Some Wise Talks 2 in Hindi Anything by S Sinha books and stories PDF | कुछ ज्ञान की बातें - 2

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कुछ ज्ञान की बातें - 2

                                                     कुछ ज्ञान की बातें  2 

 

नोट - इस आलेख में कुछ ऐसी प्राकृतिक बातों पर प्रकाश डालने ला प्रयत्न किया गया है जिसे हम अक्सर देखते हैं और उसके बारे में और जानने की जिज्ञासा होती है  , इस लेख में पढ़ें  नकली  सूर्य   …


सन डॉग या नकली सूर्य 


कभी आकाश में एक साथ दो या तीन सूर्य भी दिखते हैं  . इसे नकली सूर्य कहा जा सकता है  . वास्तव में यह  सूर्य  नहीं होता है बल्कि हूबहू सूर्य जैसा दिखता है जिसे अंग्रेजी में सन डॉग और हिंदी में ‘ सूर्याभास ‘ कहते हैं  . दरअसल यह आकाश में सूर्य की तरह चमकीला धब्बा होता है जो इंद्रधनुष की तरह रंगों से बना होता है  . यह एक तरह का प्रकाशीय भ्रम ( optical illusion) होता है  . 


1 . धरती पर सन डॉग 


सन डॉग की रचना - सन डॉग्स आमतौर पर  प्रकाश की किरणों के अपवर्तन और बिखराव  के कारण होते हैं ( refraction और scattering या  dispersing  )  . भौतिक विज्ञान में  इसे 'पेरिहेलियन' (Parhelion) या 'मॉक सन' (Mock Sun - नकली सूरज) भी कहा जाता है  . यह तब बनता है जब सूरज आकाश में काफी नीचे (सुबह या शाम के समय)  क्षितिज पर होता है और ठंडी नम हवा में प्लेट के आकार के बर्फ के क्रिस्टल्स मौजूद रहते हैं   . ऐसे में सूर्य की किरणें जब बर्फ के बड़े  षट्कोणीय  क्रिस्टल (hexagonal ice crystals) से अपवर्तित (refract) होती हैं तो सूर्य का प्रकाश फैल जाता ( scatter ) है   .  ऐसे बर्फ के क्रिस्टल्स आमतौर पर साइरस ( cirrus ) बादलों में मौजूद रहते हैं  . इसके फलस्वरूप  सूर्य के लगभग 22 डिग्री बाएं, दाएं, या दोनों तरफ प्रकाश के धब्बे दिखाई देते हैं जो देखने में सूर्य जैसे  ही लगते हैं और उन्हें सन डॉग कहते हैं  . सूर्य के साथ अक्सर दिखाई देने वाला  यह नकली सूरज एक  प्रकार का प्रभामंडल ( हेलो helo )  है  . 


सन डॉग की अन्य विशेषताएं -

सन डॉग को बहुत जगहों पर  शुभ संकेत माना जाता है  . अक्सर सन डॉग के  दिखने पर अगले 24 घंटों में बारिश या बर्फबारी होने की अधिक संभावना रहती  है  . सन डॉग  सूर्य जितना ब्राइट नहीं होता है  . सूर्य की तरफ रुख किये  सूर्य से ज्यादा निकट वाला सन डॉग ज्यादा लाल होता है और दूर वाला सन डॉग नारंगी या नीला होता है  . इसके रंग एक दूसरे पर चढ़े ( overlapping ) होते हैं और अंततः श्वेत रंग में विलीन हो जाता है  . 


2. मंगल ग्रह पर सन डॉग्स  (Sundogs on Mars) 

वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर भी सन डॉग्स बन सकते हैं   . हालांकि  मंगल का वायुमंडल बहुत पतला है लेकिन वहां जल-बर्फ (water-ice) और कार्बन डाइऑक्साइड-बर्फ (CO2-ice) युक्त  बादल होते हैं  . इसलिए प्रकाश की किरणों के अपवर्तन और बिखराव  के कारण मंगल पर भी सन डॉग्स बन सकते हैं 

मंगल पर मौजूद रोवर्स ( Perseverance) ने वहां के आकाश में हेलो (Halo) जैसे आकार  देखे  हैं, . जो सन डॉग्स  के होने का संकेत  है  . 


3  विशाल गैसीय ग्रहों पर सन डॉग 

बृहस्पति, शनि, यूरेनस ( अरुण ) और नेपच्यून ( वरुण ) जैसे विशाल ग्रहों परसन डॉग्स बन सकते हैं, लेकिन वे पृथ्वी से बहुत भिन्न होंगे  . ये ग्रह सबसे बाहरी ठंडे और विशाल बर्फीले दानव ( ice - giant ) हैं  . यहाँ का बर्फ का क्रिस्टल अमोनिया, मीथेन और पानी से बना हल्का नीला हरा रंग का होता है  . अलग तरह के क्रिस्टल्स के कारण वहां सूर्य के चारों ओर 4  या उससे अधिक सन डॉग्स ( helo )  दिखाई दे सकते हैं  .  

4  शनि और शनि का उपग्रह  ( moon )  टाइटन पर सन डॉग 

टाइटन शनि का सबसे बड़ा  चंद्रमा है  . शनि और टाइटन  पर भी सन डॉग्स बनने की संभावना है क्योंकि वहाँ के वायुमंडल में इथेन , मीथेन , हाइड्रोजन  साइनाइड व अन्य गैस के  बर्फ क्रिस्टल भी मौजूद हैं   . इसके कारण वहां भी सन डॉग्स ( helo )  दिखाई दे सकते हैं जो चार या ज्यादा भी हो सकते हैं  .  धरती के  सन डॉग्स की तुलना में वे आकार और रंग में अलग हो सकते हैं  . 

5 . एक्सोप्लैनेट्स  पर सन डॉग -  (Exoplanets - हमारे सौरमंडल से बाहर) - हमारे सौर्य मंडल से बाहर भी कुछ ग्रह हैं जो सूर्य की परिक्रमा न करके दूसरे तारों की परिक्रमा करते हैं  . शोधकर्ताओं का कहना है कि वहां का वायुमंडल और उसमें मौजूद भिन्न गैस के बर्फीले क्रिस्टल के कारण सन डॉग्स बन सकते हैं  . 

                                                     समाप्त