Trisha - 30 in Hindi Women Focused by vrinda books and stories PDF | त्रिशा... - 30

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त्रिशा... - 30

"क्या कहा रे तूने???????? 
अब तू मुझे बताएगी कि  मुझे क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना ??????" 
"मेरी मर्जी, मेरा मन, मेरा मुंह,  मैं चाहे जो बोलूं और चाहे जिसे बोलूं!!!!!! तू होती कौन है मुझे रोकने वाली!!!!!!!!"
" अभी आए एक दिन भी हुआ नहीं सही से और तू मुझे समझने में लगी है कि मैं क्या बोलूं और क्या नहीं!!!!!!!" राजन‌ शराब के नशे में बड़बड़ाता रहा। 

"देखिए, आपने बहुत शराब पी रखी है इसलिए आप यह सब बोल रहे है और आप खाना खा लिजिए और वैसे भी  मैं आपसे बहस नहीं करना‌ चाहती।  कम से कम आज के दिन तो बिल्कुल नहीं करना चाहती।।।।" त्रिशा घबराती हुई बोली। उसे यह सब कहने में  डर भी लग रहा था लेकिन अभी तो बस वो किसी भी तरह से राजन की खाना खिला के सुला देना चाहती थी। क्योंकि उसे कुछ समझ नहीं रहा था कि उसकी सोच से विपरीत सामने खड़े राजन को वो कैसे झेले। 

"आज हमारी शादी के बाद का पहला दिन है। हमारी शादी के बाद यह पहला समय था जब हम दोनों अकेले थे।  कितना सुंदर, कितना अहम और कितना प्यारा क्षण था यह हमारे लिए। आप इसे  शराब के नशे में यूं बर्बाद क्यों कर रहे है !!!!!!!!!"
" आज के दिन इतनी शराब पीने की जरूरत क्या थी आपको!!!!!!! "  त्रिशा ने अपनी भावनाएं कहने से खुद को रोकना  चाहा पर रोक ना पाई। उसने बहुत कुछ सुना था कि शादी के बाद पहली बार पति पत्नी प्यार के पलों को जीते है, अपने लिए हसीन यादें बनाते है, अपना प्यार जाहिर करते है पर कहीं भी और कभी भी उसने यह नहीं सोचा था कि शादी के बाद राजन और उसकी पहली बातचीत यूं होगी, इस तरह की होगी‌। 

त्रिशा का इतना कहना था कि बस राजन का पारा गुस्से से एकदम ऊपर पहुंच गया। उसने अपने हाथ में पकड़ी हुई खाने की थाली उठा कर गुस्से में जमीन पर फेंक दी। 

ठनननननन.......... की आवाज करते हुए खाने की थाली दूर हवा में उड़ती हुई जमीन पर गिर पड़ी और सारा खाना जमीन पर इधर उधर बिखर गया। राजन को ऐसा करते देख अब तो त्रिशा की आवाज गायब ही हो गई। वह डर के कारण सकपका गई और वहीं सहम कर खड़ी हो गई।‌ पर इससे‌ पहले त्रिशा को संभाल पाती राजन उसकी ओर गुस्से में बढ़ने लगा। 

"क्या बोली‌ तू?????? "
"तू मुझसे बहस करेगी!!!!!!!"
"तू मुझे समझाएगी!!!!!!!"  राजन ने त्रिशा की ठोढ़ी को अपने हाथों से कसकर पकड़कर गुस्से में कहा जिसके जवाब में त्रिशा के मुंह से आह निकल पड़ी। लेकिन उसे सुनकर भी राजन रुका नहीं। 

राजन ने अपने दूसरे हाथ से त्रिशा की कलाई कस कर पकड़ी और गुस्से में गुर्रा कर बोला, "और क्या कहा तूने अभी कि  मै बर्बाद कर रहा हूं सब कुछ?????"
"क्या बर्बाद किया मैनें????"
"उल्टा तूने मेरा सारा मूड खराब कर दिया????? 
मैं तो देख तेरे लिए आज मुंह दिखाई के लिए गिफ्ट में यह हीरे की अंगूठी तक लेकर आया था पर तूने तो अब इतना मन खराब कर दिया मेरा कि तुझे कुछ देने तक का मन नहीं है मेरा अब!!!!!!!!" इतना कहकर राजन ने अपनी जेब से एक डब्बी निकल कर त्रिशा के आगे फेंक दी। 

एकदम अचानक से राजन का यह रुप देखकर त्रिशा के पांव तले जमीन खिसक गई। उसने सपने में भी कल्पना नहीं कि थी उसका पति कभी उस से इस तरह की भाषा का प्रयोग कर बात करेगा और उस पर यूं  जोर दिखाएगा। त्रिशा के चेहरे पर राजन के रुप को देखकर डर साफ दिखाई दे रहा था। उसके साथ आज तक कभी किसी ने ना तो ऐसे बात की थी और ना ही कभी उस पर किसी ने ताकत का जोर दिखाया था। 


"और तू कौन होती है मुझे बताने वाली की मुझे शराब कब पीनी है और कब नहीं?????" 
" मेरी मर्जी मैं जब चाहे जितनी चाहे पीऊं!!!!!! तू यहां मेरी पत्नी बनकर आई है!!!!! तेरा‌ काम केवल मेरी सेवा करना और मुझे खुश करना है!!!!!!!!!" 
"अरे मैं पति हूं तेरा!!!!! मेरे आगे कुछ भी बोलने का या मुझे हुक्म देने का कोई हक नहीं है तुझे!!!!!!!!" 


त्रिशा की आंखों से बहते आसूंओ को अनदेखा कर राजन ने उसकी ठोढ़ी छोड़ दी पर उसकी कलाई पर अपनी पकड़ और भी कस दी। इतनी ताकत लगने के कारण त्रिशा के हाथ में जो कांच की चूड़ी पड़ी थी वो टूट गई  और कांच त्रिशा की कलाई में चुभ गया जिससे त्रिशा की जोर की चीख निकली "आह!!!!!!!!" 
और फिर उसकी मेंहदी लगी गोरी गोरी कलाई से खून निकलने लगा। 

"क्या आ....... आ...... कर रही है तू???????" अभी तो तुझ पर मैनें जोर भी नहीं दिखाया है अपना, अभी से आ आ करे जा रही है!!!!!!!!!!!" राजन ने त्रिशा के कलाई को मोड़ते हुए कहा।‌

"च........ चो....चोट लगी है!!!!!! द....... द... दर्द हो...... रहा है!!!!!!! ख...... खू...... खून भी नि........निकल र.......रहा है....!!!!!!!!!!" त्रिशा ने सुबकते सुबकते राजन से कहा। दर्द और डर के कारण उसकी आवाज बहुत ही धीमी होकर रह गई थी। 

"कैसी चोट?????? कौन सा दर्द????? और कैसा खून???? क्या बोले जा रही है????" राजन ने त्रिशा की कलाई छोड़कर बालों को कसकर पकड़ लिया। 

त्रिशा अभी भी शादी के लंहगे में ही थी और उसके सिर पर अभी भी उसकी चुन्नी पड़ी हुई थी जिसके कारण त्रिशा के सारे बाल राजन की ताकत लगाने पर उसकी पकड़ में ना आ सके उल्टा त्रिशा के बालों और चुन्नी में लगी पिन राजन के हाथ में चुभ गई जिसपर राजन खिसया उठा।

राजन ने त्रिशा के बालों को पकड़ने के लिए जैसे ही उन्हें छुआ उसकी चुन्नी और जूडे में लगी पिन उसके हाथ में चुभ गई, जिसपर वह खिसया उठा और गुस्से में बोला," पता नहीं क्या क्या लगा के रखा है बालो में???????????" 
"हो गई ना शादी अब तो, तो फिर उतार‌ ना इन ताम झाम को!!!!!!!!!!!! अब तक क्यों पहन कर बैठी है इन सबको।।।।।।  अब देख  तेरे चक्कर में मेरे और लग गई !!!!!!!!!" 

कहते है शादी के लंहगे में एक लड़की सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती है। उस जोड़े में उसका रुप कुछ अलग ही निखरकर आता है। उसका पति तो उस लड़की पर‌ अपनी जान फिदा करने को तैयार हो जाता है शादी के जोड़े में देखकर पर राजन........। 
राजन ने त्रिशा को यूं इस तरह से बोल दिया जैसे कि शादी का लंहगा ना कोई बहुत बेकार चीज हो। त्रिशा राजन के चेहरे की तरफ देखने लगी, उसने भी अपने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए बहुत से सपने सजाए थे लेकिन इस समय वह सपने चूर चूर हो रहे थे और त्रिशा की आंखों से आसूं बनकर बह रहे थे।