असुरविद्या by OLD KING in Hindi Novels
अध्याय एक: अपराधीमुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस...
असुरविद्या by OLD KING in Hindi Novels
अध्याय 2 - यक्षिणी चित्रा क्षण भर के लिए सब कुछ ठहर गया. जैसे ही खून कागज के रेशों में समाया, कमरे की हवा ठंडी होकर जमने...
असुरविद्या by OLD KING in Hindi Novels
अध्याय - 3 पारस पत्थरविहान के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान उभरी जिसने यक्षिणी को भी पल भर के लिए खामोश कर दिया. वह मुस्कान कि...
असुरविद्या by OLD KING in Hindi Novels
पैसा एक साधनसुबह के ठीक सात: चौदह बज रहे थे. मुंबई की सडकों पर उमस और शोर का कब्जा होने लगा था. कमरे की खिडकी से आती धूप...