नैना और आरव की शादी को पाँच साल हो चुके थे।
बाहर से देखने पर उनका रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट लगता था — बड़ा घर, अच्छी नौकरी, मुस्कुराते चेहरे…
लेकिन उस घर की दीवारें जानती थीं कि वहाँ प्यार कम और खामोशी ज़्यादा रहती थी।
नैना बहुत भावुक थी।
वह छोटी-छोटी बातों में खुशियाँ ढूँढती थी — सुबह की चाय साथ पीना, रात को बातें करना, अचानक कहीं घूमने जाना…
लेकिन आरव के लिए जिंदगी बस काम, मीटिंग और जिम्मेदारियों तक सीमित थी।
धीरे-धीरे नैना ने बोलना कम कर दिया।
और आरव ने नोटिस करना।
एक दिन नैना ने शांत आवाज़ में कहा —
“आरव… क्या हम खुश हैं?”
आरव ने लैपटॉप से नजर उठाए बिना कहा —
“हमें और क्या चाहिए? सब तो है।”
नैना मुस्कुरा दी…
लेकिन उस मुस्कान में टूटन थी।
📝 तलाक का फैसला
कुछ महीनों बाद…
नैना ने तलाक के कागज़ आरव के सामने रख दिए।
आरव चौंक गया —
“ये मज़ाक है?”
“नहीं,” नैना ने पहली बार आँखों में आँखें डालकर कहा,
“हम साथ रहकर भी साथ नहीं हैं।
मैं भीड़ में अकेली हूँ, आरव।”
आरव ने गुस्से में कहा —
“तो तुम मुझे छोड़ दोगी?”
नैना की आँखों में आँसू थे —
“मैं तुम्हें नहीं छोड़ रही…
मैं उस रिश्ते को छोड़ रही हूँ जो कभी बना ही नहीं।”
⚖️ कोर्ट का दिन
कोर्ट में दोनों चुप बैठे थे।
जज ने औपचारिक सवाल पूछे —
“आप दोनों अपनी मर्जी से तलाक ले रहे हैं?”
नैना ने धीरे से कहा — “हाँ।”
आरव ने भी सिर हिला दिया।
सब कुछ औपचारिक था…
कागज़, हस्ताक्षर, कानून…
लेकिन तभी जज ने एक आखिरी सवाल पूछा —
“आप लोग अलग क्यों होना चाहते हैं?”
नैना चुप रही।
आरव भी।
फिर अचानक आरव बोला —
“क्योंकि… मैं इसे प्यार करना नहीं सीख पाया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
नैना की आँखों से आँसू गिर पड़े।
❤️ एक डिवोर्स ऐसा भी
तलाक मंजूर हो गया।
दोनों कोर्ट से बाहर आए।
बारिश हो रही थी।
नैना ने छाता खोला…
और आदतन आरव की तरफ बढ़ा दिया।
आरव ने छाता पकड़ा…
और पहली बार उसके हाथ को थाम लिया।
“नैना,” उसकी आवाज़ भर्रा गई,
“क्या तलाक के बाद… हम फिर से शुरुआत कर सकते हैं?”
नैना ने हैरानी से देखा —
“क्या मतलब?”
“पति-पत्नी बनकर नहीं,” आरव बोला,
“दो अजनबी बनकर…
ताकि मैं तुम्हें फिर से प्यार करना सीख सकूँ।”
नैना रो पड़ी।
उसने धीरे से कहा —
“शायद… यही हमारा असली रिश्ता होगा।”💞 एक डिवोर्स ऐसा भी – Part 2
(तलाक के बाद फिर वही दो लोग)
तलाक को तीन महीने हो चुके थे।
नैना अब अपने छोटे से किराए के फ्लैट में रहती थी।
घर छोटा था… लेकिन सुकून बड़ा।
सुबह की चाय अब वह बालकनी में अकेले पीती थी।
लेकिन अजीब बात यह थी —
अब उसे उतना अकेलापन नहीं लगता था जितना शादी में लगता था।
उस दिन दरवाज़े की घंटी बजी।
नैना ने दरवाज़ा खोला…
और सामने आरव खड़ा था।
हाथ में छोटा सा पौधा था।
“ये… तुम्हारे लिए,” उसने झिझकते हुए कहा,
“तुम्हें पौधे पसंद हैं ना।”
नैना कुछ पल उसे देखती रही।
पहली बार उसे एहसास हुआ —
आज आरव वही कर रहा था जो वह हमेशा चाहती थी।
🌱 अजनबी की तरह मुलाक़ात
“अंदर आओ,” नैना ने कहा।
दोनों सोफे पर ऐसे बैठे जैसे पहली बार मिले हों।
कुछ देर खामोशी रही…
फिर आरव बोला —
“क्या… हम दोस्त बन सकते हैं?”
नैना हल्का सा मुस्कुराई —
“तुम्हें याद है… शादी से पहले हम दोस्त थे?”
आरव की आँखें झुक गईं —
“शादी के बाद मैं बस पति बन गया…
दोस्त रहना भूल गया।”
नैना ने पहली बार बिना दर्द के उसे देखा —
“तो फिर… दोस्ती से शुरू करते हैं।”
☕ पहली डेट… तलाक के बाद
एक हफ्ते बाद।
आरव ने मैसेज किया —
“क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी?”
नैना ने जवाब देने से पहले लंबी सांस ली…
फिर लिखा —
“हाँ।”
कैफे में दोनों आम लोगों की तरह बैठे थे।
न कोई रिश्ता…
न कोई जिम्मेदारी…
बस दो लोग।
आरव ने पूछा —
“तुम खुश हो?”
नैना ने सच कहा —
“हाँ… लेकिन तुम्हें मिस करती हूँ।”
आरव की आँखें भर आईं —
“मैं तुम्हें हर दिन मिस करता हूँ…
लेकिन अब पहली बार समझ पाया हूँ क्यों।”
❤️ सीखता हुआ प्यार
धीरे-धीरे मुलाकातें बढ़ने लगीं।
अब आरव सुनता था।
नैना बोलती थी।
अब आरव पूछता था —
“तुम्हारा दिन कैसा था?”
अब वह अचानक चॉकलेट ले आता…
या बस मिलने आ जाता।
एक शाम बारिश में दोनों सड़क पर चल रहे थे।
नैना हँसते हुए बोली —
“तुम पहले ऐसे क्यों नहीं थे?”
आरव रुका…
और बोला —
“क्योंकि पहले मुझे डर था तुम्हें खोने का नहीं।
अब है।”
💍 एक नया प्रस्ताव
छह महीने बाद।
उसी कोर्ट के सामने…
जहाँ उनका तलाक हुआ था।
आरव घुटनों पर बैठ गया।
नैना चौंक गई —
“आरव…?”
उसने अंगूठी आगे बढ़ाई —
“नैना…
क्या तुम मुझसे फिर से शादी करोगी?”
नैना की आँखों से आँसू बहने लगे —
“हम तो पहले ही शादीशुदा थे…”
आरव मुस्कुराया —
“नहीं…
पहले हम पति-पत्नी थे।
अब मैं तुम्हारा साथी बनना चाहता हूँ।
दोस्त… प्रेमी… सब कुछ।
इस बार…
मैं तुम्हें खोने से डरता हूँ।”
नैना ने हाथ आगे बढ़ाया —
“इस बार…
मैं भी।”
🌹 एक डिवोर्स ऐसा भी
कुछ रिश्ते टूटकर खत्म नहीं होते…
टूटकर असली बनते हैं।
नैना और आरव का तलाक
उनकी मोहब्बत की दूसरी शुरुआत था।
बारिश में खड़े दो लोग…
अब पति-पत्नी नहीं थे।
लेकिन पहली बार…
वे सच में एक-दूसरे के साथ थे।