Tere Mere Darmiyaan - 76 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 76

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तेरे मेरे दरमियान - 76

जानवी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।
कार मे वो अकेली थी लेकिन उसके अंदर अकेलापन समंदर जैसा फैल चुका था।

उसकी सिसकियाँ धीमी होने लगीं…लेकिन अंदर का तूफ़ान और तेज़ हो चुका था।

कुछ देर बाद—

वह उठी, कार के आईने मे अपना चेहरा दैखने लगी , उसकी आँखें लाल थीं, चेहरा सूजा हुआ, और मन… पूरी तरह बिखरा हुआ।

जानवी :- “अगर उसे मेरी परवाह होती…तो वो ऐसा कभी न होने देता…”उसने खुद से कहा।

और एक आँसू फिर लुढ़क गया। ये सब रमेश दैखकर चोंक गया था और कहता है --

रमेश :- ये मोनिका ने जानवी को ऐसा क्या बोल दिया जो जानवी इतनी उदास हो गई ।

रमेश आदित्य को फोन लगाता है , आगित्य का फोन रिंग होता है और आदित्य कॉल रिसिव कर लेता है , रमेश कहता है --

रमेश :- हां , हेलो आदित्य ....

रमेश आदित्य को सब बोलतर सुनाता है। आदित्य कहता है --

आदित्य :- ठिक है तु वही रुक मैं आता हूँ ।

आदित्य वहां से निकल जाता है कुछ दैर बाद आदित्य वहां पहूँच जाता है जहां पर रमेश ने उसे बुलाया था । आदित्य रमेश से कहता है --

आदित्य :- कहां है जानवी ! 

रमेश :- वो अभी दोबारा इसी कैफे के अंगर गई है ।

आदित्य कैफे के अंदर चला जाता है , जानवी पर एक टेबल पर अकेली बैठी थी , जानवी का चेहरा उतरा हूआ था और आंखो मे आंशु । आदित्य जानवी को दैखकर उसकी और कदम बड़ाता है , जानवी की नजर अपने और आते हूए आदित्य पर पड़ता है तो जानवी जल्दी मे अपने आंख से आंलु पोछं लेती है और अपने पर्स सो पैसे निकालकर टेबल पर रख देती है और वहां से जाने लगती है ।

आदित्य जानवी को रोकने की कोशिश करता है --

आदित्य :- जान.....!.

जानवी आदित्य की और देखे बिना ही वहां से चली जाती है । आदित्य जानता था के जानवी शादी के बाद से ही उससे ऐसा ही बर्ताव करता है इसिलिए आदित्य भी वहां से निकल जाता है , आदित्य बाहर आता है जहां पर जानवी खड़ी थी , जानवी के पास जाकर आदित्य कहता है --

आदित्य: - अ... जानवी ।

आदित्य के इतना कहने पर जानवी वहां से जाने लगती है तो आदित्य उसे रोककर कहता है --

आदित्य :- जानवी रुको ..

जानवी रुक जाती है । आदित्य कुछ कदम जानवी की और बड़ाकर उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है ।

आदित्य :- जानवी , मुझे नही पता के तुम मेरै बारे मे क्या सौचती हो , कल से मैं दैख रहा हूँ के तुम बहोत परेशान हो , अगर कुछ बात है तो प्लिज मुझे बता सकती हो , तुम मुझे कुछ भी समझो , दोस्त , या दुश्मन पर इंसानियत के नाते तुम मुझसे बता सकती हो।

जानवी मन ही मन कहती है --

जानवी :- दोस्त और दुश्मन तक बोल सके पर पति नही बोला , हमारा तो अभी तक डिवोर्स भी नही हूआ है । मोनिका सही बोर रही था , मैं ही पागल हूँ जो इससे प्यार कर बैठी ।

आदित्य :- अगर मेरी वजह से परेशान हो तो वो भी बोल दो औप अगर विकास ने .....

आदित्य इतना कहते ही जानवी कहती है --

जानवी :- मुझे किसी से कोई परेशानी नही है । ना तुमसे और ना विकास से , मैं खुद से परेशान हूँ तो क्या करु , है कुछ इसका उपाय तुम्हारे पास ।

इधर रंगा भी वहां पर पहुँच चुका था , रंगा दैखता है के आदित्य रोड के किनारे पर खड़ा था , रंगा अपनी जेब से आदित्य का फोटो निकालता है और कहता है ---

रंगा :- क्या बात है टारगेट खुद शिकारी के पास आ गया है ।

इतना बोलकर रंगा एक ट्रक पर बैठता है और ट्रक को स्टार्ट करता है और ट्रक को फुल स्पीड मे करके आदित्य की और ला रहा था ।

इधर आदित्य इस सब से बेखबर जानवी से कहता है ---

आदित्य :- है ना उपाय , अगल तुम खुद से परेशान हो इसका मतलब जो ही सकता है या तुमसे कोई काम हो नही रहा है या फिर तुम आपने दिल मे कुछ छुपाकर रखी हो जिसे तुम बोल नही पा रही हो ।

आदित्य से इतना सुनकर जानवी चोंक जाती है क्योंकी आदित्य एकदम सही बात बोल दिया था । 

आदित्य :- अगर दिल मे कुछ है जिसे तुम कहना चाहती हो तो मेरा यकीन मानो अगर तुमने दिल की बात कह दी तो सारी परेशानी दुर हो जाएगी । जो भी है तुम्हारे मन मे बोल दो । फिर दैखना तुम्हे अच्छा फिल होगा ।

आदित्य की बात को सुनकर जानवी को थोड़ा हौसला मिला , पर उस रात का गुस्सा अब भी उसके मन मे थी। जानवी अब खुलकर आदित्य को बताना चाहती थी । जानवी कहती है ---

जानवी :- तुमने सही कहा आदित्य , दिल मे बात तो है और गुस्सा भी है जिससे मैं जब तक बोलुगीं नही तब तक ये अंदर की आग शांत नही होगी ।

आदित्य जानवी से पहली बार इस तरह की बात सुन रहा था , जानवी अपनी बात को जारी रखता है और कहता है --

जानवी :- ये आग जिसने लगाया है , जानते हो वो कौन है ?

आदित्य ये सुनने के एक दम शांत खड़ा था , जानवी आगे कहती है --

जानवी : - मेरे अंदर जो तुफान उठ रहा है , जिसके लिए मे इतना परेशान हूं वो और कोई नही ..... वो तु......

जानवी इतना कहती ही है के तभी जानवी दैखती है के एक ट्रक आदित्य के करिब पहूँच गया था और रंगा (दाँत पीसते हुए):
“आज बचेगा नहीं… आज खत्म!”

ट्रक सीधा आदित्य की तरफ बढ़ रहा है जानवी की साँस रुक गई।
दुनिया जैसे एक पल के लिए स्थिर हो गई।

उसके कानों में सिर्फ आदित्य का नाम गूँज रहा था।

“आदित्य…”

आदित्य अभी भी पीछे मुड़कर नहीं देख रहा था—उसे खतरे का ज़रा भी एहसास नहीं था।

जानवी के दिमाग ने कुछ सोचा भी नहीं। दिल ने कमान अपने हाथ में ले ली , वो पूरी ताकत से आदित्य के पास आई—तेज़… बहुत तेज़…जैसे हर कदम उसके प्यार और डर से भरा हो। ट्रक की हेडलाइट उसके चेहरे पर पड़ी—लेकिन उसके कदम नहीं रुके।


जानवी :- “आदित्य!!! हटो!!!”

आदित्य ने अचानक उसकी चीख सुनी—मुड़ा तो बस इतना देखा कि जानवी उसकी तरफ दौड़ती आ रही है।

आदित्य: - “जानवी? क्या—”

लेकिन जानवी ने उसे बात पूरी करने का मौका नहीं दिया , उसने पूरी ताकत से आदित्य को धक्का दिया—इतना जोरदार कि आदित्य फुटपाथ पर गिर पड़ा।

और अगले ही पल—

धड़ाम!!!

ट्रक की जोरदार टक्कर सीधा जानवी को लगी , उसका शरीर हवा में उछला, जैसे कोई गुड़िया फेंकी गई हो , बारिश की बूंदें उसके खून से मिलकर जमीन पर फैलने लगीं।

कुछ पल के लिए सब शांत हो गया।

फिर—

आदित्य की चीख ने सन्नाटे को चीर दिया।

आदित्य :- “जााआनवी!!!!”

वो भागकर उसकी तरफ आया , उसके हाथ काँप रहे थे, आँखें पागलों की तरह फैली थीं , जानवी सड़क पर पड़ी थी—साँसें टूट-टूटकर चल रही थीं , चेहरा खून से सना, पर आँखें , अब भी आदित्य को ढूँढ रही थीं। रमेश भी ये दैखकर भोचक्का रह गया और वो भी भाग कर जानवी की और भागी ।

जानवी आदित्य को दैखकर उसकी और अपना हाथ बड़ाती है और टुटती आवाद से कहती है --

जानवी :- आ......दि......त्य .....! 

आदित्य उसके पास बैठ गया, उसे अपनी गोद में उठा लिया।

आदित्य (रोते हुए): - “ये क्या कर दिया तुमने जानवी!! प्लीज़ आँखें खोलो!!”

जानवी ने काँपते होंठों से हल्की मुस्कान देने की कोशिश की , उसकी उंगलियाँ आदित्य के चेहरे को छूना चाहती थीं, लेकिन जानवी की उंगलियाँ काँप रही थीं।

जानवी (बहुत धीमे): - “मैं… तुम्हें… कुछ होने नहीं दे सकती… आदित्य…”

उसकी आवाज़ टूट रही थी, साँसें फिसल रही थीं। आदित्य आंखे भर आई , जानवी की बात ने बता दिया था के वो आदित्य से कितना प्यार करती है । 

आदित्य: - “चुप! कुछ मत बोलो! एम्बुलेंस आती है— र....रमेश गाड़ी ला भाई । मेरी जानवी को बचाना है रे , जल्दी गाड़ी ला , बस जानवी कुछ दैर और बस प्लीज़… मुझे छोड़कर मत जाना जानवी.....। 

जानवी की आँखों में आँसू आ गए—दर्द के नहीं…प्यार के।

जानवी (टूटी साँसों में): - “तुम… सुरक्षित हो न… बस… यही काफी है…”

आदित्य की आँखों से आँसू झरने लगे उसने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

आदित्य: - “मैं तुम्हें खो नहीं सकता… सुन रही हो!!
मैं तुमसे… प्या—”

जानवी ने होंठों पर उंगली रख दी, बहुत हल्के से।

जानवी (धीरे से): - “मत बोलो…अभी नहीं…”

और फिर उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं।

आदित्य घबरा गया।

आदित्य :- “जानवी!!! नहीं!!” नही जानवी । आखे खोले रखना ।

रमेश और बाकी लोग भी दौड़ते हुए आ चुके थे।

तभी जोर की बारिस होने लगी बारिश और खून मिलकर सड़क पर बह रहे थे।

और आदित्य…जानवी को अपनी बाँहों में लिए चीख-चीखकर रो रहा था। बेसुध होकर जानवी की बात को सुनने लगा था , जानवी आदित्य की और दैखती है और चिल्लाती है ----

जानवी :- आदित्य ..........!

बारिश और खून में लथपथ सड़क पर आदित्य की चीख गूँज रही थी।

 आदित्य :- “जानवी!!! उठो!!! प्लीज़!!!”

रमेश भागते हुए आया, उसके चेहरे पर सदमा साफ़ दिख रहा था।

रमेश:- “आदित्य!! गाड़ी लेकर आया हूँ— तू उसे पकड़कर रख!!”

आदित्य की गोद में जानवी निस्तेज पड़ी थी। उसके होंठों पर खून लगा था, साँसें बहुत कमजोर हो चुकी थीं , आदित्य ने उसके माथे पर हाथ रखकर उसे पुकारा।

आदित्य: - “जानवी… मेरी बात सुनो… तुम मुझे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती… उठो… प्लीज़…”

जानवी ने आँखें खोले बिना धीमी-सी करवट ली—जैसे उसकी रूह भी अब थक चुकी हो।

जानवी (बहुत हल्के स्वर में): - “आ…दि…त्य…”

बस इतना ही…और उसकी साँस भारी हो गई।

आदित्य की देह काँप गई।

उसी समय रमेश कार लेकर screech की आवाज के साथ सामने आकर रुका।

रमेश: - “जल्दी!! अंदर ले चलो!!”

आदित्य ने हल्के से जानवी को अपनी बाँहों में उठाया, पर उसके उठते ही जानवी की कमजोर साँस एक पल को रुक-सी गई।


To be continue.....638