समुद्र जितना शांत दिखता है, उतना ही खतरनाक भी है। खासकर तब, जब हवा अचानक थम जाए और लहरें बिना आवाज के जमी हुई लगें। पुराने नाविक कहते थे कि ऐसी खामोशी किसी तूफान से पहले नहीं, बल्कि एक गीत से पहले आती है। एक ऐसा गीत जो कानों से नहीं, सीधे दिल और दिमाग में उतरता है।
यह कहानी है जलपरियों के गीत की। आज उन्हें परियों जैसी मासूम समझा जाता है, लेकिन प्राचीन कथाओं में वे सायरन्स कहलाती थीं और उनका नाम सुनते ही नाविक कांप उठते थे। भूमध्य सागर के बीचोंबीच कुछ ऐसे इलाके थे जहां पानी के नीचे नुकीली चट्टानें छुपी रहती थीं। जहाज जैसे ही वहां पहुंचता, हवा रुक जाती और तभी दूर से एक मीठी सी धुन सुनाई देती।
वह कोई तेज आवाज नहीं थी। बस एक धीमा, रेशमी सा संगीत। लेकिन जैसे जैसे जहाज आगे बढ़ता, गीत और साफ होता जाता। हैरानी की बात यह थी कि हर इंसान को उस गीत में कुछ अलग सुनाई देता। जो अकेला होता, उसे अपने पुराने प्रेम की आवाज सुनाई देती। जो लालची होता, उसे सोने और छुपे हुए खजानों का वादा लगता। और जो जिंदगी से थक चुका होता, उसे हमेशा के आराम और शांति का बुलावा महसूस होता।
धीरे धीरे इस गीत का असर शुरू हो जाता। नाविकों की आंखें खाली हो जातीं, जैसे उनकी आत्मा कहीं और खिंच गई हो। वे अपने कप्तान की चीखें नहीं सुनते। उन्हें जहाज कैदखाना लगने लगता और समुद्र का काला पानी रेशमी बिस्तर जैसा दिखने लगता। फिर एक एक करके वे जहाज से कूद पड़ते। उन्हें लगता कि वे किसी अपने की बाहों में जा रहे हैं।
लेकिन जो पानी में उतरता, वह कभी वापस नहीं आता।
इन सबके बीच एक नाम इतिहास में अमर हो गया। ओडिसियस। वह पहला इंसान था जिसने सायरन्स का गीत सुना और फिर भी जिंदा बच निकला। उसे पहले से चेतावनी मिल चुकी थी। उसने अपने सभी नाविकों के कान मोम से बंद करवा दिए ताकि वे कुछ सुन न सकें। लेकिन खुद वह उस गीत को सुनना चाहता था। इसलिए उसने अपने आदमियों को आदेश दिया कि उसे जहाज के मस्तूल से कसकर बांध दिया जाए।
उसने साफ कहा कि चाहे वह कितना भी चिल्लाए, रोए या आजाद करने की भीख मांगे, उसे खोलना नहीं। बल्कि और कसकर बांध देना।
जब उनका जहाज सायरन्स के द्वीप के पास पहुंचा, ओडिसियस ने वह गीत सुना। कुछ ही पल में उसका दिमाग जैसे जलने लगा। वह पागलों की तरह छटपटाने लगा। उसने अपने आदमियों से चीख चीख कर कहा कि उसे खोल दो। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। लेकिन उसके आदमी कुछ सुन ही नहीं सकते थे। वे बस चुपचाप आगे बढ़ते रहे और आखिरकार मौत के उस इलाके से बाहर निकल गए।
पुरानी कथाएं कहती हैं कि सायरन्स कभी किसी को बचाने के लिए नहीं गाती थीं। जैसे ही कोई इंसान पानी में गिरता, उनका सुंदर रूप गायब हो जाता। वह मोहक चेहरा एक शिकारी का बन जाता। उनकी आंखें ठंडी और क्रूर होतीं और दांत सुई की तरह नुकीले। नाविक किसी महल या प्रेम में नहीं, बल्कि सीधे शिकार बनकर बुलाए जाते थे।
आज भी पुराने नाविक कहते हैं कि अगर समुद्र में अचानक अजीब सी शांति छा जाए और दूर से कोई मधुर गीत सुनाई दे, तो समझ जाना कि वह प्यार की आवाज नहीं है। वह भूख की पुकार है। और समुद्र, शिकार के लिए सबसे एकांत जगह।