रमेश: - “जल्दी!! अंदर ले चलो!!”
आदित्य ने हल्के से जानवी को अपनी बाँहों में उठाया, पर उसके उठते ही जानवी की कमजोर साँस एक पल को रुक-सी गई।
आदित्य डर गया।
आदित्य: - “जानवी!!! नहीं— नहीं— देखो मेरी तरफ! आंखें खोलो!!”
उसने उसे कार की बैक सीट पर लेटाया और खुद उसके साथ बैठ गया। रमेश ने कार पूरी स्पीड में दौड़ा दी।
बारिश की बूंदें कार की खिड़की पर पड़ रही थीं और जानवी का खून सीट पर फैल रहा था , आदित्य ने उसके चेहरे से खून मिटाया,
उसके सर को अपनी गोद में रखा।
आदित्य (टूटते हुए): - “जानवी… सुन रही हो न? तुम कुछ नहीं कह रही… क्यों चुप हो…? प्लीज़ आँखें खोलो…”
जानवी ने हल्के से आँखें झपकीं—बस एक बार… जैसे कह रही हो "मैं यहाँ हूँ…"
आदित्य ने उसके हाथ को अपने हाथों में कसकर पकड़ लिया।
आदित्य:- “तुम ठीक हो जाओगी… मैं हूँ न… मैं यहीं हूँ…कुछ नहीं होने दूँगा तुम्हें… कुछ भी नहीं…”
उसकी आवाज़ कांप रही थी, आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे , रमेश ड्राइव करते हुए दहशत में था।
रमेश: - “आदित्य… मैं जितना तेज़ चला सकता हूँ, चला रहा हूँ… बस इसे होश में रख!!”
आदित्य ने उसकी बात नहीं सुनी—उसका पूरा ध्यान सिर्फ जानवी पर था। जानवी का सिर उसकी गोद में था। उसका चेहरा फीका पड़ चुका था।
आदित्य ने उसकी ठंडी पड़ती उंगलियों को जोर से पकड़ा।
आदित्य: - “पागल लड़की…तुमने मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल दी…क्यों…? क्यों किया ये…?”
उसकी आवाज़ टूट गई।
जानवी ने बहुत धीमे से होंठ खोले—जैसे कुछ कहना चाहती हो।
आदित्य तुरंत झुक गया।
आदित्य: - “क्या… क्या कह रही हो?”
लेकिन कोई शब्द नहीं निकला।
सिर्फ एक आँसू…जो उसकी आँख से निकलकर आदित्य की उंगलियों पर गिरा , आदित्य फूट पड़ा।
रमेश ने हॉस्पिटल के सामने कार ब्रेक लगाकर रोकी।
रमेश: - “आदित्य!! जल्दी!!”
आदित्य ने बिना एक पल गँवाए जानवी को गोद में उठाया और हॉस्पिटल की emergency gate की ओर दौड़ पड़ा , बारिश, खून और आँसू तीनों एक साथ उसके चेहरे पर बह रहे थे।
आदित्य: - “कोई डॉक्टर!! प्लीज़!! जल्दी आईए — कुछ कीजिए!!”
नर्सें और डॉक्टर दौड़कर आए और स्ट्रेचर पर जानवी को ले गए।
आदित्य पीछे-पीछे दौड़ता रहा—
आदित्य: - “ हाथ मत छोड़ना!! मैं भी आ रहा हूँ!!”
डॉक्टर ने आदित्य को रोक दिया।
डॉक्टर: - “सर! आपको बाहर इंतज़ार करना होगा!”
आदित्य ने झटके से डॉक्टर की collar पकड़ ली।
आदित्य (टूटे गुस्से में): - “कृपया… इसे बचा लीजिए… प्लीज़…
मैं इसके बिना… नहीं…”
उसकी आँखें लाल थीं…उसकी आवाज़ टूटी हुई…और उसके दिल में सिर्फ एक डर—जानवी को खो देने का।
डॉक्टरों ने उसे अलग किया और कहा --
डॉक्टर :- हम पुरी कोशिश करेगें और रागिनी मेडम भी अभी आती ही होगी ।
इतना बोलतर डॉक्टर OT का दरवाज़ा बंद कर दिया।
आदित्य वहीं ज़मीन पर बैठ गया…अपने सिर को दीवार से टिकाकर।
वो रो रहा था—बिना आवाज़ के, पर अंदर से पूरी तरह टूट चुका था। रमेश उसके पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखता है।
रमेश (धीरे से): - “आदित्य… वो बहुत strong है…वो वापस आएगी… तेरे पास तेरे लिए आएगी…”
आदित्य ने सिर उठाया उसकी आँखें लाल और सूजी हुई थीं।
आदित्य: - “उसे कुछ नहीं होना चाहिए…मैं उसे… बताभी नहीं पाया कि मैं…मैं उससे…”
उसकी आवाज़ गले में ही रुक गई। तु सबको फोन कर दे उसके पापा को भी ।
तभी कुछ दैर बाद रागिनी वहां पर भागती हूई आती है और आदित्य का पास आकर रुक जाती है , आदित्य उठका है और रागिनी का बाथ पकड़कर कहता है --
आदित्य: - रागिनी , ये सब क्या हो गया , उसने मेरे लिए अपनी जान .....
आदित्य के आंखे से आशु बहने लगे ।
आदित्य :- उसे बचा लोगी ना रागिना ?
रागिनी :- तुम अभी बैठो , मैं देखती हूँ , मैं हूँ ना ।
रागिनी दैखती है के आदितेय को भी धक्का के कारण कुछ चोंटे लगी थी , रागिनी एक नर्स को बुलाती है --
रागिनी :- सिस्टर , इनको ( आदित्य ) गवाई और पट्टी कर दो ।
इतना बोलकर रागिनी अंदर चली जाती है , सिस्टर आदित्य को पट्टी लगा रही थी तभी वहां पर अशोक , रश्मी और कृतिका भी आ जाती है , आदित्य कृतिका के पास जाता है और जाकर उसके गले लग जाता है , और कहता है --
आदित्य :- ये सब क्या हो गया कृतिका ।
कृतिका आदित्य के पिठ को थपथपाती है और कहती है --
कृतिका :- सब ठिक हो जाएगा ।
अशोक घबराते हूए आदित्य से कहता है--.
अशोक :- बेटा जानवी कैसी है ! ये सब कैसे हो गया ।
आदित्य अशोक को सब बोलतर सुनाता जिसे सुनकर अशोक रोते हूए कहता है --
अशोक :- तो आखिर जानवी ने अपनी बात पुरी कर ही ली ।
ये सुनकर आदित्य और उसके दोस्त हैरान थे ।
आदित्य हैरानी से पूछता है --
आदित्य :- बात पुरी कर ली , कौन सी बात पापा ?.
अशोक आदित्य को सब बोलतर सुनाता है ---
अशोक :- आदित्य , तुम्हारा और रागिनी की बात को जानवी ने सुन लिया था , जब तुम्हें फोन पर विक्रम ने कहा था के तु्महारी जान को खतरा है ये सुनकर जानवी ने मुझसे कहा था के वो तुम्हें कुछ नही होने देगी । जानते हो आदित्य तुमने मुझसे पुछा था ना के जानवी कहा है और क्यों रो रही है ।
जानवी तुमसे बहोत प्यार करती है आदित्य और यही बात बोलने वो यहां पर आई थी , कितना खुश थी वो उस रात, वो तुमसे भी यही बोलने के लिए तुम्हारे पास जा रही थी तभी इसने तुम्हे और मोनिका को एक साथ दैख लिया और वहां से रोती हूई मेरे पास आई । जानवी अपने प्यार को किसी और के साथ दैखकर इस रात बहोत रोयी । वो वापस तुम्हारे पास गई ताकी उसकी वजह से तुम्हारे जान को कोई खतरा ना हो और दैखो आखिर उसने तुम्हें बचा ही लिया ।
इतना बोलकर अशोक रोने लगता है , आदित्य को अब सारी बात समझ मे आ गया था । आदित्य ये सुनकर हैरान था के जानवी भी उससे प्यार करने लगी है , आदित्य अंदर ही अंदर बहोत टुट जाता है और वही पर बैठ जाता है तभी कृतिका आती है और आदित्य के कंधे पर हाथ रखती है और कहती है --
कृतिका :- सब ठिक हो जाएगा आदित्य , जानवी को कुछ नही होगा ।
तभी वहां पर अनय , विद्युत और पुनम आ जाती है । अशोक को ये बात पहले ही पता था के आदित्य विद्युत तिवारी का बेटा है ।
विद्युत आदित्य से कहता है ---
विद्युत :- ये सब कैसे हूआ बेटा ?
आदित्य उन सबको सब बोलकर सुनाता है , पुनम आदित्य को गले लगाती है और कहती है --
आदित्य :- मेरा बच्चा , सब कुछ ठिक हो जाएगा , जानवी को कुछ नही होगा ।
विद्युत अशोक के पास जाता है और कहता है ---
विद्युत :- मैं ... आदित्य का पिता. ..
अशोक कहता है --
अशोक :- मुझे मालुम है सर ।
विद्युत :- सर नही संधि जी , आप परेशान मत हो , जानवी हमारी बेटी है , और हम उसे कुछ नही होने देगें ।
सभी वहां पर बैठकर इंतजार करने लगा था ।
ओटी के अंदर – रागिनी (डॉक्टर) और उनकी टीम
रागिनी की भौहें तनी हुई हैं। वह मास्क के पीछे भी बेचैनी छिपा नहीं पा रही।
रागिनी: - “BP गिर रहा है! नर्स, दूसरी लाइन खोलिए!”
उसे बार-बार अपने हाथ काँपते महसूस हो रहे हैं, क्योंकि यह सिर्फ़ एक पेशेंट नहीं… आदित्य की बहुत करीबी है।
ओटी का दरवाज़ा खुलता है , रागिनी बाहर आती है—चहरा थका हुआ, माथे पर पसीना , सभी उसकी तरफ दौड़ते हैं।
अशोक: - “कैसी है मेरी बेटी?”
रागिनी धीरे से मास्क हटाती है और कहती है ---
रागिनी :- “सर्जरी सफल रही… लेकिन जानवी अभी भी खतरे से बाहर नहीं है। उसे ऑब्ज़रवेशन में रखा जाएगा।”
सबके चेहरे पर थोड़ी राहत, थोड़ी चिंता।
आदित्य एक कदम आगे बढ़ता है और रागिनी से पुछता है
आदित्य :- “क्या… मैं उसे देख सकता हूँ?”
रागिनी उसकी आँखों में दर्द देखती है। उसे अंदर की पूरी कहानी पता है , थोड़ी देर hesitation के बाद…
रागिनी: - ठिक है पर ...एक मिनट के लिए… लेकिन बिना उसे परेशान किए ।
आदित्य और रागिनी दोनो ही आईसीयू के अंदर चला जाता है , आईसीयू – धीमी बीप की आवाज़
जानवी मशीनों से जुड़ी हुई है। माथे पर बैंडेज, हाथ पर सलाइन, सांसें धीमी।आदित्य धीरे से पास आकर उसके हाथ को छूता है…
आदित्य का हांथ काँपता है जानवी आदित्य की हाथ को पकज़ लेती है … फिर छोड़ता नहीं।
आदित्य (टूटे हुए स्वर में) :- “जानवी तुम्हें कुछ नही होगा … मैं हूँ न… अब सब कुछ ठिक हो जाएगा , मुझे सब पता चल गया है के तुम भी मनझसे उतना ही प्यार करती हो जितना के मैं , बहोत सारी बाते करनी है तुमसे जानवी , अब वापस आओ…”
उसकी आँखों से आँसू टपकते हैं और जानवी की हथेली पर गिरते हैं।
अचानक—
जानवी की उंगलियाँ हल्के से हिलती हैं , आदित्य की सांस रुक जाती है।
आदित्य :- “जानवी…?”
उसकी पलकों में हलचल होती है—जैसे वो दूर कहीं से उसकी आवाज़ पहचान रही हो।
आदित्य रागिनी की और दैखता है और कहता है --
आदित्य :- रागिनी तुमने दैखा , जानवी ने अपनी पलके झपकायी ।
रागिनी आदित्य के कंधे पर हाथ रखती है और कहती है --
रागिनी :- अब चलो , जानवी को अब आराम करने दो ।
आदित्य बाहर आ जाता है और अपने मां पुनम के गले लग जाता है ।
पुनम :- सब ठिक हो जाएगा बेटा ।
सुबह हो चुका था सभी जैसे तैसे बैठकर सो रहा था पर आदित्य बार - बार सिसे से जानवी की और दैख रहा था । तभी पुनम की निंद खुलती है और आदित्य को दैखकर उसके पास आती है और कहती है --
पुनम :- ये क्या बेटा, तुम आराम करो , ऐसे करोगे तो कैसे चलेगा ,जानवी को कुछ नही होगा , वो बिल्कुल ठिक हो जाएगी । एक काम करो तुम सब घर जाओ , मैं और अनय यहां पर रुकती हूँ ।
आदित्य: - नही मां , आप लोग सब जाओ , क्योकी अगर आप लोग यहां पर हो ये मिडिया को पका चली तो पता नही क्या - क्या लिखेगें वो लोग ।
विद्युत: - अरे तुम उसकी चितां क्यों करते हो , जो लिखना है लिखे , मेरा बहू है जानवी ये दुनिया को जानने दो ।
आदित्य :- नही पापा , आप लोग मेरी टेंशन मत लो और आप लोग जाओ । मैं यहां पर संभाल लूगां । पापा मैं अपनी आईडेंटिटी छिपाने के लिए बल्की जानवी को इस हाल मे ये सब बताना नही चाहता ।
आदित्य की बात पर वो सभी वहां से चला जाता है ।
आईसीयू में मशीनों की बीप-बीप चल रही है। बाहर सब लोग सहमे बैठे हैं। आदित्य बार-बार शीशे से अंदर झाँक रहा है, दिल में एक ही दुआ — “जानवी ठीक हो जाए…”
अचानक अंदर की एक मशीन तेज़ बीप करने लगती है।
नर्स: - “मैडम! पेशेंट रेस्पॉन्ड कर रही हैं!”
ये सुनकर रागिनी तुरंत अंदर भागती है।
जानवी की आँखें खुलती हैं , धीरे-धीरे उसकी पलकें काँपती हैं… फिर वह आँखें खोलती है। सब कुछ धुंधला—लाइटें, आवाज़ें, मशीनों की चमक।
रागिनी (धीमे स्वर में): - “जानवी… सुन पा रही हो? मैं रागिनी हूँ… तुम्हारी सर्जन।”
जानवी बहुत कमजोर आवाज़ में बोलती है—
“
जानवी :- पानी…?”
रागिनी मुस्कुराती है और उसे थोड़ा सा पानी पिलाती है और कहती है --
रागिनी :- “तुम ठीक हो जाओगी… बस आराम करो।”
कुछ दैर बाद रागिनी बाहर आहर आती है तो सभी उठकर खड़ा हो जाता हैअशोक और आदित्य दोनो ही बेचेन हो उठता है , आदित्य रागिनी के पास जाता है और कहता है --
आदित्य: - जानवी कैसी है रागिनी ?
रागिनी आदित्य के आंखों मे जानवी के लिए प्यार और चिंता दैखती है , आदित्य ने सवाल तो धिरे से पुछा था पर उसके दिल के अंदर एक तुफान चल रहा था । राग रागिनी एक हल्की मुस्कान देती है और कहती है ---
रागिनी :- जानवी अब ठिक है , उसे होश आ गया है ।
To be continue.....653