(जब बेटी ने प्यार को समझा)
समय बीत गया।
आर्या अब 22 साल की हो चुकी थी।
कॉलेज खत्म हो गया था।
और वह बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिल से जीने वाली लड़की बन चुकी थी।
नैना उसे देखती तो मुस्कुराती —
“ये मेरी ही तरह प्यार में पूरी डूब जाएगी।”
आरव कहता —
“बस… उसे हमारे जैसी गलती न करनी पड़े।”
💌 पहली मोहब्बत
एक शाम आर्या घर आई तो चुप थी।
नैना ने तुरंत पहचान लिया —
“किसी ने दिल छुआ है?”
आर्या शर्मा गई।
“मम्मा… आर्यन है… मेरे साथ पढ़ता था…
हम एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”
आरव चुपचाप सुन रहा था।
उसे अपनी पुरानी यादें याद आ रही थीं —
जब उसने प्यार को हल्के में लिया था।
⚠️ डर
कुछ महीनों बाद…
आर्या रोते हुए घर आई।
“हम अलग हो रहे हैं…”
उसने कहा।
नैना ने उसे गले लगा लिया —
“क्यों?”
“वो कहता है… अभी करियर ज़रूरी है…
रिश्ते बाद में देखेंगे।”
आर्या टूट चुकी थी।
“क्या प्यार हमेशा छूट जाता है?”
उसने पूछा।
❤️ माँ की सीख
नैना ने उसका चेहरा उठाया —
“नहीं…
प्यार छूटता नहीं…
या तो अधूरा रह जाता है…
या इंतज़ार करता है।”
आर्या ने आँसू पोंछे —
“आपका और पापा का?”
नैना मुस्कुराई —
“हमारा प्यार भी बीच में छूट गया था।
लेकिन हमने उसे फिर चुना।”
👨👧 पिता की सच्चाई
उस रात आरव आर्या के कमरे में गया।
वह खिड़की के पास बैठी थी।
आरव बोला —
“मैं तुम्हें एक बात बताऊँ?”
“क्या?”
“मैंने तुम्हारी माँ को एक बार खो दिया था।
क्योंकि मुझे लगा… वो हमेशा रहेगी।”
आर्या चुप रही।
आरव की आवाज़ भारी थी —
“अगर कोई इंसान तुम्हें सच में चाहता है…
तो वो तुम्हें खोने का जोखिम नहीं लेता।”
“तो आर्यन मुझे सच में नहीं चाहता?”
आर्या ने डरते हुए पूछा।
आरव ने धीरे से कहा —
“या तो अभी समझेगा…
या हमेशा खो देगा।”
🌧 वही चक्र
छह महीने बाद।
आर्या की सगाई तय हो गई —
किसी और लड़के से।
घर में तैयारी चल रही थी।
लेकिन सगाई वाले दिन…
दरवाज़े पर कोई आया।
आर्या ने दरवाज़ा खोला —
आर्यन खड़ा था।
आँखें लाल…
साँस तेज।
“मैं गलती कर बैठा…”
उसने कहा।
“मैं तुम्हें खो नहीं सकता।”
आर्या की आँखों में आँसू आ गए।
🌹 एक डिवोर्स ऐसा भी
कुछ प्यार पहली बार में नहीं समझ आते।
उन्हें खोने का डर सिखाता है।
नैना और आरव ने जो सीखा था…
अब वही कहानी उनकी बेटी जी रही थी।
और उस दिन…
नैना ने आरव का हा(जब बेटी की शादी में फिर वही प्यार दिखा)
आर्या की शादी का दिन आ गया था।
घर में वही हलचल थी…
जो कभी नैना की शादी में थी।
लेकिन फर्क था —
इस बार डर कम था…
समझ ज़्यादा।
नैना आर्या का लहंगा ठीक करते-करते अचानक रुक गई।
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
आर्या मुस्कुराई —
“मम्मा… आप फिर रो रही हो?”
नैना ने हँसते हुए कहा —
“हर माँ रोती है।”
लेकिन सच यह था —
आज उसे अपनी दो शादियाँ याद आ रही थीं।
🪞 अतीत का आईना
आर्या ने पूछा —
“मम्मा… आपको डर लगा था शादी में?”
नैना कुछ पल चुप रही।
फिर बोली —
“पहली बार… बहुत।
दूसरी बार… बिल्कुल नहीं।”
“क्यों?”
नैना ने कहा —
“क्योंकि पहली बार मुझे लगा था प्यार अपने आप चल जाएगा।
दूसरी बार पता था —
प्यार रोज़ निभाना पड़ता है।”
आर्या ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
👰 पिता की विदाई
बारात आ चुकी थी।
आर्या मंडप में बैठी थी।
आरव उसे देख रहा था —
उसी तरह…
जैसे कभी नैना को देखा था।
लेकिन आज उसकी आँखों में एक और भावना थी —
कृतज्ञता।
फेरे शुरू होने से पहले…
आरव ने आर्या को अलग बुलाया।
“एक बात याद रखना,” उसने कहा।
“क्या पापा?”
“रिश्ता कभी अपने आप नहीं चलता।
अगर कभी दूरी लगे…
तो अलग होने से पहले…
फिर से दोस्त बनना।”
आर्या की आँखें भर आईं —
“आप और मम्मा की तरह?”
आरव मुस्कुराया —
“हाँ… हमारी सबसे बड़ी सीख।”
🌧 वही बारिश
शादी पूरी हो गई।
विदाई का समय आया।
अचानक आसमान में बादल छा गए…
और हल्की बारिश शुरू हो गई।
नैना और आरव एक-दूसरे को देखने लगे।
उन्हें वही दिन याद आ गया —
कोर्ट के बाहर… तलाक के बाद…
जब वे पहली बार सच में साथ खड़े थे।
आरव ने धीरे से कहा —
“बारिश फिर आ गई।”
नैना मुस्कुराई —
“हमेशा आती है…
जब हमारा प्यार नया होता है।”
🌹 अंतिम दृश्य
आर्या विदा होकर जा रही थी।
गाड़ी दूर जा रही थी।
नैना की आँखों से आँसू बह रहे थे।
आरव ने उसका हाथ पकड़ा।
“डर लग रहा है?” उसने पूछा।
नैना ने सिर हिलाया —
“नहीं…
क्योंकि अब पता है —
अगर प्यार सच्चा होगा…
तो रास्ता ढूँढ लेगा।”
आरव ने उसे अपनी ओर खींच लिया।
बारिश में खड़े दो लोग…
जो कभी तलाकशुदा थे…
आज भी पति-पत्नी थे।
दोस्त थे।
प्रेमी थे।
और उनकी मोहब्बत…
अब उनकी बेटी की जिंदगी में आगे बढ़ चुकी थी।
💞 एक डिवोर्स ऐसा भी
कुछ रिश्ते टूटते नहीं…
पीढ़ियों में बदलते हैं।
नैना और आरव का तलाक
उनकी हार नहीं था।
वह एक सीख थी —
जिसने तीन जिंदगियाँ बना दीं।थ पकड़ा और कहा —
“हमारी कहानी खत्म नहीं हुई थी…
ये आगे बढ़ गई।”