कुछ ज्ञान की बातें 1
सूर्य कैसा है ! सूर्य क्या है !
सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है . वैगेनिकों के अनुसार इसका जन्म या इसकी उत्पत्ति लगभग 460 करोड़ वर्ष पूर्व हुई थी . यह एक घूमता हुआ अत्यंत विशाल सोलर नेब्यूला था ( nebula ) जो एक अंतरतारकीय बादल है . सूर्य एक गैसीय प्लाज्मा है जिसमें मूलतः धूल , हाइड्रोजन गैस ( 73 % ) और हीलियम ( 25 %) गैस और 2 % अन्य द्रव्य . हाइड्रोजन और हीलियम के आयन ( ion - बिजली चार्ज वाले अणु या अणुओं के झुंड ) होते हैं . जब नेब्यूला अपने ही ग्रेविटी से कोलैप्स ( collapse ) किया था तब यह और भी तेज गति से चक्कर काटने लगा और एक डिस्क के रूप में उभरा . प्लाज्मा की ज्यादातर चीजें , जो हमारे सोलर सिस्टम का करीब 99. 8 % मास ( mass = द्रव्यमान ) है , , खिंच कर केंद्र में एकत्रित हुईं और गोलाकार सूर्य बना . सूर्य येलो ड्वार्फ जायंट स्टार ( yellow giant dwarf star ) भी कहते हैं . शेष चीजों से सौर मंडल के अन्य ग्रह बने जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं . सूर्य की ऊर्जा के बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है .
सूर्य एक तारा - सूर्य पृथ्वी से निकटतम एक सितारा है . किसी भी अन्य सितारे की तरह एक दिन जब इसकी ऊर्जा समाप्त हो जाएगी इसका भी अंत हो जायेगा .वैज्ञानिकों के अनुसार जब सूरज का अंत निकट आएगा यह एक इतना विशाल लाल दैत्य जिसे रेड जायंट ( red giant ) कहते हैं बन जायेगा जो बुद्ध , शुक्र और सम्भवतः हमारी पृथ्वी को भी निगल जायेगा . सूरज अपनी आधी जिंदगी जी चुका है और लगभग 450 - 500 करोड़ साल बाद इसका अंत संभावित है . इसके बाद वह वाइट ड्वार्फ ( white dwarf ) बन जायेगा .
सूर्य का साइज और उसकी दूरी - धरती से सूर्य की दूरी लगभग 150 मिलियन किलोमीटर ( 1 million = 10 लाख ) है . यह हमारे सौर मंडल का एकमात्र विशालतम सितारा है जिसका व्यास करीब 14 लाख किलोमीटर है . सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के चलते सभी ग्रह अपनी अपनी कक्षा में अपनी जगह पर हैं . हालांकि हमारे जीवन के लिए सूर्य अत्यंत महत्वपूर्ण है पर यह एक आम मिडिल साइज का सितारा है . स्पेस में इससे भी 100 गुना बड़े सितारे हैं . सूर्य का निकटतम पड़ोसी प्रोक्सिमा सेंटौरी ( proxima centauri ) स्टार है जो 4. 2 प्रकाश वर्ष ( 1 light year = 9.5 Trillion Km) दूर है .
सुर्य का तापमान - सूर्य के आंतरिक कोर ( core ) का तापमान 15 मिलियन C है . इसके बाह्य सतह जिसे हम देख सकते हैं , फोटोस्फेयर कहलाता है . यह करब 100 km मोटा ( thick ) है इसका का तापमान करीब 5500 C है . सूर्य का सबसे बाहरी भाग ( outermost ) उसका वायुमंडल , कोरोना , है . इसका तापमान बढ़ कर 2 मिलियन C तक हो जाता है . सूर्य की चमक के आगे यह हमें दिखाई नहीं देता है . इसे हम सूर्य ग्रहण के समय देख सकते हैं .
सूर्य की चक्रगति (rotation ) और परिक्रमा ( orbit )- सूरज मिल्की वे गैलेक्सी ( आकाशगंगा ) में स्थित एक तारा है . यह अपने अन्य ग्रहों , धूमकेतु ( comets ) और ग्रहिकाओं ( asteroids ) के साथ आकाशगंगा की परिक्रमा करता है . हमारे सौर मंडल का स्पीड करीब 7,20,000 Km / hr है इस स्पीड से भी आकाशगंगा की परिक्रमा करने में सूर्य को 2300 लाख वर्ष लगते हैं . अपनी परिक्रमा के दौरान यह अपनी धुरी पर भी घूमता है . भूमध्य रेखा ( equator ) पर 25 दिनों में और पोल पर 36 दिनों में अपनी धुरी पर एक बार घूमता ( rotate ) है . सूर्य का अपना कोई मून नहीं होता है जबकि अन्य ग्रह और उसके मून इसकी परिक्रमा करते रहते हैं .
सूर्य की बनावट ( structure ) - जैसा कि ऊपर देख चुके हैं सूर्य मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम का एक विशाल गोला है . सूर्य के अनेक क्षेत्र या जोन हैं . आंतरिक जोन के दो हिस्से हैं - इसका सर्वाधिक गर्म कोर ( core ) एक रेडियोएक्टिव जोन दूसरा एक कन्वेक्शन जोन है . और बाहर की तरफ बढ़ें तब इसका दृश्यमान सतह फोटोस्फेयर है , इसके बाद कर्मानुसार क्रोमोस्फेयर , ट्रांजिशन जोन और अंत में कोरोना - सूरज का वायुमंडल जो फैलता है . कोरोना में मौजूद चीजें ध्वनि की गति से भी तेज गति से बाहर आती हैं जिन्हे हम सोलर विंड कहते हैं जो सूर्य के चारों तरफ एक चुंबकीय बुलबुला की तरह है जिसे हेलिओस्फियर कहते हैं . हेलिओस्फियर सौर मंडल के ग्रहों के ऑर्बिट के बाहर तक फैला है . हमारी पृथ्वी सूर्य के वायुमंडल में स्थित है . हेलिओस्फियर के बाहर इंटरस्टेलर स्पेस है .
सूर्य की कुछ अन्य विशेषताएं ( behavior ) - सूर्य सदा एक जैसा बिहेव ( behavior ) नहीं करता है . इसका भी अपना एक साइकिल होता है जिसके दौरान वह बहुत ज्यादा एक्टिव ( high ) अवस्था से लो या कम एक्टिव अवस्था में बदलते रहता है . सूर्य के इस साइकिल को सोलर साइकिल कहते हैं , एक सोलर साइकिल 11 वर्षों का होता है . हाई एक्टिव स्टेज को सोलर मैक्सिमा ( solar maxima ) कहते हैं और इसी समय सोलर स्टॉर्म और सोलर फ्लेयर ( flares ) होते हैं . सूर्य सौर मंडल के केंद्र में एक पावर हाउस है , सोलर स्टॉर्म
से अचानक बहुत ज्यादा ऊर्जा निकलती है जिसके चलते प्रकाश और बिजली स्पेस में पृथ्वी और अन्य ग्रहों पर असर पड़ता है .
सूर्य का मास ( mass ) - 2. 192 x 10 ^ 27 टन है या यूं समझें कि पृथ्वी से 3,33,000 गुना ज्यादा भारी .
इसका वॉल्यूम इतना बड़ा है कि इसमें 10 लाख पृथ्वी समा सकती है .
सूर्य रासायनिक प्रक्रिया द्वारा लगातार हाइड्रोजन को हीलियम में परिवर्तित करते रहता है . इस क्रिया में प्रति सेकंड 600 मिलियन टन हाइड्रोजन 596 मिलियन टन हीलियम में बदलता है , शेष 4 मिलियन टन ऊर्जा में परिवर्तित होता है . यह ऊर्जा इतनी ज्यादा है कि 40, 000 W ( watt ) प्रकाश प्रति वर्ग इंच पैदा होता है . इसका एक बहुत ही सूक्ष्म भाग हम तक पहुंचता है बाकी स्पेस में रेडिएट हो जाता है .
पृथ्वी की तरह सूर्य का भी अपना नॉर्थ और साउथ पोल होता है . 11 वर्ष बाद सूर्य के भौगोलिक पोल अपना चुंबकीय पोल बदलते रहते हैं यानी नॉर्थ और साउथ पोल के चुंबकीय गुण बदल जाते हैं . इस वह दौरान लो एक्टिव स्टेज से हाई एक्टिव स्टेज में आ जाता है . सूरज की गतिविधियों से काफी ऊर्जा और कण रिलीज होते हैं जिनका प्रभाव धरती पर पड़ता है . धरती के मौसम की तरह स्पेस का मौसम भी सूर्य की गतिविधियों से बदलता है . स्पेस वेदर ( मौसम ) धरती पर GPS , सैटेलाइट , रेडियो , पावर सिस्टम आदि पर प्रतिकूल असर डाल सकता है या उसे ठप्प भी कर सकता है . दिसंबर 2005 में सोलर स्टॉर्म से उत्पन्न X ray के चलते GPS और सैटेलाइट संचार 10 मिनट के लिए बंद हो गया था .
नोट - अगली कड़ी में पढ़ें सन डॉग या नकली सूर्य ( Sun Dog ) .
क्रमशः