The Cat Who Turned Into a Human - 4 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | बिल्ली जो इंसान बनती थी - 4

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 4

सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। खिड़की से आती रोशनी शानवी के चेहरे पर पड़ी…और उसकी नींद टूट गई।
लेकिन आज…वो उठते ही चौंक गई। उसका दिल…बिना किसी वजह के तेज़-तेज़ धड़क रहा था। साँसें थोड़ी भारी थीं।

वो बोली - 
अजीब है...!

उसे याद नहीं था कि उसने कोई बुरा सपना देखा हो…लेकिन फिर भी…उसके मन में एक बेचैनी थी। एक अजीब सा डर…जैसे…किसी ने बहुत दर्द सहा हो…और उसकी चीखें…कहीं न कहीं…उसके दिल तक पहुँच गई हों। उसने अपनी छाती पर हाथ रखा।

वो बोली - 
क्यों ऐसा लग रहा है… जैसे कुछ बहुत गलत हुआ हो?

उसी वक्त…बिस्तर के पास वही सफेद बिल्ला बैठा था।कार्तिकेय। वो उसे बहुत ध्यान से देख रहा था। उसकी आँखों में चिंता थी।

कार्तिकेय सोचने लगा - 
क्या ये…उसकी यादों का असर है…?
या फिर....कोई रिश्ता बन रहा है…?

शानवी ने उसे गोद में उठा लिया।

शानवी बोली - 
पता नहीं क्यों आज दिल बहुत घबरा रहा है…।

वो उससे बात करने लगी। बिल्ला चुपचाप उसकी तरफ देखता रहा।

और मन ही मन बोला —
काश तुम जान पाती…कि ये घबराहट…मेरी कहानी की परछाईं है…।

शानवी को क्या पता था…ये बेचैनी…सिर्फ एक शुरुआत थी।
उस दिन शानवी का मन बिल्कुल ठीक नहीं था। सुबह से ही दिल भारी था…बिना किसी वजह के। वो ऑफिस पहुँची। अपना लैपटॉप खोला…काम शुरू किया। लेकिन आज…उसका ध्यान बार-बार भटक रहा था। एक कोड लिखा…फिर मिटाया। फिर लिखा…फिर गलत हो गया।

सीनियर की मेल आई —
Fix the error ASAP.

उसने जल्दी-जल्दी ठीक करने की कोशिश की… और और भी गड़बड़ कर दी। उसके हाथ काँप रहे थे।

शानवी बोली - 
आज मुझे हो क्या रहा है…?

वो कुर्सी पर पीछे टिक गई। आँखें बंद कीं। और उसी पल…
उसके दिमाग में एक अजीब सी तस्वीर उभरी —
🔥 आग…
🔥 चीख…
🔥 और किसी लड़की की बेबस आँखें…
वो झटके से सीधी बैठ गई।

वो बोली - 
नहीं… ये सब क्या सोच रही हूँ मैं…

उसने सिर झटक दिया।पूरा दिन…कभी गलत फाइल भेज देती
कभी मीटिंग का टाइम भूल जाती कभी स्क्रीन के सामने बैठी… बस खाली देखती रहती। उसके साथी भी नोटिस करने लगे।

एक बोला - 
शानवी, आज तुम ठीक नहीं लग रही हो…

वो बस हल्की सी मुस्कान दे देती।

शानवी बोली - 
हाँ… बस थोड़ा सा सिर दर्द है…।

लेकिन सच्चाई ये थी… उसका दिल कहीं और अटका हुआ था।
और उसी वक्त…उसके केबिन में रखे बैग के अंदर…वो सफेद बिल्ला…चुपचाप बैठा था। कार्तिकेय। वो महसूस कर रहा था…
कि उसकी यादों का बोझ…अब शानवी के दिल तक पहुँचने लगा है।

कार्तिकेय बोला - 
अगर ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा…
तो ये सच खुद-ब-खुद मेरे करीब आ जाएगी…

कार्तिकेय खिड़की के पास बैठा शानवी को जाते हुए देख रहा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी…
और उससे भी पुराना एक सच।

वो बोला - 
आज पूरे 24 साल हो गए…

हाँ…कार्तिकेय 24 साल पहले ही बिल्ली बन चुका था।
उस दिन के बाद…उसकी उम्र न घटती थी… न बढ़ती थी।
वो जैसा था… वैसा ही अटका रह गया था।
ना बूढ़ा होता…ना जवान।

कार्तिकेय बोला - 
वक़्त मेरे लिए रुक गया है…”जब तक मैं हमेशा के लिए इंसान नहीं बन जाता…।



उसे पता था —
जिस दिन मैं पूरी तरह इंसान बन जाऊँगा…
उसी दिन से मेरी उम्र फिर से चलने लगेगी…।

वरना वो हमेशा, एक शापित, रुका हुआ वजूद ही रहेगा। वो धीरे से मुड़ा…और शानवी की तरफ देखा। उसकी आँखों में वही चेहरा था…वही मासूमियत…वही आँखें…।

वो बोला - 
तुम बिल्कुल उसकी जैसी दिखती हो…।

उस लड़की जैसी…जिसे उसने 24 साल पहले आग में खो दिया था।

कभी-कभी उसे लगता - 
ये कोई इत्तेफ़ाक नहीं है…
या तो तुम उसकी हमशक्ल हो…
या फिर…उसका दूसरा जन्म…।

इसीलिए…वो शानवी को देखता रहता था।
इसीलिए…वो उसके पास रहना चाहता था।
डरते हुए भी…उम्मीद करते हुए भी…

कार्तिकेय बोला - 
अगर सच में तुम वही हो…तो शायद…इस बार मैं तुम्हें बचा सकूँ…।

कमरे में शानवी की हँसी की आवाज़ गूँजी। और कार्तिकेय…
एक पल के लिए भूल गया…कि वो एक शापित इंसान है।

उस रात शानवी बहुत थकी हुई थी। दिन की उलझनें...मन की बेचैनी…सब लेकर वो जल्दी सो गई। लेकिन उसकी नींद…सुकून वाली नहीं थी।

🌫️ सपने में…
वो खुद को एक अजीब सी जगह पर खड़ा पाती है।
चारों तरफ अंधेरा...और सामने…🔥 एक बड़ी सी आग।
हवन-कुंड जैसा कुछ…आग की लपटें बहुत तेज़ थीं।
उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है।

वो बोली - 
मैं यहाँ… क्यों हूँ…?

तभी…पीछे से एक दर्द भरी आवाज़ आती है —
शानवी…!

वो चौंककर पलटती है। कोई नहीं दिखता।

फिर वही आवाज़… इस बार और पास से —
शानवी नहीं…!

कार्तिकेय…

उसका शरीर काँप जाता है।

वो बोली - 
क… कार्तिकेय?
ये नाम मुझे कैसे पता है…?

आग की लपटों में उसे एक धुंधला सा चेहरा दिखता है…
आँखों में आँसू…हाथ उसकी तरफ बढ़ा हुआ…।

वो बोला - 
इस बार… मुझे बचा लेना…।

अचानक आग और तेज़ हो जाती है। चारों तरफ धुआँ…वो चीखना चाहती है…और तभी…

😱 शानवी चौंककर जाग जाती है।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ।
दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे सीने से बाहर निकल आएगा।

शानवी बोली - 
ये… ये कैसा सपना था…?

वो बिस्तर पर बैठ गई। तभी उसकी नजर…अपने पास बैठे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी। कार्तिकेय। वो उसे बहुत ध्यान से देख रहा था। उसकी आँखों में…डर था। और उम्मीद भी।

वो बोली - 
क्या तुमने भी… वो देखा…?
या ये सिर्फ मेरी यादें थीं…?

शानवी का दिल अजीब तरह से काँप गया। और उसे पहली बार…सच में लगा… ये सब सिर्फ सपना नहीं था।

क्या शानवी सच जान पाएगी?
क्या कार्तिकेय फिर से इंसान बनेगा? 

जानने के लिए पढ़ते रहिए। और अगर आपको हमारी story पसंद आ रही है तो follow भी कर दीजिए 🤗🤗🤗।
और बताइए कि कहानी में आपको सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा। तब तक के लिए धन्यवाद.....। 🤗🤗🤗🤗