मोनिका :- क्यों आदित्य, क्या हूआ , हम ऐसा क्यों नही कर सकते ।
आदित्य :- क्योंकी ये गलत है ।
मोनिका :- कुछ गलत नही है आदित्य । हम दोनो एक दुसरे से प्यार करते है ना?
आदित्य :- नही मोनिका , मैं तुमसे प्यार करता था , पर अब नही ।
मोनिका :- अब नही का क्या मतलब ।
इतना बोलकर मोनिका फिर से आदित्य के करिब आने की कोशिश करती है , तो आदित्य मोनिका को रोकते हूए कहता है --
आदित्य: - मैं जानवी से प्यार करता हूँ ।
आदित्य से इतना सुनकर मोनिका हैरान हो जाती है , आदित्य भी हैरान था , क्योकी उसे भी ये पता नही था के वो जानवी से प्यार करता है ।
पर आज जब मोनिका उसके करिब आने की कोशिश की तब आदित्य को पता लगा के वो जानवी से प्यार करता है , मोनिका गुस्से से आदित्य से कहती है --
मोनिका :- और हमारा क्या आदित्य ! क्या तुम मुझसे प्यार नही करते ?
आदित्य :- हमारा क्या मोनिका , क्या तुमने कभी मुझसे प्यार किया था ।
मोनिका :- वो मेरी भूल थी आदित्य पर अब मैं समझ चुकी हूँ के मैं तुमसे ही प्यार करती हूँ ।
आदित्य :- तुम्हें ये अब पता चला मोनिका , जब विक्की ने तुम्हें छोड़ दिया , तब तो तुम्हें मेरी जरुरत नही थी , तो फिर अब क्या हो गया ?
मोनिका :- “क्योंकि तुम्हें मेरी जरूरत है… और शायद मुझे भी तुम्हारी।”
आदित्य हँस पड़ा—
आदित्य :- “मुझे? तुमने तो मुझे पैसों के लिए छोड़ा था, मोनिका। याद है?”
मोनिका ने नजरें झुका लीं, पर उसका दिमाग अभी भी चालों से भरा था।
कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद मोनिका धीरे से बोली—
मोनिका :- “विक्की ने मुझे छोड़ दिया, आदित्य…”पर अब मैं तुम्हारे पास आई हूँ , अपना प्यार मांगने ।
आदित्य ने कोई सहानुभूति नहीं दिखाई।
आदित्य :- " विक्की ने तुम्हें छोड़ा वो तुम्हारा चुनाव था। तुमने मुझे खुद छोड़ा था। अब मुझसे क्या चाहती हो?”
मोनिका के होंठ कांपे। उसकी आँख से एक आँसू निकल ही गया , उसे उसके सपने अधुरे लगने लगे ।
पर आदित्य जानता था—ये आँसू असली नहीं, हथियार हैं।
पर अगले ही पल उसने वो बात कही जो आदित्य को हिला गई—
मोनिका :- आदित्य “मैं प्रेग्नेंट हूँ…”
आदित्य चौंक गया। एक पल के लिए आदित्य चुप हो जाता है और फिर कहता है ---
आदित्य :- प्रेग्नेंट हो ! “विक्की का बच्चा, Right ?”
मोनिका ने धीमी आवाज़ में बोला—
मोनिका :- “नहीं आदित्य … ये बच्चा विक्की का नहीं हो सकता।”
और वो अचानक आदित्य के बहुत करीब आ गई ।
मोनिका ने आदित्य का चेहरा पकड़ने की कोशिश की। उसके स्वर में दर्द था, लेकिन आँखों में साजिश।
मोनिका :- “आदित्य… मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है। लेकिन अगर तुम… बस एक रात मेरे साथ…”
आदित्य पीछे हट गया और मोनिका से कहा ---
आदित्य :- “दिमाग खराब है तुम्हारा मोनिका ?”
मोनिका ने चालाकी से मुस्कुराया और कहा —
मोनिका :- मैने सब कुछ सौच कर रखा है आदित्य बस एक रात हम दोनो ने वो सब कर लिया तो उस के बाद मैं कह सकती हूँ कि बच्चा तुम्हारा है। सबकी नजर में मैं सच बोल रही होऊँगी… क्योंकि हम पहले भी साथ थे।”
आदित्य ने गुस्से में उसका हाथ झटक दिया—
आदित्य :- “मोनिका! I am married now. तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हारे इस गंदे प्लान में फँस जाऊँगा?” ओ अच्छा तो तुम इसिलिए आज मेरे साथ ये सब करने की कोशिश कर रही थी । वाह क्या प्लानिंग है मोनिका , एक पल के लिए तो मैं भी बहक गया था ।
मोनिका ने अपने सारे ज़ख्म दिखाने शुरू कर दिए—जो असल में आधे थे, आधे बनावटी।
मोनिका :- “विक्की मुझे पैसे के लिए इस्तेमाल कर रहा था! जैसे मैंने तुम्हें किया था…”
वो खुद अपने सच कबूल रही थी—
मोनिका :- “मैं लालची थी, हाँ! मैंने तुम्हें पैसों के लिए छोड़ा था, पर अब उन्हीं पैसों ने मुझे बर्बाद कर दिया।”
उसके चेहरे पर पागलपन दिख रहा था।
मोनिका :- “मैं किसी और का बोझ नहीं उठा सकती। इस बच्चे के बाप की जरूरत है—और वो तुम बनोगे। तुम ही मुझे इस बर्बादी से बचा सकते हो आदित्य और वैसे भी वो जानवी से तो तुम्हारी डिवोर्स हो गई है और फिर वो तुमसे प्यार भी नही करती वो तो एक दिन तुम्हें छोड़कर चली जाएगी , पर मैं कभी नही जाउगीं , तुम इस बच्चे की चितां बिल्कुल भी मत करना , तुम्हें इसके लिए कुछ भी करने की जरुरत नही पड़ेगा , मैने इसके लिए 20 लाख रुपये रखे है , इसका सारा खर्चा मैं करुगी , बस इस बच्चो का नाम तुम्हारा रहेगा । इस बच्चे के बाद हम एक और बच्चा लेगें जो मेरा और तुम्हारा होगा ।
आदित्य ने गुस्से से कहा—
आदित्य :- “कभी नहीं , ऐसा कभी नही होगा ।
मोनिका अचानक रुक गई।फिर उसकी आँखें ठंडी हो गईं। उसने खतरनाक मुस्कान दी—
मोनिका उसकी तरफ बढ़ी, चेहरे पर मजबूरी और चालाकी का मिला-जुला भाव।
मोनिका :- “आदित्य… मेरी बात सुनो… मैं अकेली हूँ… मेरे पेट में तुम्हारा—”
आदित्य :- “बस!”
आदित्य ने तेज़ आवाज़ में कहा।
उसकी आवाज़ में इतना सख्त गुस्सा था कि मोनिका एक पल के लिए रुक गई।
आदित्य :- “ये बच्चा मेरा नहीं है। और तुम बहुत अच्छी तरह जानती हो कि तुम मुझे छोड़कर विक्की के पास गई थीं! पैसा चाहिए था ना तुम्हें ? तो ले लिया था। अब क्या चाहिए?”
मोनिका की आँखों से आँसू गिरने लगे, पर उन आँसुओं में सच्चाई कम और नाटक ज्यादा था।
वो आदित्य के करीब आने की कोशिश करती है—
मोनिका :- “आदित्य, एक बार सोचो… अगर मैंने कहा कि तुम ही बाप हो तो हर कोई मान लेगा… लोग सबूत नहीं देखते, बस कहानी देखना पसंद करते हैं। तुम मेरा साथ नहीं दोगे तो मैं बर्बाद हो जाऊंगी…”
आदित्य ने गहरी साँस ली। उसका चेहरा कठोर पड़ गया और बड़े ही शख्त लहजे से कहा ---
आदित्य :- “और मेरे बारे में क्या जानवी ? मेरी इज़्ज़त? मेरी जिंदगी?
मेरी शादी? और जानवी? तुम्हें इन सबकी कोई परवाह नहीं?”
मोनिका के चेहरे का रंग उड़ गया। वो नहीं चाहती थी कि जानवी का नाम आए।
मोनिका :- “जानवी को मत घसीटो बीच में… तुम उस जानवी की वजह से ही मुझे नही अपना रहे हो ना , ठिक है मैं उसो ही रास्ते सो हटा दुगीं ।
उसने धीमी पर सख्त आवाज़ में कहा।
आदित्य अब गुस्से से काँप रहा था—
आदित्य :- “तुमने खुद मुझे कमजोरी समझकर इस्तेमाल करना चाहा। अब मैं तुम्हारी ब्लैकमेलिंग का हिस्सा नहीं बनूँगा। ये कपड़े लो और जाकर चेंज कर लो। और हाँ— अगर भविष्य में तुमने मेरे नाम को अपने बच्चे से जोड़ने की कोशिश भी की…तो मैं सबसे पहले पुलिस में शिकायत करूँगा।”
मोनिका का चेहरा एकदम उतर गया। उसे पहली बार महसूस हुआ कि आदित्य अब वो पुराना, भोला लड़का नहीं रहा।
वो बदल चुका था—और इस बार उसके झांसे में नहीं आएगा।
वो धीरे-धीरे कपड़े उठाती है…आँखें लाल…होंठ काँप रहे हैं…पर दिमाग अब भी चालाकी से चल रहा है।
मोनिका :- “ठीक है आदित्य… अभी मैं पीछे हट रही हूँ…पर खेल खत्म नहीं हुआ है। तुम सोच भी नहीं सकते कि मैं आगे क्या कर सकती हूँ…”
वो मन-ही-मन बुदबुदाती है।
क्योंकि मोनिका जानती थी—जब दिल और पेट दोनों खाली हों, तो इंसान कुछ भी कर सकता है।
और अभी…वो बिल्कुल उसी मोड़ पर खड़ी थी। मोनिका गुस्से से वहां से चली जाती है , आदित्य इतना कुछ होने के बाद परेशान हो जाता है और आदित्य वही पर अपना सर पकड़कर सोफे पर बैठ जाता है , तभी आदित्य की नजर घड़ी पर जाता है और दैखता है के रात के 12:35 हो रहा था , आदित्य को जानवी की चितां होने लगी , क्योकि जानवी शाम को 8:30 बजे वहां से चली गई थी ।
आदित्य को लगा के जानवी विकास के पास गई है तो आदित्य तुरंत बिना समय गवांए विकास को फोन करता है , विकास की उधर से आवाज आता है --
विकास :- बोलो , किस लिए फोन किया ।
आदित्य :- जानवी है क्या तुम्हारे साथ ।
विकास :- मेरे पास तुम्हारे फालतु सवाल का जवाब नही है ।
आदित्य गुस्से से कहता है --
आदित्य: - वो है या नही ।
विकास :- Oh Common आदित्य, मैं जानवी का नौकर तो नही हूँ के मुझे मालुम हो के वो कहां गई है , अभी तो वो तुम्हारे साथ रहती है ना , तो तुम्हें मेरे से ज्यादा पता होगा के वो कहां पर है ।
आदित्य अपने गुस्से को दबाकर कहता है --
आदित्य: - दैखो विकास , जानवी तुमसे प्यार करती है , कमसे कम उसके बारे मे तो ऐसा मत बोलो , दैखो वो डिनर के बाद 8: 30 कही निकली है और अभी तक नही आई है तो मुझे लगा वो शायद तुम्हारे पास गई होगी ।
विकास :- वो यहां पर नही आई है ।
इतना बोलकर विकास फोन काट देता है । तब आदित्य जानवी को फोन करता है , जानवी कार चला रही थी , जानवी के आंखो मे आंशु था , जानवी रो रही थी , रोती भी क्यों ना , उसने जो दैखा उससे उसके दिल को गहरी चोट लगी थी । जानवी को लगने लगा था के मोनिका और आदित्य एक दुसरे से प्यार करता है ।
जानवी के फोन पर आदित्य के कई बार कॉल आता है पर जानवी फोन रिसिव नही करती है जिससे आदित्य घबरा जाता है , तब आदित्य अशोक को फोन करता है जो सोया हूआ था ।
फोन के आवाज से अशोक बेड से उठता है और दैखता है के आदित्य का कॉल था जिसो दैखकर अशोक हैरान था और कहता है --
अशोक :- आदित्य का कॉल इस समय ?
अशोक फोन रिसिव करता है और कहता है --
अशोक :- आदित्य , बेटा क्या बात है , इतनी रात को फोन किया ।
आदित्य :- पापा , वो जानवी आपके पास आई है क्या ! वो शाम को पता नही बिना बताए कहां चली गई और अभी तक आई नही , मैने बहोत बार कॉल किया पर उसने उठाया ही नही ।
अशोक :- हां वो आई तो थी , पर वो फिर यहां से निकल गई , बोली के तुम अकेले हो और तुमसे कुछ कहना चाहती है , पर अबतक तो उसे पहूँच जाना चाहिए था ।
आदित्य :- मुझसे कुछ कहना चाहती थी , पर क्या पापा , क्या उसने कुछ बताया आपको ?
अशोक :- वो तुम उससे ही पूछ लेना ।
आदित्य :- पर वो अभी तक आई क्यों नही ।
तभी अशोक के गेट का बेल बजता है अशोक आदित्य से कहता है --
अशोक :- बेटा एक मिनट ।
इतना बोलकर अशोक बाहर आता है तो देखता है के नोकरो ने दरवाजा खोला और जानवी अंदर आई , जानवी के आंखो पर आंशु था जिसे दैखकर अशोक हैरान था , तभी अशोक कहता है --
अशोक :- जानवी ....
जानवी का नाम सुनकर आदित्य कहता है --
आदित्य :- जानवी ! पापा जानवी वहां पर है क्या ?
अशोक :- हां बेटा , वो अभी यहां पर आई है , लेकिन ...
आदित्य: - लेकिन क्या पापा?
अशोक :- जानवी तो तुम्हारे पास गई थी बेटा पर ये अचानक वापस और वो भी रोती हूई ।
आदित्य हैरान था के ऐसा क्या हो गया के जानवी उसके पास ना आकर वापस चली गई और भी रोती हूई ।
अशोक फिर कहता है --
अशोक :- बेटा मैं तुम्हें बाद मे कॉल करता हूँ ।
आदित्य :- ठिक है पापा ।
अशोक फोन काट देता है और जानवी के पास चला जाता है , जानवी अपने कमरे मे थी , जानवी को बहोत दुख हूआ था उसके सपने उसका दिल टुट चुका था और अब जानवी फूट - फूट कर रो रही थी ।
To be continue.....603