AsurVidya - 4 in Hindi Mythological Stories by OLD KING books and stories PDF | असुरविद्या - 4

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असुरविद्या - 4

पैसा एक साधन


सुबह के ठीक सात: चौदह बज रहे थे. मुंबई की सडकों पर उमस और शोर का कब्जा होने लगा था. कमरे की खिडकी से आती धूप की किरणें आज विहान को चुभ नहीं रही थीं, बल्कि उसकी नई हकीकत पर मुहर लगा रही थीं. उसने फर्श पर पडे बैग में अपना सामान समेटा. उसने सोने के भारी ताले को और चाबी को अपने बिस्तर के नीचे, फर्श के एक ढीले पटिए के नीचे छिपा दिया—वह उसका' इमर्जेंसी रिजर्व' था.
बैग में अब केवल वह नकली रोलेक्स घडी, सोने का कडा और वह चेन थी, जिसे कल रात उसने अपने लहू से सींचा था. विहान ने अपनी फटी हुई शर्ट के ऊपर एक पुराना, बदरंग ओवरकोट पहन लिया. यह कोट न केवल उसकी गरीबी, बल्कि उसके शरीर की उस भयानक कमजोरी को भी छिपा रहा था जो असुर- पारस ने उसे दी थी.

किस्मत बदलने का वक्त आ गया है, उसने बुदबुदाया. पिछली रात किताब बेचने के बाद जो थोडे- बहुत पैसे बचे थे, उन्हें जेब में डालकर वह बाजार की ओर निकल पडा.
चलते चलते विहान ने अपना पुराना स्मार्टफोन निकाला. नेटवर्क थोडा धीमा था, लेकिन जैसे ही पेज खुला, विहान की आँखें फटी की फटी रह गईं.
तीन अक्टूबर दो हजार पच्चीस: लगभग रुपये ग्यारह हजार आठ सौ चार प्रति ग्राम.
एक ग्राम का ग्यारह हजार आठ सौ चार रुपए इस हिमाब से दस ग्राम के तो एक लाख ग्यारह हजार होंगे विहान मन ही मन खुश होगा.
सोना बेचना किसी जुए से कम नहीं था. विहान जानता था कि उसका हुलिया—उलझे बाल, सूखी हुई आँखें और वह पुराना ओवरकोट—देखकर बडे शोरूम वाले उसे सीधा पुलिस के हवाले कर देंगे. उसे सबसे पहले एक भरोसेमंद पुष्टि चाहिए थी. वह सीधा शास्त्री चाचा की दुकान पर पहुँचा.
चाचा, जरा इसे देखना, विहान ने कांपते हाथों से घडी काउंटर पर रखी.
शास्त्री चाचा ने अपना मोटा चश्मा ठीक किया और घडी उठाई. जैसे ही उनके हाथों ने उस ठंडी धातु को छुआ, वे सिहर उठे. विहान. यह क्या है? यह तो तुम्हारी वही पुरानी घडी है जो तुम अक्सर ठीक कराने लाते थे, पर इसका वजन.
एक दोस्त की अमानत है चाचा. बस यह जानना है कि यह क्या चीज है, विहान ने झूठ बोला, उसकी आँखें चाचा के चेहरे के भावों को ऐसे पढ रही थीं जैसे कोई शिकारी आहट सुनता है.
चाचा ने अपनी कसौटी निकाली और घडी के पिछले हिस्से पर एक लकीर खींची. फिर उस पर तेजाब की एक बूंद डाली. सुनहरी लकीर नहीं मिटी, बल्कि और भी चमकने लगी. चाचा की आँखें फैल गईं. बेटा. यह पीतल नहीं है. यह चौबीस कैरेट का सबसे खरा सोना है. इसका वजन कम से कम एक सौ पचास ग्राम होगा. विहान, यह कहाँ से आई?
बस चाचा, यह जान लीजिए कि यह असली है न?
असली? विहान, यह इतना शुद्ध है कि आज के बाजार में मिलना नामुमकिन है. पर देख, तू इसे खुले में मत बेचना. लोग तुझे लुटेरा समझकर ठग लेंगे या पुलिस बुला लेंगे।
वहाँ से निकलते समय विहान के दिमाग में गणित के पहिए घूमने लगे. एक सौ पचास ग्राम सोना. यानी आज के भाव के हिसाब से करीब पंद्रह से सत्रह लाख रुपये! विहान ने सीधे बडे जौहरियों के पास जाने के बजाय तीन छोटी दुकानों पर रेट पता किए. हर जगह दुकानदार उसे' छोटा बच्चा' समझकर आठ- 9 लाख का लालच दे रहे थे. उन्हें लगा कि वह चोरी का माल लाया है और डरा हुआ है.
आखिरकार, वह' जवेरी एंड संस' पहुँचा.
विहान' जवेरी एंड संस' के भारी कांच के दरवाजों को धकेल कर भीतर दाखिल हुआ. शोरूम के भीतर की ठंडी एअर- कंडीशनर हवा उसके पसीने और पुरानी यादों की गंध से टकराई. वहां का फर्श इतना साफ था कि विहान को उसमें अपना थका हुआ चेहरा दिखाई दे रहा था.
काउंटर के पीछे खडी समीरा, जो रेशमी साडी और भारी मेकअप में किसी राजकुमारी जैसी दिखने की कोशिश कर रही थी, ने अपनी नाक सिकोड ली. उसने अपने पास खडे सिक्योरिटी गार्ड को आँखों ही आँखों में इशारा किया, मानो कह रही हो—" इस कचरे को बाहर निकालो।
समीरा ने एक उपहास भरी नजरों से विहान के धूल भरे ओवरकोट और फटी जींस को देखा. वह अपनी सहकर्मी की ओर मुडी और इतनी तेज आवाज में बोली कि विहान साफ सुन सके, आजकल एअर- कंडीशन की हवा मुफ्त क्या हुई, हर राह चलता भिखारी अंदर घुस आता है. इसकी पूरी खानदान की कीमत नहीं होगी जितना हमारे यहाँ एक अंगूठी की पॉलिश का खर्चा आता है।
विहान' जवेरी एंड संस' के काउंटर पर खडा था. समीरा की कडवी बातों ने उसके सीने में आग लगा दी थी, लेकिन उसने अपना चेहरा पत्थर जैसा बनाए रखा. उसने धीरे से अपना हाथ ओवरकोट की जेब में डाला और वह सुनहरी घडी मेज पर रख दी.
समीरा ने घडी को देखकर एक बनावटी हंसी हंसी. कहा था न, यहाँ पुरानी चीजें रिपेयर नहीं होतीं. और यह' फर्स्ट कॉपी' रोलेक्स यहाँ मत दिखाओ, इसके पीतल के दाम भी नहीं मिलेंगे।
विहान ने उसकी आँखों में देखा. उसकी आवाज शांत थी, पर उसमें एक भारीपन था.
मुझे इसे बेचना है, विहान ने धीमी आवाज में कहा. यह घडी मेरी बहन ने अपनी पहली ट्यूशन की कमाई से मुझे दी थी. मेरे लिए यह अनमोल है. लेकिन फिलहाल मुझे अपनों को बचाने के लिए इसे बेचना ही होगा. जरा अपने मालिक को बुलाओ और उनसे कहो कि इसकी कीमत लगाए।
समीरा कुछ और कहने ही वाली थी कि Mister जवेरी केबिन से बाहर आए. उनकी नजर घडी पर पडी और वे ठिठक गए. उन्होंने हाथ के इशारे से समीरा को चुप किया और घडी उठानी चाही, पर घडी का वजन देखकर चौंक गए.
यह घडी. जवेरी ने घडी को हाथ में लेकर उलट- पुलट कर देखा. बेटा, यह वजन. यह साधारण धातु नहीं है।
इसके कागजात कहाँ हैं? बिना बिल और सर्टिफिकेट के मैं इसे हाथ भी नहीं लगा सकता।
विहान ने एक गहरी सांस ली. उसे पता था कि असली खेल यहीं से शुरू होगा. दस्तावेज नहीं हैं. इसीलिए आपके पास आया हूँ. मुझे पता है कि आप' बिना पहचान' वाले सौदे भी करते हैं।
Mister जवेरी की आँखों में एक चालाक चमक आई. उन्होंने समीरा को बाहर जाने का इशारा किया और विहान को अपने केबिन में बुलाया. लैब में जाँच के बाद जब वे लौटे, तो उनके चेहरे पर पसीना और लालच साफ दिख रहा था.
एक सौ अड़तालीस दशमलव पाँच ग्राम शुद्ध सोना. वह भी चौबीस कैरेट से ऊपर की शुद्धता, जवेरी ने दबी आवाज में कहा. देखो बेटा, बिना रसीद के यह माल' हॉट' (जोखिम भरा) है. अगर मैं इसे नंबर दो (Black) में खरीदता हूँ, तो मुझे बहुत रिस्क लेना होगा।
सीधे मुद्दे पर आइए, सेठ जी, विहान ने ठंडे स्वर में कहा.
बाजार भाव के हिसाब से इसकी कीमत पंद्रह लाख से ऊपर है, जवेरी ने उंगलियों पर हिसाब लगाया. लेकिन बिना कागज के, मैं तुम्हें इसके सिर्फ बारह लाख पचास हजार रुपये दे पाऊँगा. ऊपर से, मुझे अपनी सुरक्षा के लिए तुम्हारा एक Identification document प्रूफ (आधार कार्ड की फोटोकॉपी) चाहिए होगा, ताकि कल को कोई लफडा हो तो मैं साफ बच सकूँ।
विहान हिचकिचाया. अपनी असली पहचान देना खतरनाक था, लेकिन उसे अभी नकदी (Cash) की सख्त जरूरत थी. असुर- पारस' को ईंधन चाहिए था और उसके परिवार को सहारा.
मंजूर है, विहान ने अपना आधार कार्ड मेज पर रख दिया.
जवेरी ने मुस्कुराते हुए आधार कार्ड की फोटोकॉपी की और उसे अपनी गुप्त दराज में रख लिया. स्मार्ट लडका. रुको, नकद का इंतजाम करता हूँ।
सौदा तय हो गया. एक घंटे बाद जब नोटों की गड्डियां सामने आईं, तो समीरा के चेहरे का रंग उड चुका था. वह लडका जिसे वह अभी' कचरा' समझ रही थी, अब लाखों का मालिक था. उसका अहंकार अब लालच में बदल गया था. उसे लगा कि विहान अब अपनी रईसी दिखाएगा और उसे कुछ इनाम देगा.
विहान ने बैग में पैसे भरे, पर तभी वह रुका. उसने गड्डी से दो कडक पाँच सौ के नोट निकाले. समीरा के चेहरे पर एक लालची मुस्कान आई, वह अपनी साडी का पल्लू ठीक करते हुए विहान के करीब आई. उसे लगा विहान उसे टिप देने वाला है.
लेकिन विहान ने जो किया, उसने शोरूम में मौजूद हर शख्स की रूह कँपा दी.
विहान ने उन दोनों नोटों को मोडा और बिना किसी झिझक के झुककर अपने उन जूतों पर रगडने लगा जो सडक की कीचड और धूल से सने थे.
विहान! तुम ये क्या कर रहे हो? जवेरी के मुँह से निकला.
विहान नोटों से जूते रगडता रहा जब तक वे काले नहीं हो गए. फिर उसने उन फटे- गंदे नोटों को लापरवाही से पास रखे डस्टबिन में फेंक दिया. वह पलटा और समीरा की आँखों में सीधे झाँका.
तुमने सही कहा था, विहान की आवाज में बर्फ जैसी ठंडक थी. तुम्हारी नजर में मेरी औकात एक हजार रुपये की भी नहीं थी. लेकिन मेरी नजर में इन एक हजार रुपयों की औकात मेरे जूतों की धूल से भी कम है. फर्क बस इतना है, कि मैं इन नोटों को कचरे में फेंक सकता हूँ, और तुम्हारी पूरी जिन्दगी इस कचरे को उठाने में बीत जाएगी।
विहान शोरूम से बाहर निकला. धूप अब उसे चुभ नहीं रही थी. उसने अपनी खाली कलाई को देखा जहाँ कभी पीहू की दी हुई घडी थी. उसके दिल में एक टीस उठी, पर उसने उसे तुरंत दबा दिया.
अगर मैं अब भी पहले जैसा कमजोर और दयालु रहा, तो फायदा ही क्या? उसने मन ही मन सोचा. आज मैंने अपनी सबसे प्यारी याद बेच दी है. अब दोबारा मैं वह डरपोक विहान नहीं बनूँगा जिसका लोग फायदा उठा सकें. अब मेरे खून की एक- एक बूंद का हिसाब होगा।
पुराना विहान खन्ना उस शोरूम की दहलीज पर ही दम तोड चुका था. अब जो मुंबई की सडकों पर था, वह विहान का एक नया, भयानक रूप था—जिसके लिए पैसा केवल एक साधन था, और दया एक पुरानी बीमारी.
विहान जानता था कि एक ही दुकान पर बहुत सारा सोना बेचना खुद को पुलिस के हवाले करने जैसा है. जवेरी एंड संस' से निकलने के बाद उसके बैग में बारह दशमलव पाँच लाख रुपये थे, लेकिन उसके पास अभी भी वह सोने की चैन बाकी थी. वह अब सतर्क था. उसे पता था कि बिना रसीद के सोना बेचना जोखिम भरा है, इसलिए उसने एक अलग इलाके की छोटी और' बिना सवाल पूछने वाली' दुकान चुनी.

विहान ने एक पुरानी टैक्सी पकडी और मुंबई के घनी आबादी वाले इलाके' भिंडी बाजार' की तंग गलियों में पहुँच गया. यहाँ' अलंकार ज्वेलर्स' नाम की एक छोटी, अंधेरी सी दुकान थी, जहाँ का मालिक, हसमुख भाई, पुराने गहने खरीदने के लिए जाना जाता था—बिना किसी कागजात के, लेकिन थोडे कम दाम पर.
विहान ने अपनी जेब से वह चैन निकाली. यह कल रात तक महज एक घटिया पीतल की चैन थी, लेकिन अब यह भारी और शुद्ध स्वर्ण की थी.
इसे बेचना है, विहान ने काउंटर पर चैन रखते हुए कहा.
हसमुख भाई ने अपनी मोटी आँखों से चैन को देखा और फिर विहान के चेहरे को. रसीद है इसकी?
रसीद होती तो मैं इस गली में नहीं आता, हसमुख भाई, विहान ने ठंडी आवाज में कहा. माल खरा है, आप अपनी कसौटी पर रगड कर देख लीजिए।
हसमुख भाई ने चैन को तराजू पर रखा. कांटा घूमा और बावन दशमलव तीन ग्राम पर आकर रुक गया. बावन ग्राम से ज्यादा का शुद्ध सोना! आज के बाजार भाव के हिसाब से इसकी कीमत करीब छह लाख रुपये के आसपास थी.
देख भाई, बिना रसीद के माल है. पुलिस का लफडा हुआ तो मेरी दुकान जाएगी, हसमुख भाई ने सौदेबाजी शुरू की. मैं तुझे इसका चार लाख पचास हजार दूँगा. कैश, अभी के अभी।
विहान ने चैन वापस उठाने के लिए हाथ बढाया. पाँच लाख से एक रुपया कम नहीं. आप नहीं लेंगे तो सामने वाली गली में' मेमन भाई' बैठे हैं।
हसमुख भाई ने विहान का हाथ पकडा. उसे पता था कि यह सोना बहुत खरा है. अरे अरे! इतने गरम क्यों होते हो? चलो, तुम्हारी मजबूरी और मेरा रिस्क. चार लाख नब्बे हजार फाइनल. इससे ऊपर एक धेला नहीं दूँगा।
विहान ने सिर हिलाया. उसे पता था कि वह यहाँ भी घाटा सह रहा है, लेकिन अभी उसे' साफ पहचान' से ज्यादा' गुमनाम पैसे' की जरूरत थी.
हसमुख भाई ने काउंटर के नीचे से काले बैग में रखे नोटों की गड्डियां निकालीं. पाँच सौ के नोटों की चार गड्डियां और बाकी के खुले पैसे.
विहान का दूसरा हिसाब:
वस्तु: सोने की चैन (बावन दशमलव तीन ग्राम)
कुल रकम: रुपये चार लाख नब्बे हजार/-
अब तक का कुल कैश: रुपये सत्रह लाख चालीस हजार/-
विहान दुकान से बाहर निकला. अब उसके पुराने बैग में सत्रह लाख चालीस हजार रुपये थे. एक ही सुबह में वह एक मामूली Collage छात्र से एक' लखपति' बन चुका था.
उसने अपने ओवरकोट के अंदर हाथ डालकर उस' असुर- पारस' को छुआ. वह अभी भी ठंडा था, मानो विहान को याद दिला रहा हो कि यह पैसा मुफ्त नहीं आया है—इसकी कीमत विहान के शरीर से निकलने वाला खून है.

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