विजय ने अब वापस अपना पुराना काम शुरू कर दिया था, धीरे धीरे दिन गुजरने लगे अचानक शहर में एक महामारी फैली जिसने मासूम बच्चों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया,,,,,
सभी उस बीमारी से काफी डरे थे अस्पतालों में अब बच्चों की भीड़ काफी बढ़ने लगी, आए दिन बच्चों की बीमारी से मरने की खबरें आने लगी जिसमें सभी लोगों को काफी परेशान कर दिया,,,,,
इससे पहले बच्चे को थोड़ी सर्दी होती फिर बुखार आता और धीरे-धीरे बच्चे की हालत में बिगड़ जाती थी और वह बेहोशी की हालत में पहुंच जाता, ऐसी हालत में उसे बचाना काफी मुश्किल था,,,,,
सरकार ने यह देखकर जल्दी से जल्दी बच्चों की सुरक्षा के लिए दवाइयां उपलब्ध कराना शुरू कर दिया, लेकिन लगातार बच्चों की बढ़ती बीमार बच्चों की बढ़ती संख्या के कारण दवाइयां भी कम पड़ने लगी,अस्पतालों में अब पैर रखने तक की जगह नहीं थी,,,,,
अचानक एक दिन इस बीमारी ने सुनील दत्त के छोटे बेटे और सन्नो के बेटे को अपनी चपेट में ले लिया,,,,,
धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ने लगी तो दोनों ही उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उस बीमारी के लिए जो इंजेक्शन था उस समय उस अस्पताल में मात्र एक ही था,,,
सुनील दत्त ने आसपास के शहरों अपने शहर उस बीमारी के इंजेक्शन की खोज की लेकिन सभी जगह वह इंजेक्शन खत्म हो चुका था, क्योंकि शहर में दिनों दिन बढ़ते आंकड़ों की वजह से दवाइयां इंजेक्शन काफी कम थी,,,,,
सन्नो और सुनील दत्त के बच्चे को भर्ती कर लिया गया दोनों का ही रो रो कर बुरा हाल था, सन्नू बार बार भगवान से अपने बच्चे को सही करने की दुहाई मांग रही थी, वही सुनील दत्त की आंखों में आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे,,,,
तभी अचानक डॉक्टर भागते हुए बाहर आए उसे देखकर सन्नो और सुनील दत्त दोनों ही खड़े हो गए,,,,
तब डॉक्टर बोले कि दोनों बच्चों की हालत काफी खराब है, मात्र एक ही इंजेक्शन है जिससे एक बच्चे की जान बचा सकते हैं दूसरे के बारे में कुछ कह नहीं सकते इसलिए हमें यह समझ नहीं आ रहा कि हम किस बच्चे को इंजेक्शन लगाए, वैसे तो संगीता जी का बेटा पहले भर्ती हुआ है इस हिसाब से तो इंजेक्शन उसे ही लगना चाहिए लेकिन फिर भी फैसला आपके हाथ में है,,,,,
यह सुनकर सन्नो और सुनील दत्त दोनों ही सोच में पड़ गए, दोनों के ही कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,
तभी अचानक संगीता रोते हुए बोली डॉक्टर साहब आप सुनील दत्त सर के बेटे को बचा लीजिए,,,,
यह सुनना था कि डॉक्टर कुछ कहता,,,, तब संगीता जल्दी से बोली जाइए डॉक्टर साहब और वक्त नहीं है,,,,
यह सुनकर डॉक्टर वहां से चला गया ,सुनील दत्त कुछ कहता इससे पहले ही डॉक्टर वहां से चला गया था सुनील दत्त डॉक्टर को जाते देकर और संगीता के फैसले से से काफी हैरान और परेशान भी था,सन्नो यानी संगीता ने अपने इकलौते बेटे की जिंदगी ना चुनकर उसके बेटे की जिंदगी चुनी है,,,,,
तब सुनील दत्त ने संगीता से कहा कि तुम चाहती तो अपने बेटे के लिए उस इंजेक्शन को चुन सकती थी लेकिन तुमने मेरी बेटे की जिंदगी चुनी, यह सब कुछ जानते हुए कि उसके बाद तुम्हारे बेटा,,,,,
यह कहते हुए सुनील दत्त रो पड़ा और बोला मैं तुम्हारा एहसानमंद हूं मैं जिंदगी भर तुम्हारा एहसान नहीं भुला पाऊंगा,,,,,
यह सुनकर सन्नू बोली अपने बच्चों को खोने का दर्द एक माता-पिता से बेहतर कौन समझ सकता है, मैं जानती हूं जो इस पल मुझ पर बीत रहे वही आप पर बीत रही है, मैं इतनी स्वार्थी नहीं हो सकती कि अपने बच्चे की जिंदगी चुनकर आपके बच्चे को मौत के मुंह में धकेल दो, मुझे मेरे भगवान पर पूरा भरोसा है,,,,
यह कहकर सन्नो रोने लग गई निशा भी बच्चों की गंभीर हालत के बारे में सुनकर अस्पताल आ गई थी वह भी भगवान से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना कर रही थी,,,,