(इस बार रिश्ता सच में बना)
नैना और आरव की दूसरी शादी सादगी से हुई।
न बड़े फंक्शन, न शोर-शराबा…
बस कुछ अपने लोग… और सच्ची मुस्कानें।
इस बार नैना ने शादी का लाल जोड़ा पहना तो डर नहीं था।
और आरव ने उसका हाथ थामा तो सिर्फ़ वादा नहीं… समझ भी थी।
🏡 नई शुरुआत
शादी के बाद दोनों ने फैसला किया —
“इस बार हम घर नहीं… रिश्ता सजाएँगे।”
उन्होंने छोटा सा घर चुना।
दीवार पर एक फ्रेम लगाया —
“हम रोज़ एक-दूसरे को चुनेंगे।”
पहले जहाँ खामोशी होती थी…
अब बातें होती थीं।
पहले जहाँ ego था…
अब “सॉरी” जल्दी आ जाता था।
🌧 पहली परीक्षा
एक साल बाद…
आरव की नौकरी चली गई।
पहले वाला आरव होता तो चुप हो जाता।
लेकिन इस बार उसने नैना के सामने बैठकर कहा —
“मुझे डर लग रहा है…”
नैना ने उसका हाथ पकड़ा —
“इस बार तुम अकेले नहीं हो।”
दोनों ने मिलकर खर्चे कम किए।
नैना ने फ्रीलांस काम शुरू किया।
आरव इंटरव्यू देने लगा।
मुश्किलें थीं…
लेकिन दूरी नहीं थी।
👶 एक नई दस्तक
कुछ महीनों बाद…
नैना ने धीमे से कहा —
“आरव… हमें एक मेहमान आने वाला है।”
आरव की आँखें भर आईं।
वह वही आदमी था…
जो कभी भावनाएँ छुपा लेता था।
लेकिन आज…
वह खुलकर रो रहा था।
“मैं इस बार अच्छा पिता बनूँगा…”
उसने कहा।
नैना मुस्कुराई —
“और अच्छे पति भी।”
❤️ असली रिश्ता
बेटी के जन्म के बाद घर में हँसी गूँजने लगी।
एक रात बच्ची को सुलाते हुए आरव बोला —
“अगर उस दिन तुम तलाक के कागज़ न लाती…
तो शायद मैं कभी बदलता ही नहीं।”
नैना ने धीरे से कहा —
“कभी-कभी टूटना ज़रूरी होता है…
ताकि इंसान खुद को जोड़ सके।”
आरव ने उसकी तरफ देखा —
“धन्यवाद… मुझे खोकर मुझे पाने के लिए।”
🌹 एक डिवोर्स ऐसा भी
तलाक उनका अंत नहीं था।
वह उनकी सीख थी।
उन्होंने समझा —
प्यार अपने आप नहीं चलता…
उसे रोज़ निभाना पड़ता है।
और इस बार…(बेटी, रिश्ते और पुरानी यादों की वापसी)
नैना और आरव की बेटी “आर्या” अब चार साल की हो चुकी थी।
उसकी हँसी से घर भर जाता था।
आर्या बिल्कुल नैना जैसी थी —
बातूनी, भावुक, और छोटी-छोटी चीज़ों में खुश हो जाने वाली।
लेकिन आँखें…
वो बिल्कुल आरव जैसी थीं।
🎒 स्कूल का पहला दिन
आर्या का स्कूल का पहला दिन था।
नैना बार-बार उसके बाल ठीक कर रही थी।
आरव बार-बार बैग चेक कर रहा था।
आर्या ने अचानक पूछा —
“मम्मा… आप और पापा की शादी की फोटो कहाँ है?”
नैना और आरव एक पल के लिए चुप हो गए।
क्योंकि उनकी शादी की कहानी…
सीधी नहीं थी।
🖼 सच का सामना
शाम को आर्या ने फिर पूछा —
“मुझे फोटो दिखाओ ना… जब आप शादी किए थे।”
नैना ने अलमारी से दो एलबम निकाले।
एक — पहली शादी का।
एक — दूसरी शादी का।
आर्या ने हैरानी से पूछा —
“दो शादी क्यों?”
आरव ने नैना की तरफ देखा।
नैना ने धीरे से कहा —
“क्योंकि मम्मा-पापा एक बार अलग हो गए थे।”
आर्या की आँखें बड़ी हो गईं —
“आप लोग दोस्त नहीं थे?”
आरव की आवाज़ भर्रा गई —
“हम दोस्त थे…
लेकिन दोस्त रहना भूल गए थे।”
❤️ एक बच्ची की समझ
आर्या कुछ देर सोचती रही…
फिर बोली —
“तो फिर आप दोबारा दोस्त बन गए?”
नैना की आँखें नम हो गईं —
“हाँ।”
आर्या ने दोनों के गले लगते हुए कहा —
“अच्छा है…
नहीं तो मैं कहाँ से आती?”
दोनों हँस पड़े…
आँसूओं के साथ।
🌧 पुरानी जगह
कुछ दिनों बाद…
आरव नैना को उसी कोर्ट के सामने ले गया —
जहाँ उनका तलाक हुआ था।
नैना ने हैरानी से पूछा —
“यहाँ क्यों?”
आरव बोला —
“क्योंकि यहीं हमने रिश्ता खोया भी था…
और पाया भी।”
उसने जेब से एक छोटा फ्रेम निकाला।
उसमें तीन फोटो थीं —
पहली शादी,
तलाक का दिन (बारिश वाला),
और दूसरी शादी।
नीचे लिखा था —
“हम हर बार एक-दूसरे तक लौटे।”
नैना रो पड़ी।
🌹 एक डिवोर्स ऐसा भी
कुछ रिश्ते एक जन्म में नहीं बनते…
उन्हें कई बार जीना पड़ता है।
नैना और आरव ने
पति-पत्नी, अजनबी, दोस्त, प्रेमी —
हर रूप में एक-दूसरे को जिया।
और इसलिए…
उनका तलाक भी
उनकी मोहब्बत की कहानी का हिस्सा था।
वे हर दिन एक-दूसरे को चुनते थे।