उन बदमाशो मे से एक जानवी के करीब आने लगता है , जानवी चिल्लाती है --
जानवी :- नही , छोड़ो मुझे जाने दो । हेल्प मी प्लिज ।
जानवी की आवाज सुनकर आदित्य और उसके दोस्त उपर की और भागता है जहां से जानवी की आवाज आ रही थी । आदित्य वहां पर पहूँच चुका था , आदित्य दैखता है के दौ लड़का जानवी का पैर पकड़ा था और एक जानवी का हाथ और एक लड़का उसके करीब जा रहा था ।
जानवी के कपड़े फटे हूए थे । जानवी जैसे ही आदित्य को दैखती है , वो कहती है --
जानवी :- आदित्य. .!
जानवी के मुह से आदित्य का नाम सुनकर वो बदमाश सब चोंक जाता है और आदित्य की और दैखता है , तभी एक बदमाश हाथ मे चाकु लिए आदित्य से कहता है --
बदमाश: - अबे ओ कौन रो तु और यहां क्या कर रहा है ।
आदित्य लंगड़ाते हूए आगे बड़ता है और कहता है --
आदित्य :- लड़की को छोड़ दो ।
तभी एक बदमाश हसते हूए कहता है --
बदमाश :- ये लो ये लंगड़ा लंगड़ाते हुए आया है इसे बचाने । हा हा हा .... अबे ओ चुप चाप चला जा यहां से वरना तेरा दुसरा पैर भी तेरे काम के लायक नही रहेगा ।
आदित्य :- तुम मेरे पैर की चिंता छोड़ो और अपनी चिंता करो । चुप चाप जानवी को छोड़ो और निकलो यहां से ।
बदमाश: - हा हा ... ओए लंगड़े और अगर नही छोड़ा तो ।
इतना बोलकर वो बदमाश आदित्य को चाकु मारने जाता है पर आदित्य अपने आपको बचा लेता है और उसे मारने लगता है । तभी दुसरा बदमाश आकर आदित्य को चोट लगे पैर पर मारता है जिससे आदित्य लड़खड़ाता हूआ अपने आपको संभालता है ।
फिर चारो एक साथ आदित्य से लड़ने लगता है पर आदित्य एक एक करके सबको मारने लगता है । आदित्य उन बदमाशो को बहोत मारता है , तभी एक आदित्य पर बंदूक तान देता है तो रमेश बड़े ही फुर्ती से उससे उसका बंदूक छीन लेता है ।
तभी एक आदित्य के हाथ पर चाकु मारता है और एक आदित्य के चोट लगे पैर पर जिससे आदित्य अपने घुटने पर बैठ जाता है ।
जिससे कृतिका और रमेश कहता है --
दोनो एक साथ :- आदित्य ।
आदित्य फिर किसी तरह खड़ा होकर सभी बदमाशो को बहोत मारता है , जिससे सभी वहां से भाग कर चला जाता है । जानवी अपने फटे कपड़े से अपने शरिर को ढक रही थी । कृतिका और रमेश वहां से बाहर चला जाता है आदित्य लड़खड़ाते हूए जानवी को करीब जाता है जिससे जानवी अपने शरीर को आदित्य से छुपा रही थी ।
जानवी आदित्य की और दैखती है तभी जानवी की नजर आदित्य के हाथ पर जाती है , जानवी दैखती है के आदित्य के हाथ से खुन बह रहा था ।
जानवी आदित्य के हाथ को छुना चाहती थी पर वो छु नही पा रही थी क्योकी इसने जो अभी तक आदित्य के साथ किया था , उस कारण से जानवी आदित्य के पास जा नही पा रही थी ।
आदित्य जानवी के पास जाता है और अपना शर्ट जानवी को पहना देता है । जानवी को अब अपने गलती का अहसास होने लगा था । जानवी को विकास पर गुस्सा आने लगा था । क्योकी विकास जानवी को दौ बार छोड़कर भागा था और हर बार आदित्य ही जानवी को बचाता है । आदित्य पैर मे लगे चोट के कारण लड़खड़ाते हूए चलने की कोशिश करता है पर एक दो कदम चलने के बाद ही गिरने लगता है , तब जानवी आदित्य को पकड़ लेती है ।
जानवी के पकड़ने से आदित्य जानवी की और एक हल्की मुस्कान के साथ दैखता है ।
जानवी :- तुम ठिक हो ।
आदित्य हां मे अपना सर हिलाकर जवाब देता है । कुछ चलने के बाद रमेश और कृतिका आती है और जानवी को आदित्य से अलग करके दोनो खुद उसे सहारा देता है , जानवी आदित्य को छोड़ना नही चाहती थी पर वो क्या भी करती ।
जानवी को अब समझ मे आने लगी थी के उसने आदित्य पर झुटे आरोप लगाए थे । उसने आदित्य को गलत समझा था । आदित्य जानवी से कहता है --
आदित्य :- तुम ठिक हो ?
जानवी हां मे अपना सर हिलाती है । आदित्य जानवी के कंधे पर हाथ रखता है और लंगड़ाते हूए जानवा को क्लब से बाहर लेकर आता है ।
आदित्य के हाथ से खुन बहता दैखकर कृतिका कहती है --
कृतिका :- आदित्य तुम्हारे हाथ से तो खुन बह रहा है ।
इतना बोलकर कृतिका रमेश से रुमाल लेती है । जानवी आदित्य के पास आना चाहती थी के तब तक कृतिका आदित्य के हाथ पर रुमाल बांध देती है , कृतिका को रुमाल बांधते दैखकर जानवी रुक जाती है । कृतिका आदित्य से कहती है --
कृतिका :- ये क्या आदित्य , तुम्हारे हाथ पर तो चोंंट आई है और खुन भी बह रहा है और तुम्हें पता भी नही है । कब तक सिर्फ दुसरो के बारे मे सोचोगे , अब अपने बारे मे सोचो । अब दैखना कही फिर से पुलिस तुम्हें ही उठा कर ना ले जाए ।
कृतिका की बात को जानवी समझ जाती है के कृतिका उसे ही बोल रही है । जानवी चुप चाप गाड़ी मे बैठ जाती है । जानवी गाड़ी मे हर वक्त आदित्य को ही दैख रही थी और सौच रही थी के उसने जो आदित्य के साथ किया क्या वो सही किया या गलत ।
कुछ ही दैर मे सभी घर पहूँच जाता है । आदित्य जानवी से कहता है --
आदित्य :- जाओ , अपने कमरे मे जाके आराम करो ।
आदित्य की बात को सुनकर जानवी अपने कमरे मे चली जाती है ।
जानवी अपना कपड़ा बदल कर निचे आता है जहां पर रमेश और कृतिका आदित्य हाथ और पैर लगे चोंट पर मरहम पट्टी कर रहे थे । जानवी अब भी आदित्य के पास जाकर उसे सॉरी बोलना चाहती थी पर जानवी जा नही पा रही थी और जाती भी किस मुह से ।
दुसरे दिन सुबह आदित्य और उसके दोस्त लोग सभी एक जगह पर बैठे हूए थे तभी वहां पर इंस्पेकटर आ जाता है । इंस्पेक्टर को दैखकर सभी हैरान हो जाता है , जानवी भी । तभी कृतिका कहती है --
कृतिका :- लो अब और करो मदद । मैने तो पहले ही कहा था के जाने की कोई जरुरत नही है , पर नही इसे कहां मानना था मेरी बात अब जाओ फिर से लॉक-अप मे ।
आदित्य :- तुम जरा सांत रहोगी । इंस्पेकटर साहब आप यहां सुबह सुबह । क्या बात है ?
रमेश :- बात क्या होगी , जानवी ने बुलाया होगा , कल रात मे जो हूआ , इसमे भी जानवी को लगा के तुने करवाया है ये सब । अब भुगत । तुझे बड़ा शौक है ना मदद करने की ।
रमेश की बात को सुनकर इंस्पेकटर कहता है ---
इंस्पेकटर :- कल रात के लिए । नही मैं तो आदित्य जी से जानवी मेडम की किडनेपिंग के बारे मे बात करने आया था । पर कल रात को क्या हूआ था ? क्या कोई फिर से किडनेप करने की कोशिश किया था क्या ?
इंस्पेक्टर की बात को सुनकर कृतिका और रमेश राहत की सांस लेता है पर जानवी चोंक जाती है के आखिर ये इंस्पेक्टर किडनेपिंग के बारे मे क्या बात करने आया है ।
आदित्य :- हां सर वो क्लब मे थोड़ी सी Misunderstanding. हो गई थी , बस और कुछ नही । पर आप किडनेपिंग के बारे मे क्या बात करना चाहते हो ।
इंस्पेक्टर सभी को दैखकर चुप हो जाता है तो आदित्य कहता है --
आदित्य :- कोई बात सर ये सब मेरे अपने है आप बोल सकते हो ।
इंस्पेक्टर :- मै उस केश के बारे मे काफी कुछ जानकारी हासिल किया है । जिसमे से ये पता चला है के जिसने किडनैप किया था । उसका नाम काली है जिसके उपर कई सारे केसेस है पर फिलहाल अभी फरार है और बहोत जल्द हम उसे पकड़ लेंगे । दुसरी बात हमने काली के मोबाइल का डिटेल निकाला है जिसमे किडनेप होने के कुछ दिन पहले से ही एक नम्बर काली को कॉल रहा था । जब हमने उसकी डिटेल निकाली तो वो नम्बर विकास का निकला ।
इंस्पेकटर से विकास का नाम सुनकर आदित्य और बाकी सभी हैरान था । जानवी तो एक दम चोंक सी गई थी ।
आदित्य :- पर विकास ऐसा क्यों करेगा । नही नही ऑफिसर, आपको कोई गलतफहमी हूई है । विकास जानवी को किडनेप क्यों करायेगा ।
इंस्पेक्टर :- आपकी बात सही है लेकिन सच तो यही है ।
जानवी :- नही ऑफिसर, आप ठिक से जांच किजिये, इसमे विकास का हाथ नही हो सकता है ।
आदित्य :- जानवी सही बोल रही है ऑफीसर, हो सकता है विकास ने किसी और काम से काली को फोन किया होगा ।
जानवी :- बस बहोत हो गया । जब तक पूरा सबूत नही मिल जाता है तब तक हम विकास को दोषी नही मान सकते और विकास के लिए किसीको कोई हमदर्दी दिखाने की जरुरत नही है ।
कृतिका :- अरे वाह मेडम , जब बात विकास की आई तब आपको सबूत चाहिए , और जब आदित्य को आपने बिना सबूत के ही अरेस्ट करवा दिया था उसे इतना टॉर्चर किया तब कौन सा सबूत था तुम्हारे पास । किस आधार पर तुमने आदित्य को अरेस्ट कराया ।
आदित्य :- कृतिका , छोड़ो , चुप हो जाओ ।
To be continue.....443