भाग 1: विश्वास की दरार
सुहानी खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रही थी, लेकिन उसका ध्यान बाहर के मौसम पर नहीं, बल्कि अपने हाथ में पकड़ी उस स्ट्रिप पर था जिस पर दो गुलाबी लाइनें साफ चमक रही थीं। उसके दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि उसे खुद अपने कानों में सुनाई दे रही थीं। डर, खुशी और घबराहट का एक अजीब सा मिश्रण उसके भीतर उथल-पुथल मचा रहा था।
तभी कमरे का दरवाजा खुला और मानव अंदर आया। वह हमेशा की तरह अपनी ऑफिस की थकान उतारने के लिए सोफे पर ढह गया।
थक गया यार आज तो, मानव ने अपनी आँखें मूंदते हुए कहा। सुहानी, एक कप कड़क चाय मिल जाएगी क्या?
सुहानी धीरे से उसके पास आई और उसके बगल में बैठ गई। उसका हाथ कांप रहा था। उसने बिना कुछ बोले वह स्ट्रिप मानव की तरफ बढ़ा दी।
मानव ने आँखें खोलीं और उस स्ट्रिप को देखा। कुछ सेकंड के लिए कमरे में सन्नाटा पसर गया। फिर उसने सुहानी की तरफ देखा, उसकी आँखों में वह खुशी नहीं थी जिसकी सुहानी ने उम्मीद की थी।
यह क्या है सुहानी? मानव ने धीमी लेकिन गंभीर आवाज में पूछा।
तुम देख रहे हो मानव, हम माता-पिता बनने वाले हैं, सुहानी ने भर्राई हुई आवाज में कहा और उसके कंधे पर सिर रखने की कोशिश की।
लेकिन मानव झटके से खड़ा हो गया। पागल हो गई हो क्या? अभी? इस वक्त? सुहानी, हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। मेरा करियर अभी सेट हो रहा है, तुम्हारी पढ़ाई अभी बाकी है। और समाज... लोग क्या कहेंगे? हमारी शादी भी तो नहीं हुई है अभी।
सुहानी का दिल डूबने लगा। पर मानव, हमने एक-दूसरे से प्यार किया है। यह हमारे प्यार की निशानी है। हम शादी कर लेंगे न?
शादी का मतलब यह नहीं कि हम इतनी बड़ी जिम्मेदारी अभी उठा लें, मानव कमरे में टहलने लगा। देखो सुहानी, व्यावहारिक बनो। अभी इस बच्चे का आना हमारी पूरी जिंदगी तबाह कर देगा। हम इसे अभी नहीं पाल सकते।
तो तुम क्या चाहते हो? सुहानी ने खड़े होते हुए पूछा, उसकी आवाज में अब डर की जगह नाराजगी आने लगी थी।
कल सुबह हम डॉक्टर के पास चलेंगे। अबॉर्शन ही एकमात्र रास्ता है, मानव ने बिना सुहानी की तरफ देखे सपाट लहजे में कहा।
सुहानी को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर घोंप दिया हो। अबॉर्शन? तुम एक जान को खत्म करने की बात कर रहे हो मानव? वह भी हमारी जान?
जान? सुहानी, यह सिर्फ कुछ सेल्स का गुच्छा है अभी। इसे इमोशनल ड्रामा मत बनाओ। हमारे पास और कोई चारा नहीं है, मानव ने उसके पास आकर उसके कंधे पकड़े। समझने की कोशिश करो, यह हमारे भविष्य के लिए जरूरी है।
नहीं मानव, यह गलत है। मैं ऐसा नहीं होने दूंगी, सुहानी ने उसके हाथ झटक दिए।
देखो सुहानी, जिद मत करो। अगर तुम यह बच्चा रखती हो, तो मैं इसमें तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगा। मैं अपनी लाइफ खराब नहीं कर सकता, मानव की आवाज में अब सख्ती थी।
सुहानी ने उसकी आँखों में देखा। वहां उसे वह प्रेमी नहीं दिखा जिससे उसने प्यार किया था, बल्कि एक अजनबी खड़ा था जो अपनी सहूलियत के लिए अपने ही अंश की बलि चढ़ाने को तैयार था।
तो तुम्हारा प्यार बस यहीं तक था? सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने तक? जैसे ही जिम्मेदारी की बात आई, तुम पीछे हट गए? सुहानी की आँखों से आंसू बहने लगे।
इसे घटिया मोड़ मत दो सुहानी। मैं बस प्रैक्टिकल हो रहा हूँ, मानव चिल्लाया।
प्रैक्टिकल होना और कायर होना, इन दोनों में फर्क होता है मानव। आज तुमने दिखा दिया कि तुम कितने बड़े कायर हो, सुहानी ने अपने आंसू पोंछे और अपना बैग उठाया।
कहाँ जा रही हो तुम? मानव ने पूछा।
वहां, जहां मेरे बच्चे को और मुझे सम्मान मिल सके। इस घर में और तुम्हारे साथ अब मेरा एक पल भी रहना नामुमकिन है, सुहानी ने दृढ़ता से कहा।
सुहानी, बाहर बारिश हो रही है। पागलपन मत करो। वापस आओ! मानव चिल्लाता रहा, लेकिन सुहानी बिना पीछे मुड़े दरवाजे से बाहर निकल गई।
रात के अंधेरे और बारिश में सुहानी सड़क पर चल रही थी। उसका मन अशांत था, लेकिन एक बात साफ थी—वह इस बच्चे को दुनिया में लाएगी। उसे नहीं पता था कि आगे का रास्ता कितना कठिन है, पर उसने ठान लिया था कि वह अपने हक की और अपने बच्चे की जंग खुद लड़ेगी। यहीं से सुहानी के जीवन की एक नई और कठिन यात्रा शुरू हुई, जहाँ उसे समाज, परिवार और खुद अपनी भावनाओं से लड़ना था।