अब आगे।।।
शाम के समय।।
नियति इस वक्त अपने अपार्टमेंट में मौजूद थी,, वहीं डॉ सुशीला उससे मिलकर जा चुकी थी,,वहीं नियति किचेन में गई,,ओर अपने लिए चाय बनाने लगी,,
वहीं वो चाय बनाते बनाते कुछ सोचने लगी,,
10 साल पहले,,
माउंट ईडन पब्लिक स्कूल,शिमला।
सुबह के 7 बज चुके थे,,वहीं स्कूल में बच्चों का आना शुरू हो चुका था,,वहीं उन्हीं सब में 2 लड़कियां जिन्होंने स्कूल यूनिफॉर्म पहन रखी थी,ओर उसी के साथ 2 चोटी बना रखी थी,वो दोनों बात करती करती स्कूल के अंदर जा रही थी,,
वहीं पहली लड़की ने दूसरी लड़की से कहा,किट्टू यार तूने इंग्लिश में चैप्टर याद कर लिया क्या,,
वहीं उसकी बात सुन दूसरी लड़की मुस्कुराते हुए कहा,,हा मैने तो याद कर लिया,,क्यों तूने याद नहीं किया क्या, काव्या
नहीं यार मैने नहीं किया,,मैं घर जाते ही सो गई थीं, काव्या ने कहा,,
आज पक्का मिस्टर तिवारी मुझे क्लास के बाहर खड़ा कर देंगे,कहते हुए काव्या का मुंह बन गया
वहीं वो दोनों बात करती करती अपने क्लासरूम में आ गई,,
वहीं कुछ समय बाद क्लास में टीचर भी आ गए उन्होंने सब को गुड मॉर्निंग विश की,,ओर उनकी अटेंडेंस लेने लगे,,
वहीं उन्होंने कहा,काव्या वर्मा,वहीं काव्या तो अपने ही दुनिया में खोई हुई थी,
वहीं उसे ऐसे देख मिस्टर तिवारी ने तेज आवाज में कहा, काव्या
जी सर,, काव्या ने हड़बड़ाते हुए कहा,,
वहीं उसकी इस हरकत पर सभी बच्चे उस पर हसने लगे,
वहीं मिस्टर तिवारी ने न में सर हिला दिया,,क्योंकि ये उसका रोज का काम था,,
वहीं मिस्टर तिवारी ने आगे कहा,,नियति शर्मा
वहीं नियति ने कहा यस सर,
वहीं कुछ समय बाद क्लास शुरू हुई,मिस्टर तिवारी ने कहा,,सो एवरीवन,,आज आप सब का टेस्ट है तो प्लीज आप अपनी टेस्ट नोटबुक निकालिए,,वहीं उनकी बात सुन सब स्टूडेंट्स ने अपनी नोटबुक निकाली ,ओर उनका टेस्ट स्टार्ट हो गया।
वहीं जहां सभी बच्चे अपना टेस्ट दे रहे थे,वहीं काव्या अपनी क्वेश्चन शीट को ऐसे देख रही थी,जैसे उसने वो कभी देखे ही न हो,वहीं नियति पूरे ध्यान से अपना टेस्ट दे रही थी,
वहीं कुछ समय बाद उनका टेस्ट कंप्लीट हो चुका था,ओर मिस्टर तिवारी सबकी नोटबुक्स लेकर जा चुके थे,,
वहीं 2 क्लासेज के बाद लंच का का टाइम हो चुका था,,वहीं काव्या ओर नियति अपना लंच कंप्लीट करके बाहर गार्डन में बैठी थी क्योंकि अभी दूसरी क्लास शुरू होने में समय था,,
वहीं वो दोनों बात कर रही थी,,वहीं बार बार नियति इधर उधर अपनी निगाहें कर रही थी,,जैसे वो किसी को देख रही हो,,
वहीं काव्या जो इतनी देर से उसे देख रही थी,,उसने कहा
क्या हुआ किट्टू,मैं कब से तुझे देख रही हूं,तू इधर उधर क्या देख रही है,,
वहीं नियति ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,,पता नहीं काव्या शायद सुनने में अजीब लगेगा पर मुझे ऐसा लगता है जैसे कोई मुझे देख रहा हो,,
क्या,,काव्य ने कहा
हा करीब 2 हफ्ते से मुझे ऐसा लग रहा है,
वहीं वो दोनों बात कर ही रहे थे,,की तभी उनके पास एक लड़का आया,उसने नियति से कहा
किट्टू,वहीं अपना नाम सुन नियति ने अपना चेहरा ऊपर किया,
वहीं वो लड़का करीब 17 साल का था,,उसने भी स्कूल यूनिफॉर्म पहन रखी थी,उसने एक हल्की मुस्कान के साथ एक बिस्किट का पैकेट नियति के तरफ बढ़ाया,,
वहीं नियति ने उसके तरफ देखते हुए मुस्कान के साथ कहा,,अरे रिवांश भैया आप मेरे लिए रोज बिस्किट क्यों लाते है,,
वहीं ये लड़का ओर कोई नहीं बल्कि रिवांश था,
वहीं अपने लिए नियति के मुंह से भैया सुनकर उसकी पकड़ उस बिस्किट के पैकेट पर कस गई,,जैसे वो अपने गुस्से को कंट्रोल कर रहा हो,
पर उसने अपने गुस्से को कंट्रोल करते हुए बनावटी मुस्कान के साथ कहा,,अरे किट्टू तुम मुझे भैया क्यों कहती हो,तुम मुझे मेरे नाम से बुला सकती हो,,
अरे नहीं भैया,,आप मुझ से बड़े है,,मैं आपको नाम से कैसे बुला सकती हु,कहकर नियति ने वो पैकेट ले लिया,,
वहीं उसकी बात सुनकर रिवांश बस चुप रहा,,वहीं उसने नियति को देखते हुए कहा,अच्छा किट्टू में चलता हु,मेरी क्लास का वक्त हो गया है,,कहकर वो वहां से चला गया।
वहीं काव्या जो ये सब देख रही थी,,उसने कहा,यार नियति मुझे न ये रिवांश न कुछ सही नहीं लगता,,
क्यों, नियति ने असमंजस में पूछा,,
पता नहीं क्यों,यार तू खुद सोच न तूने बस उनकी एक बार हेल्प की थी,जब वो लड़के उन्हें परेशान कर रहे थे,ओर उस दिन के बाद से वो रोज तेरे लिए बिस्किट लाते है,,यार भला रोज रोज ऐसा कौन करता है,,
कही ऐसा तो नहीं वो तुझे पसंद करते हो
मैने न कही बार उन्हें तुझे ताड़ते हुए देखा है,,, काव्या ने आंखें फाड़ते हुए कहा,
चल,कुछ भी यार वो मुझ से कितने बड़े है,ओर मैने बस उन गंदे लड़कों की शिकायत की थी,क्योंकि वो भैया को परेशान कर रहे थे,,,
ओर फिर तू खुद उनकी हेल्प करके फंस गई थी,क्योंकि उनमें से एक लड़का तुझे भी परेशान करने लगा था।
काव्या ने मुंह बनाते हुए आगे कहा,,फिर गधा खुद ही मर गया,,
क्या,,वो मर गया,नियति ने चौंकते हुए कहा
हा, अरे 2 दिन पहले ही की ही तो बात है पुलिस को उसकी बॉडी पास ही खेतों में मिली थी,शायद किसी ने मार दिया होगा,दुश्मनी के चलते।।।तुझे नहीं पता था क्या,,
बेल की आवाज,,
वहीं काव्या ने कहा,चल क्लास शुरू होने वाली होगी,वहीं नियति उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गई,,,
वहीं दोपहर में नियति घर आई,
मम्मी,उसने आवाज लगाई,
वहीं उसकी मम्मी जो रसोई में काम कर रही थी,वो आई
क्या हुआ,,
मम्मा भूख लग रही है, क्या बनाया है खाने में
राजमा चावल,उसकी मम्मी ने कहा,
वहीं ये सुन नियति की आंखों में चमक आ गई,
मैं अभी मुंह धो कर आई,,कहकर वो सीढियों से अपने कमरे में भाग गई,,
वहीं थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल टीशर्ट ओर पजामे में नीचे आई,,
वहीं उसकी मम्मी ने पहले से ही उसके लिए खाना सर्व कर दिया था,,
वहीं नियति अपनी चेयर पर बैठ गई ओर अपना खाना खाने लगी,ओर जो कुछ भी स्कूल में हुआ वो सब अपनी मम्मी को बताने लगी।।
वहीं शाम को नियति के पापा घर आए,,वहीं अपने पापा को आता देख नियति तुरंत अपने पापा के पास गई,,
वहीं उसे अपने पास आता देख उन्होंने तुरंत अपनी पॉकेट से एक चॉकलेट निकाली और उसे दे दी,,
वहीं चॉकलेट मिलते ही नियति तुरंत अपने पापा के गले लग गई,,उसने गले लगे हुए ही कहा,,थैंक्यू पापा।,आप दुनिया के बेस्ट पापा हो।
अच्छा ठीक है,,उसके पापा ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा।,वहीं नियति उनसे अलग हुई।
वहीं उसके पापा जो पुलिस में थे,,उन्होंने अपनी गन वहीं ड्रॉ में रख दी,
ओर उन्होंने सोफे पर बैठते हुए कहा,,जरा एक ग्लास पानी लाना,,
वहीं नियति अपने पापा की बात सुन तुरंत किचन में गई ओर ग्लास में पानी लेकर आई,,
कुछ समय बाद।
वहीं वो सब डिनर कर रह थे,वहीं नियति के पापा ने कहा,
दिशा,,वहीं नियति की मम्मी जिनका नाम दिशा था उन्होंने कहा,कहिए
वो तुम डॉ आनंद राठौर को जानती हो न
वहीं आपके बचपन के दोस्त,
हा,वहीं उनकी परसो 22 एनिवर्सरी है,,तो उन्होंने हम सब को परसो पार्टी में बुलाया है मुंबई
वहीं,नियति जो चुपचाप अपना डिनर कर रही थी,, उसके हाथ बीच में ही रुक गए,,उसने अपने पापा के तरफ देखते हुए कहा,पापा ये वहीं है न जिनके बेटे के साथ में बचपन में पढ़ी थी, जो मुझे तोतली कहकर चिढ़ाते थे क्या नाम था उनका,,कहकर नियति उनका नाम सोचने लगी,खैर छोड़ो,उसने अपना सर झटकते हुए कहा,,फिर
उसने अपने पापा के तरफ देखते हुए कहा,तो क्या पापा आप जाओगे,
हा जाना तो पड़ेगा ,उहोंने इतने प्यार से हम सभी को बुलाया जो है,
, डिनर के बाद नियति के मम्मी पापा सो चुके थे
वहीं नियति अपने रूम थी,ओर अपनी पर्सनल डायरी में कुछ लिख रही थी,,वहीं उसने अपनी डायरी से एक फोटो निकाली,जिसमें एक लड़का ओर लड़की साथ में खड़े थे,वहीं पीछे उनके मम्मी पापा खड़े थे,,
वहीं उस लड़के के तरफ नियति ने मुंह बनाते हुए कहा,,क्या तुम अभी भी वैसे ही होगे ,,बताओ मुझे तुम अभी तक याद हो,पर मैं तुम्हारा नाम भूल गई,,खैर कोई बात नहीं,वहीं उस लड़के की फोटो देखते हुए नियति के चेहरे पर एक बहुत प्यारी सी मुस्कान थी,,
वहीं अपनी डायरी लिखने के बाद वो चेयर से उठी,ओर अपने रूम की खिड़की को उसने अच्छे से लॉक कर दिया,
वहीं आधी रात के समय,,नियति गहरी नींद में सोई हुई थी,वहीं कोई था,जो उसकी खिड़की से उसे देख रह था,,
अगले दिन।।
सुबह का समय,
नियति इस वक्त स्कूल में थी,ओर अपनी क्लास अटेंड कर रही थी,,वहीं अचानक उसे फिर ऐसा लगा जैसे कोई उसे देख रहा हो,,वहीं वो खिड़की से बाहर देखने लगी,,
वहीं मिस्टर राठी जो उनके मैथ्स टीचर थे उन्होंने कहा,, नियति कहा ध्यान है तुम्हारा,,
वहीं मिस्टर राठी की आवाज सुन नियति ने हड़बड़ाते हुए कहा,, सॉरी सर।।।
वहीं स्कूल की छुट्टी के वक्त नियति अपने घर जा रही थी,उसके साथ काव्या भी थी,,
वहीं अचानक उनके सामने रिवांश आ गया,,
हेलो नियति
वहीं वीरांश को अचानक सामने देख कर नियति घबरा गई,
भैया आप,,नियति ने कहा
वहीं वीरांश को देख कर काव्या का मुंह बन गया।।।
हा,क्या हुआ क्या मैने तुम्हे डरा दिया,उसने चिंता भरे स्वर में कहा,।
अरे नहीं,,ऐसा कुछ नहीं है, नियति ने कहा
क्या हुआ भैया,आपको मुझसे कोई काम था क्या,,
नहीं नियति,मुझे कोई काम नहीं था,,में तो बस ऐसे ही मिलने आ गया,
वहीं बात करते करते अचानक नियति की नजर वीरांश के हाथ पर गई,,उसने वीरांश से कहा,
भैया ये चोट आपको कैसे लगी,,वहीं अपने हाथ पर लगी चोट को देख वीरांश ने कहा,,अरे कुछ नहीं बस खेलते वक्त लग गई थी,,
वहीं काव्या जो इतने देर से ये सब देख रही थी उसने चिढ़ते हुए कहा,,भैया हमे देर हो रही है,क्योंकि नियति को आज अपने किसी रिलेटिव के घर जाना है क्यों नियति तुम्हे देर नहीं हो रही।।
वहीं नियति ने कहा,,अरे हा में तो भूल ही गई थी,,सॉरी भैया मुझे जाना होगा,,
घर पर मम्मी पापा इंतेज़ार कर रहे होंगे,,,कहकर नियति वहां से चली गई।।
वहीं वीरांश उसे जाते देखता रह गया,,
प्रेजेंट में,।।।।।
नियति ये सब सोच ही रही थी,तभी उसकी नजर चाय पर गई,,उसने तुरंत चाय छानी और अपना कप लेकर अपने रूम में आ गई,,
वहीं उसने अपनी डायरी निकाली,,ओर उसमें से कुछ फोटो ग्राफ्स निकली,,ओर उन्हें देखने लगी,,
उसने अपनी मम्मी पापा की फोटो निकाली ,ओर उसे देखते हुए उसकी आंखों में हल्की नमी आ गई,,
आईं मिस यू, मोम डैड
वहीं उसने अगली फोटो निकाली,जो उसी लड़के की थी,,ओर उसके बगल में नियति भी थी,,
उस फोटो को देखकर नियति को हसी आ गई,,
तुम्हे भी मिस करती हु में,, मिस्टर
आई हॉप तुम जहां भी हो खुश हो,,,
वहीं रात हो चुकी थी ,,नियति ने अपनी डायरी बंद की,ओर जाकर अपने बेड पर सो गई।।।
प्रेजेंट
वहीं ये सब बाते वो डॉ रिहान को बता रही थी,,वहीं डॉ रिहान उसकी बाते गौर से सुन रहे थे,
वहीं रिहान ने नियति को देखते हुए कहा,,मिस नियति
वहीं वो आगे कुछ कहते उससे पहले ही नियति ने कहा,,इससे आगे में आपको कुछ नहीं बता सकती,,
वहीं रिहान ने कहा,,क्यों नहीं बता सकती,क्या आपको इस हॉस्पिटल से बाहर नहीं जाना,,आपकी पूरी जिंदगी पड़ी है
नहीं,मुझे कही नहीं जाना बस, नियति ने कहा
वहीं डॉ रिहान कुछ कहते उससे पहले ही नियति ने कहा,,आपका वक्त हो चुका है,आप जा सकते है,,
वहीं रिहान ने कुछ नहीं कहा,ओर खड़ा हो गया,,
उसने जाने से पहले कहा,,आप बताना चाहे या न चाए पर में जानकर रहूंगा,,वहीं नियति के चेहरे पर उसने झुकते हुए कहा,,जिस चीज की में ठान लेता हु उसे में करके रहता हु,,मिस क्यूटी
ये कहकर रिहान वहां से मुस्कुराते हुए चला गया,,वहीं नियति उसे हैरानी से जाते हुए देखती रह गई,,वहीं रिहान के उसे क्यूटी कहने से उसके गाल हल्के लाल हो गए।।।