मच्छर
समीरा ने नफरत से विहान की ओर देखा जो सोया हुआ था. शक्ल पर मत जा रॉकी. इसने शोरूम में लाखों की घडी बेची थी और नकद पैसे लिए थे.
समीरा ने रॉकी की ओर मुडकर फुसफुसाते हुए अपनी बात पूरी की, रॉकी, तू सोच भी नहीं सकता इसने मेरा कितना मजाक उडाया था. जब मैंने इसका पीछा किया, तो देखा कि ये सिर्फ एक दुकान तक नहीं रुका. ये दूसरी दुकान में भी घुसा और वहाँ से भी ढेर सारे पैसे लेकर निकला. यहाँ तक कि इसने सबसे महंगे मोबाइल भी खरीदी हैं, मैंने खुद अपनी आँखों से इसे नकद भुगतान करते देखा है. इसके फटे हुए हालत पर मत जा, इसके अंदर कुबेर का खजाना छिपा है.
रॉकी की आँखों में चमक आ गई. अगर ऐसा है, तो आज हमारी किस्मत चमकने वाली है.
वे दोनों धीरे- धीरे विहान की ओर बढे. विहान फर्श पर गहरी नींद में था, उसके सीने पर वह काली किताब' असुरविद्या' अभी भी रखी हुई थी. रॉकी ने अपनी देसी पिस्तौल विहान की कनपटी की तरफ तानी, जबकि समीरा ने अपना चाकू निकालकर बैग की तलाश शुरू की.
किताब. ये काली किताब इसके पास क्या कर रही है? समीरा ने विहान के सीने से किताब उठाने के लिए हाथ बढाया ही था कि.
रॉकी का पैर मेज के पास रखे स्टील के गिलास से टकरा गया.
झन- झना- झन!
गिलास फर्श पर गिरा और कई बार लुढका. उस धातु की आवाज ने चॉल के सन्नाटे को बेरहमी से चीर दिया. रॉकी और समीरा की साँसें जैसे गले में ही अटक गईं. रॉकी ने अपनी पिस्तौल की पकड मजबूत की और उसकी उंगली ट्रिगर पर कांपने लगी.
बेवकूफ! समीरा ने बिना आवाज किए केवल होंठ हिलाकर रॉकी को कोसा.
दोनों की नजरें विहान के चेहरे पर जम गईं. विहान के माथे पर पसीने की एक बूंद चमकी. उसका शरीर हल्का सा हिला, और उसके हाथ की उंगलियां उसके सीने पर रखी उस' असुरलिपि' किताब के कवर को जैसे अनजाने में ही भींचने लगीं.
समीरा को लगा कि विहान अब जाग जाएगा, लेकिन अगले ही पल विहान ने एक लंबी, गहरी साँस ली और दूसरी तरफ करवट ले ली. किताब उसके सीने से फिसलकर जमीन पर गिरने ही वाली थी कि समीरा ने उसे हवा में ही लपक लिया.
बच गए. रॉकी ने फुसफुसाया.
समीरा ने उस काली किताब को जैसे ही छुआ, उसे एक अजीब सा झटका लगा. किताब की जिल्द (कवर) ठंडी नहीं थी, बल्कि वह किसी जीवित खाल की तरह गर्म थी और उसमें हल्की सी धडकन महसूस हो रही थी. समीरा का जी घबराया, पर उसने उसे नजरअंदाज किया और दबी आवाज में कहा, अब बैग ढूँढ, जल्दी!
रॉकी सावधानी से मेज की ओर बढा. तभी उसे मेज के नीचे अखबार में लिपटा हुआ वह भारी सोने का ताला चाबी दिखा. उसने जैसे ही उसे उठाया, अखबार का एक कोना फट गया और पीली धातु की एक तीखी चमक रॉकी की आँखों में पडी.
समीरा. देख! रॉकी की आँखों में लालच का नशा छा गया. उसने पिस्तौल अपनी कमर में खोंसी और दोनों हाथों से उस ताले को बाहर निकालने लगा. वह ताला और चाबी इतना भारी था कि रॉकी की सांसें फूलने लगीं.
उधर, बिस्तर के पास खडी समीरा ने एक बार फिर विहान की ओर देखा. विहान अभी भी सो रहा था, लेकिन उसके जेब में रखा असुर- पारस अब अंधेरे में धीमी- धीमी लाल रोशनी छोड रहा था. समीरा को लगा जैसे कोई रोशनी विहान की सांसों के साथ तालमेल बिठा रही है—सांस अंदर, रोशनी तेज; सांस बाहर, रोशनी धीमी.
अचानक, चॉल के बाहर किसी आवारा कुत्ते ने एक लंबी और डरावनी आवाज में रोना (Howling) शुरू कर दिया.
उसी पल, विहान के बंद पलकों के पीछे उसकी आँखें तेजी से घूमने लगीं (REM sleep)। उसके दिमाग में' असुरविद्या' के वे शब्द गूँजने लगे—" जब परछाइयां तुम्हारी संपत्ति को छुएं, तो रक्त का मोल माँगो.
समीरा ने जैसे ही विहान के बैग की चैन खोलने के लिए हाथ बढाया, विहान के हाथ ने अचानक समीरा की कलाई को पकड लिया.
पकड इतनी जोरदार थी कि समीरा के हाथ से वह काली किताब छूटकर गिर गई. समीरा की चीख उसके हलक में ही दब गई. उसने देखा कि विहान की आँखें अभी भी बंद थीं, लेकिन उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो किसी इंसान की नहीं, बल्कि किसी शिकारी की लग रही थी.
बहुत देर कर दी तुम लोगों ने. विहान की आवाज कमरे में गूँजी, जबकि उसका होंठ हिला तक नहीं.
समीरा ने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी कलाई छुडाने की कोशिश की, लेकिन विहान की पकड किसी लोहे के शिकंजे जैसी थी. उसकी हड्डियों के चटकने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी. समीरा की आँखों में आँसू आ गए, पर डर के मारे उसके मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी.
विहान की आँखें खुली, लेकिन उनमें कोई मानवीय चेतना नहीं थी. उसकी पुतलियाँ स्थिर थीं और वह एकटक सामने की दीवार को देख रहा था, जैसे वह इस दुनिया में होकर भी कहीं और हो.
यह विहान नहीं था. यह असुर- विद्या का सुशुप्त प्रभाव था, जो उसके अवचेतन मन (Subconscious mind) पर कब्जा कर चुका था.
छोडो मुझे! तुम क्या कर रहे हो? समीरा चीखी, लेकिन विहान के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया. वह नींद में बुदबुदा रहा था, उसकी आवाज किसी पुरानी कब्र से आ रही प्रतिध्वनि जैसी लग रही थी—" अशुद्ध रक्त. अशुद्ध नीयत. शोधन आवश्यक है.
उधर रॉकी का हाल बदतर था. वह सोने का ताला उसके हाथों से चिपक कर अब सफेद धुंआ छोड रहा था. रॉकी ने अपनी गन फेंक दी और पागलों की तरह अपना हाथ झटकने लगा, पर वह ताला किसी चुंबकीय शक्ति की तरह उसके मांस को सोख रहा था.
समीरा! भाग यहाँ से! ये लडका इंसान नहीं है! रॉकी चिल्लाया, लेकिन उसका शरीर अचानक भारी होने लगा.
विहान, जो अभी भी नींद की अवस्था में था, धीरे से खडा हुआ. उसने समीरा की कलाई पकडे- पकडे ही उसे झटके से अपनी ओर खींचा. समीरा विहान की छाती से जा टकराई.
समीरा जैसे ही विहान की फौलादी छाती से टकराई, उसकी चीख विहान के गले के पास ही दम तोड गई. विहान की आँखें अभी भी पथराई हुई थीं, लेकिन उसके शरीर का तापमान अब बर्फ की तरह ठंडा नहीं, बल्कि दहकते हुए लावे की तरह गर्म हो चुका था.
समीरा ने महसूस किया कि विहान की पकड अब केवल उसे रोकने के लिए नहीं थी. उसकी उंगलियाँ समीरा की कमर और गर्दन पर एक अजीब से हक के साथ रेंगने लगी थीं. विहान के चेहरे पर एक डरावनी, वासना भरी मुस्कान उभरी, जो किसी इंसान की नहीं, बल्कि एक ऐसे' असुर' की थी जिसने हजारों सालों बाद किसी को छुआ हो.
विहान ने नींद में ही समीरा के चेहरे को अपनी ओर मोडा. उसकी साँसें समीरा के कानों को जला रही थीं.
बहुत. सुंदर. अशुद्ध, पर सुंदर. विहान की आवाज एक धीमी घबराहट पैदा करने वाली गूँज जैसी थी.
समीरा थर- थर कांप रही थी. उसने देखा कि विहान की आँखों के कोटरों से एक धुंधली सुनहरी रोशनी निकल रही थी. विहान ने अपना चेहरा समीरा के गर्दन के करीब झुकाया. समीरा को लगा कि वह उसे काट लेगा, लेकिन विहान ने केवल एक शिकारी की तरह उसे सूंघा. असुर- विद्या उसके भीतर की उन इच्छाओं को बाहर ला रही थी जिन्हें विहान ने गरीबी और समाज के डर से हमेशा दबा कर रखा था.
उधर रॉकी, जो जमीन पर छटपटा रहा था, अपनी पिस्तौल तानते हुए चिल्लाया, छोड उसे! कमीने!
विहान ने नींद में ही, बिना आँखें खोले, अपना दायां पैर पीछे की ओर हवा में चलाया. यह कोई साधारण लात नहीं थी, बल्कि' असुर- बैक- किक' थी. रॉकी के हाथ से पिस्तौल ऐसे उडकर खिडकी तोड के बाहर गई जैसे उसे किसी ने रॉकेट पर बैठा दिया हो. रॉकी खुद पीछे की दीवार से जा टकराया और' Wall पेंटिंग' की तरह चिपक गया.
समीरा को लगा कि यही सही मौका है. उसने अपनी पूरी ताकत बटोरी और विहान के पैरों के बीच (Groin area) अपने घुटने से एक जोरदार प्रहार किया. यह एक ऐसा वार था जो किसी भी' बाहुबली' को आँसू बहाने पर मजबूर कर दे.
प्रहार का नतीजा:
जैसे ही समीरा का घुटना विहान के संवेदनशील हिस्से से टकराया, एक अजीब सी धात्विक आवाज आई—' टंगग्ग! जैसे किसी ने पीतल के घंटे पर हथौडा मार दिया हो. विहान का शरीर उस वक्त असुर- विद्या के' वज्र- काया' कवच में था. समीरा को ऐसा लगा जैसे उसने अपना घुटना किसी उडते हुए फाइटर जेट की बॉडी पर दे मारा हो.
आहहह. मम्मी! समीरा के मुँह से चीख निकली और वह दर्द के मारे एक पैर पर' बल्ले- बल्ले' वाले स्टेप्स करने लगी. उसका घुटना अब झनझना रहा था और उसे यकीन हो गया था कि विहान के पास वहां' हड्डियाँ' नहीं, बल्कि' अल्ट्रा- लेवल' का गार्ड लगा है.
विहान का रिएक्शन (नींद में):
विहान, जो अभी तक समीरा को किसी जकडे हुए शिकार की तरह पकडे था, इस वार से उसकी नींद में हल्का सा खलल पडा. उसने अपनी आँखें आधी खोलीं, लेकिन उनमें चेतना के बजाय सिर्फ गहरा आलस था. उसने समीरा की ओर एक तिरछी नजर डाली, जैसे कोई नींद में उडती हुई मक्खी को देखता है.
उसने नींद में ही झुंझलाते हुए बुदबुदाया—" मच्छर. बहुत मच्छर हैं आज.
और फिर, विहान ने समीरा की कमर से अपनी पकड ऐसे ढीली की जैसे कोई पुराना कचरा फेंक रहा हो. उसने उसे झटके से धक्का दिया, जिससे समीरा सीधे जाकर रॉकी के ऊपर गिरी, जो पहले से ही' Wall पेंटिंग' बना हुआ था.
विहान ने एक लंबी जम्हाई ली, अपने बिस्तर की चादर को सही किया, और वापस अपनी' असुरविद्या' किताब को तकिये की तरह सिर के नीचे दबा लिया. उसने चादर ओढी और दो सेकंड के भीतर ही फिर से खर्राटे लेने लगा. उसके खर्राटों की आवाज अब ऐसी थी जैसे कोई जनरेटर चालू हो गया हो.
कमरे में अब सन्नाटा था, सिवाय रॉकी के कराहने और समीरा के अपने घुटने को सहलाने की आवाज के.
समीरा ने खौफ और हैरानी से रॉकी की ओर देखा. रॉकी. इसके पास' लोहा' लगा है क्या? मेरा घुटना जवाब दे गया है!
रॉकी, जिसका हाथ अभी- अभी आजाद हुआ था, हाँफते हुए बोला, भाग यहाँ से समीरा! ये कोई इंसान नहीं है, ये सोता हुआ डायनासोर है! अगर ये जाग गया तो हमें कच्चा चबा जाएगा.
दोनों ने दबे पाँव, लंगडाते हुए कमरे से बाहर निकलने की कोशिश की, जबकि विहान अपनी नींद में किसी दूसरी दुनिया के सपने देख रहा था, पूरी तरह बेखबर कि उसने अभी- अभी बिना जागे ही दो शिकारियों का बैंड बजा दिया है.