहती है। जरा कुछ घर के कायों मे हाथ बटां दिया कर , बाजार से जा कर सब्जी फल ले आ ' ज्यादा सज सँवरने की क्या जरूरत है। रोज के ही लोग है। मण्डी जाना है। और वापस आना है। और ज्यादा मटक मटक कर नही चलना अदा मे ।
मुस्कान - माँ आप सारे दिन मुझ पर नजर रखती रहती हो। कहीं भाग थोड़ी जाऊंगी । माँ ज्यादा जुबान चलती है। कैची की तरह इसे काट कर फैंक दूंगी ।
मुस्कान - मुझे ये बचपन वाली माँ चाहिये । लाड - दुलार वाली ये डांट फटकार मुझसे बरदाश्त नही होती है।
मेरी उम्र ही ऐसी है। मुझे सब सुहाना सुहाना महसूस होता है। किशोरी जो हूँ । माँ - आकर स्कूल का काम करना ' ग्यारहवी क्लास मे आ गयी है। हाई स्कूल तो तेरा अच्छा निकल गया पढ़ लिख कर आत्म निर्भर बन खड़ी हो जा प्यार प्यार के चक्कर मे न पड़ना।
मुस्कान - पैरो पर तो अभी भी खड़ी हूं ' हँस - हँस कर देखो भाग भी सकती हूं।
माँ- कुछ अन्दर ही अन्दर कुछ दर्द छुपा कर धीमी अवाज मे कहती है। बेटा मैं कैसे समझाऊ मैं क्यूं कहती हूं । अपने आप से ज्यादा प्यार तुझे करती हूं । तेरे भविष्य की चिंता है।
मुस्कान - घर मे मस्त संगीत गुनगुनाती मग्न रहती थी। जैसे - अपने ख्बाबो से बात करती है।
मुस्कान के पापा माँ कहती है। मुझे मुस्कान की फिक्र होती है। जाने भविष्य कैसा होगा। अभी सब सच्चाई से अनजान है। पापा माँ से ' तुम बेफिक्र जीवन जियो होगा जब देखा जायेगा। भविष्य तो दुनिया का कोई व्यक्ति नही जानता बस अच्छे भविष्य बनाने की कोशिश कि जा सकती है। बस अपने आप को मजबूत बनाओ संकट से निकलने के लिए।
मुस्कान - पापा मुह मोबाइल चाहिए ' अपना पर्सनल
पापा - बेटा जब इण्टर कर लेगा कॉलेज जायेगा बाहर पढने जब दिलाउँ गा अपनी लाडली को नही पापा मुझे चाहिए मुझे अभी चाहिए अच्छा तो किपेड़ बटन वाला दिलादूंगा मुस्कान नही मुह स्क्रीन टच वाला चाहिए सारी दुनिया है। उसमे मुझे देखना है '
पापा - वो तुम्हारे लिए ठीक नही है। अभी समझदार नहीं है। माँ का है। तो जो भी पढ़ाई देखनी है। और जब मैं काम से आता हूं । रात मे मेरा देख लिया नही नही मुझे -पर्सनल लेना है। अपने फ्रेड बनाने है। गुरूप बनाना है।
अधिकतर मेरे सब क्लास बच्चो के पास है। मुझे भी चाहिए लोगो से जुड़ना है।
दीवाली पर मुझे गिफ्ट मे मोबाइल देना प्लीज बस महीना भर है। काफी जिद्द के बाद पापा हां कर देते है। मां पापा से सारी जिद पूरी मत किया करो। पापा - क्या करू औलाद भी तो अपनी ही है। बच्चे माँ बाप से नही कहेंगे और किस से कहेगे ।
अरे वाह मेरा अपना मोबाइल मुस्कान बहुत सहज कर रखती ग्रप बना लिया ऐप डाउन लोड कर लिए सोशल मिडिया चालू फिर तो बस वही करने लगी जो सभी करते हैं। प्रेट्किल काम कम बैठे बैठे बस मोबाइल माँ - मुस्कान ह्द कर रखी है। मोबाइल मे दिन को रात रात को दिन बना दिया है। कोई लाइक कर्मेंट की जरूरत नहीं है बस जितना जरूरी उतना देखा बसा ये अच्छा कोरोना आया मोबाइल की लत छोड़ गया घर मे पड़े पड़े सुब मोबाइल ही देखते रहते टी. वी प्रोगाम काफी हद तक बंद हो गये थे। स्कूल वालों ने पढ़ाई ले कर अब सब काम मोबाइल ही करे गा आँखो पर चश्मा लग गये है। काफी हद तक बच्चो मे एव स्कूल मे स्मार्ट .बोर्ड स्क्रीन वाला जो लाहर की रोशनी देता है। कहां तक रोक पाऊंगी फ्रिक तो बस सब से ज्यादा अपने परिवार के सदस्य की होती है।
मुस्कान हँस हँस कर किसी से बाते करती है।
माँ - किस से बात कर रही है।
मुस्कान - फेस बुक का फ्रेड है। मां - चौक कर लड़का गुस्से से कोई जरूरत नहीं है। फ्रेड़ा बनाने की झ्स बार रिचार्ज नही कराऊंगी ' सॉरी माँ अब नही करुंगी चैटिंग
मां - भाड़ मे जाये ये टैक्लोजी इस तो पुराना जमाना अच्छा था। हर चीज़ की सीमा होती हैं । राम राज्य सा महसूस होता था। जब लत लग जाती हैं छूटती वहां है। एक नशे की तरह घुल सा गया है। सामने नही तो घर के लोग सो जाने के बाद देर रात तक चोरी से मोबाइल चलाना
मुस्कान - उस लड़के की चपेट में आती जा रही थी। बस चैटिंग चैटिंग सवाल जवाब चलते जा रहे थे।
माँ मुस्कान के पापा मुझे मुस्कान के हाव भाव हरकतो से डर सा लगता जा रहा है।
पापा - तुम ज्यादा सोचती हो जमाना ऐसा ही है। अपने बच्चे पर विश्वास होना चाहिए ।
मुस्कान के पापा तुम समझ तो रहे होंग मैं क्या कहना चहा रही हूँं। हां पर ह्म ही जानते है। इस बारे मे जब ही तो आत्म निर्भर बनाना चहाता हूँ ।
मां - कही कोई अनहोनी न हो जाये। अच्छा सोचो ' अच्छा होगा। देखो न बहने बना कर बाहर जाती है। जब मैं सुहेली को कॉल करती हूं वहाँ नही होती है। कुछ पूछती हूँ उल्टा जवाब देती है। पापा समय आने पर सुब समझदार हो जायेगी '
एक रात अरे घर का दरवाजा खुला है। मुस्कान के पापा जल्दी आइए - मुस्म घर मे नहीं है।
तुम जल्दी उसके फोन का लोकेशन चैव करो हम पीछ करेंगे। पुलिस की जरूरत है। बाद मे देखते है। लोकेशन एक होटल मे जा रही है। तुम यहाँ ऐसे किसी रूम मे नही जा सकते । रिसेप्शन ' पर वो मेरी बेटी है। कोई अन्जान नही अच्छा परमिशन है। रूम खुला तो सब दंग रह गये मुस्कान मृत्य पड़ी थी।
मॉ - ये काम वो फ़ेसबुक वाले फेड का ही है। मैने बहुत समझाया बेटा तू बातो मे मत आ और मेरी बेटी चंगुल मे फस गयी। मुस्कान के पापा वही हुआ जिसका डर था।
जब उस फेसबुक वाले फ्रेड को वो नही मिला जो वो चहाता था। उसने मुस्कान को मार डाला मै जब ही तो रोक लगाती थी । उसने मुस्कान को जान से मार डाला बेटी ये दुनिया तेरे लिय सेफ नही है। मैं किस मुंह से कहती तू दूसरी विरादरी से है। समाज का ठुरराया किन्नर है तू लाख कोशिश के बाद हम दोनो ने मुस्कान को खो दिया।
पापा - मुझे अफसोस बस झ्स बात का है। हमने उसे उसकी सच्चाई से घूम रहा रखा कोशिश तो पूरी करी थी। सुरक्षा रहे क्या करे बस ह्म इसी पर सब्र कर सकते है। जो ईश्वर की इच्छा ।