आर्यन एक 22 साल का युवा इंजीनियरिंग छात्र था। दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और हॉस्टल में रहता था। कोविड के बाद की दुनिया में उसकी जिंदगी ज्यादातर ऑनलाइन ही बीतती थी – क्लासेस, दोस्तों से चैट और सोशल मीडिया। एक दिन इंस्टाग्राम पर उसे एक लड़की का मैसेज आया। नाम था प्रिया। उसकी प्रोफाइल पर सुंदर फोटोज थे – विदेशी लोकेशंस, लग्जरी कारें और मुस्कुराता चेहरा। प्रिया ने कहा कि वह लंदन में रहती है, भारतीय मूल की है और आर्यन की पोस्ट्स देखकर उसे पसंद आया।
शुरुआत में बातें सामान्य थीं – पढ़ाई, फिल्में, संगीत। आर्यन को लगा कि आखिरकार कोई उसे समझता है। उसके दोस्त व्यस्त थे, परिवार दूर। प्रिया रोज मैसेज करती, गुड मॉर्निंग विश करती, रात को गुड नाइट कहती। धीरे-धीरे बातें गहरी हो गईं। प्रिया ने कहा कि वह अकेली है, परिवार से दूर, और आर्यन उसका सहारा बन गया है। आर्यन ने भी अपने दिल की बातें शेयर कीं – करियर की चिंताएं, भविष्य की अनिश्चितता। प्रिया हमेशा सपोर्ट करती – "तुम बहुत टैलेंटेड हो, सफल होओगे। मैं तुम्हारे साथ हूं।"
तीन महीने बीत गए। एक दिन प्रिया ने कहा कि वह भारत आ रही है, आर्यन से मिलने। आर्यन खुश हो गया। लेकिन अचानक प्रिया ने बताया कि उसकी फ्लाइट कैंसल हो गई क्योंकि उसके अकाउंट में समस्या है। उसने कहा कि उसे कुछ पैसे चाहिए टिकट बुक करने के लिए। "बस 50,000 रुपये, मैं लौटा दूंगी मिलते ही।" आर्यन हिचकिचाया, लेकिन प्यार में अंधा हो चुका था। उसने अपने सेविंग्स से पैसे ट्रांसफर कर दिए।
फिर प्रिया ने कहा कि कस्टम्स पर उसका पार्सल अटक गया – गिफ्ट्स जो वह आर्यन के लिए ला रही थी। "बस कस्टम क्लियरेंस के लिए 1 लाख रुपये।" आर्यन ने दोस्त से उधार लिया और भेज दिया। फिर एक और बहाना – प्रिया की मां बीमार, हॉस्पिटल बिल। आर्यन ने अपनी पढ़ाई का लोन लेकर भी पैसे भेजे। कुल मिलाकर 8 लाख रुपये चले गए। आर्यन के पास अब कुछ नहीं बचा – न पढ़ाई के लिए पैसे, न परिवार को बताने की हिम्मत।
एक दिन प्रिया का नंबर बंद हो गया। प्रोफाइल डिलीट। आर्यन टूट गया। उसने पुलिस में कंप्लेंट की, लेकिन पैसे वापस नहीं आए। पता चला कि प्रिया असल में एक स्कैमर था – शायद नाइजीरिया या भारत के किसी गिरोह का सदस्य, जो फेक प्रोफाइल से युवाओं को फंसाता था। आर्यन की तरह हजारों युवा हर साल ऐसे जाल में फंसते हैं। हाल के रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 39% युवा ऑनलाइन डेटिंग में स्कैम का शिकार होते हैं, और कई लाखों रुपये गंवाते हैं। कुछ तो भावनात्मक रूप से इतने टूट जाते हैं कि डिप्रेशन में चले जाते हैं या आत्महत्या तक कर लेते हैं।
आर्यन अकेला पड़ गया। दोस्तों ने मदद की, लेकिन उसकी जिंदगी बदल गई। वह अब ऑनलाइन किसी पर आसानी से भरोसा नहीं करता। लेकिन यह अनुभव उसके लिए सबक बना। उसने अपनी पढ़ाई पर फोकस किया। कॉलेज में एक रियल लाइफ ग्रुप जॉइन किया – डिबेट क्लब। वहां उसे नेहा मिली। नेहा भी इंजीनियरिंग छात्रा थी, क्लासमेट की दोस्त। शुरू में ग्रुप एक्टिविटीज, फिर कॉफी पर बातें। नेहा असल थी – उसकी हंसी, उसकी महत्वाकांक्षाएं, उसकी कमियां। कोई फेक फोटोज नहीं, कोई विदेशी सपने नहीं। बस सच्चाई।
धीरे-धीरे आर्यन और नेहा करीब आए। उन्होंने एक-दूसरे को समय दिया, परिवार से मिलवाया। नेहा के परिवार ने आर्यन की पिछली गलती सुनी और समझा। आर्यन ने भी नेहा को सब बताया। यह रिश्ता मजबूत बना क्योंकि यह रियल लाइफ पर आधारित था – मिलना, बात करना, एक-दूसरे की आंखों में देखना। दो साल बाद उन्होंने शादी की। अब आर्यन एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, नेहा भी जॉब करती है। उनका घर खुशियों से भरा है।
यह कहानी आर्यन की है, लेकिन यह लाखों युवाओं की हो सकती है। ऑनलाइन प्यार आकर्षक लगता है – आसान, रोमांचक। लेकिन खतरे छिपे हैं। स्कैमर्स भावनाओं का फायदा उठाते हैं। वे 'लव बॉम्बिंग' करते हैं – जल्दी प्यार जताते हैं, भरोसा बनाते हैं, फिर पैसे मांगते हैं। भारत में ऐसे स्कैम्स बढ़ रहे हैं – AI से फेक वॉइस, फोटोज बना रहे हैं। कई युवा पैसे गंवाते हैं, कुछ ब्लैकमेल का शिकार होते हैं।
युवाओं के लिए सबक: ऑनलाइन मिले किसी पर जल्दी भरोसा मत करो। वीडियो कॉल करो, बैकग्राउंड चेक करो। पैसे कभी मत भेजो। अगर कोई जल्दी प्यार जताए या बहाने बनाए, सतर्क हो जाओ। रियल लाइफ में रिश्ते बनाओ – कॉलेज, काम, हॉबीज से। सच्चा प्यार समय लेता है, जांचता है, लेकिन मजबूत होता है।
ऑनलाइन दुनिया सुविधाजनक है, लेकिन सावधानी जरूरी। अपनी भावनाओं की कद्र करो, लेकिन अंधे मत बनो। पढ़ाई, करियर, आत्मनिर्भरता पर फोकस करो। सच्चा साथी वही जो रियल लाइफ में तुम्हारा साथ दे। आर्यन की तरह, गलती से सीखो और आगे बढ़ो। जीवन में असली खुशी रियल रिलेशनशिप्स में है, वर्चुअल नहीं।