Tere Mere Darmiyaan - 58 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 58

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तेरे मेरे दरमियान - 58

आदित्य जान बूझकर जानवी को जलाने के लिए कहता है --

आदित्य :- कंश मामा ..!

तिरु :- येस भांजे । 

आदित्य :- कितना मजा आ रहा था । इतने सारे लोग , म्यूजिक और ये खाना वाह । मजा आ गया ।

तिरु :- हां भांजे । मजा तो बहोत आया । अब चलो , बबोत खाना खा लिया , अब सोने चलते है ।

आदित्य : - जी मामा जी , चलिए ।

जानवी को ये सब बहोत अजीब लग रहा था वो आदित्य को परेशान करने के लिए बहोत कुछ कर रही थी पर आदित्य उसके चाल को नाकाम कर देता था । 

जानवी रोज सुबह पहले अपने लिए खाना बनवाती और जान बुझकर किचन मे दैर करवाती ताकी आदित्य को दैर से खाना मिले । जानवी आदित्य को परेशान करने की बहोत सारे पैंतरा अपनाती है पर आदित्य एक दम शांत और खुश था । ये जानवी को सहन नही हो रहा था । जानवी अपने नौकरो को डांटती है और कहती है --

जानवी :- तुम दोनो को कितनी बार कहा है के किचन मे जान बुझकर दैर करो ताकी उन लोगो को खाना बनाने मे दैर हो ।

नौकर :- मेडम हम तो रोज दैरी करते है , पर क्या फायदा ।

जानवी :- क्या फायदा का क्या मतलब ?

तब वो नौकर जानवी लेकर जाकर गार्डन की तरफ दिखाता है जानवी दैखता है के आदित्य, तिरु और बाकी सभी गार्डन मे खाना बना रहे थे । आदित्य कहता है --

आदित्य :- एक बात तो है मामा जी , के गार्डन मे खाना बनाने का आईडिया बहोत अच्छा दिया आपने एक दम खुला आसमान, खुली हवा , अ हा , बिल्कुल पिकनिक का एहसास हो रहा है ।

जानवी हैरानी से अपने आप ही कहती है --

जानवी :- गार्डन मे पिकनिक का फिल ? ये कौन पागल लोगो को जलाने मे पड़ गई मे । मैं कुछ भी कर लूं पर इन गंवारो को कोई फर्क ही नही पड़ेगा ।

इतना बोलकर जानवी अपना फोन निकालती है और विकास को फोन लगाती है पर विकास बार बार जानवी का फोन काट दे रहा था । जानवी गुस्से से अपना दायां पैर ज़मीन पर पटकती है और वहां से चली जाती है ।

दुसरे दिन शाम को जानवी विकास के घर पर जाती है जहां पर विकाश सोफे पर बैठा था , जानवी को दैखकर धिरे - धिरे उठता है क्योकी उसके पिछे पुलिस की लाठी पड़ने के कारण अब भी दर्द था । विकास जानवी से कहता है --

विकास :- जानवी तुम यहां ?

जानवी :- तुम्हें मैं दो दिन से लगातार कॉल कर रही हूँ और तुम हो के मेरा कॉल काट दे रहे हो । एक तो मैं उस आदित्य से परेशान हूँ और एक कुम हो के मेरा फोन तक नही उठा रहो हो , आखिर तुम्हें हो क्या गया है ।

विकास :- वो मैं तुमसे अभी नही मिल सकता ।

जानवी :- अभी नही मिल सकता का क्या मतलब ।

विकास :- पहले तुम आदित्य से डिवोर्स ले लो , क्योकी तुम अभी भी कानूनन उसी की पत्नी हो और किसी गैर की पत्नी के साथ प्यार करने का नतीजा मैं भूगत चुका हूँ ।

जानवी :- ये तुम क्या पागलो जैसी बात कर रहे हो ।

विकास जानवी को पुलिस स्टेशन की सारी बात बोलकर सुनाता है । जानवी हैरानी से कहती है --

जानवी :- क्या तुम्हें मार पड़ी है ।

विकास :- ऐसी पड़ी है के बैठ भी नही पा रहा हूँ ।

जानवी :- चलो ।

विकास :- पर कहां ?

जानवी :- मुझे बाहर जाना है दिमाग पर टेंशन भी बहोत है और बहोत भूख लगी है किसी अच्छी जगह खाना खाने चलते है ।

विकास :- पर ऐसी हालत मे ।

जानवी :- चलो ना ।

इनता बोलकर दोनो वहां से एक होटल मे चला जाता है । दोनो पहले एक जगह खाना खाना खाता है और फिर एक क्लब मे चला जाता है जहां पर जानवी और विकास डांस करने लगती है । विकास ऐसे मौके को छोड़ना नही चाहता था और वो जानवी के करीब आने की कोशिश करता है पर जानवी विकास से दुर हट जाती है ।


काफी समय हो गया था आदित्य घड़ी की और दैखता है , घड़ी मे रात के 12 बज रहे थे , पर जानवी अभी तक घर नही पहूँचा था । आदित्य को जानवी की फिक्र होने लगता है तो आदित्य रमेश से कहता है --

आदित्य : - यार जानवी अभी तक नही आई है । चल ना चल कर दैखते है ।

कृतिका :- तेरी हालत दैखी है , तु इस हालत मे बाहर जाएगा । अभी तो तु पुरी तरह ठिक भी नही हूआ है । चल छोड़ ना , आ जाएगी जब आना होगा , तुझे क्यों इतनी टेशंन हो रही है और वैसे भी वो ये सब जान बुझकर कर रही है । ताकी हमे परेशान कर सके ।

आदित्य :- पर अगर वो किसी मुसीबत मे रहा तो ?

कृतिका :- तो क्या , हमने थोड़ी ना उसे इतनी रात को बाहर जाने के लिए बोला है और वैसे भी तु उसे बाचायेगा वो फिर सोचेगी के ये सब तुने किया है और वो फिर से तुझे पुलिस के हवाले कर देगी , इससे तो अच्छा है जो होगा होने दो ।

आदित्य :- कैसी बात कर रहे हो तुम लोग । पागल वागल हो क्या । मेरे साथ चलना है तो चलो वरना मैं जा रहा हूँ ।

इतना बोलतर आदित्य जाने लगता है तभी रमेश कहता है --

रमेश :- रुको मैं आता हूँ ।

कृतिका :- मैं भी आती हूँ ।

इतना बोलतर तिनो वहां से निकल जाता है । इधर विकास बार बार जानवी के करीब जाता है और जानवी विकास से दुर हट जाती है , तब वहां पर कुछ बदमाश विकास की हरकत को दैख रहा था वो लोग जानवी की खुबशरती को दैखकर जानवी के पास आ जाता है और जानवी को गलत जगहों पर टच करने लगता है । 

वो बदमास सब मिलकर विकास को साइड कर देते है और जानवी को घेर लेते है और डांस करते करते जानवी को छुने लगता है । जानवी गुस्से से कहती है --

जानवी :- ये क्या बदतमीजी है ।

बदमाश : - बदतमीजी कहां मेडम । हम तो वो कर रहे हो जो ये लल्लु ( विकास ) करने की कोशिश कर रहा था । 

जानवी :- हटो यहां से ( मदमीशो को ) , ( विकास को चिल्लाकर बुलाती है ) विकास. ..!

जानवी के बुलाने पर विकास दो कदम आगे बड़ाता है के तभी उन बदमाशो मे से एक चाकु निकालकर विकास को वहां से बाहर जाने को कहता है --

बदमाश: - चल , चुप चाप जा यहां से । और पिछे मुड़कर भी मत दैखना वरना यही तेरा खेल खतम कर दूगां । विकास डर जाता है जानवी को छोड़कर वहां से चला जाता है । 

जानवी विकास को पुकारती रही पर विकास एक बार भी पिछे मुड़कर नही दैखा । जानवी ये दैखकर चोंक जाती है और अब विकास के जाने के बाद वो डर गई थी ।

इधर आदित्य और उसके दोस्त सभी जानवी को ढुंडते - ढुडंते उसी क्लब के बाहर आ जाता है जहां पर जानवी आयी है । आदित्य अपनी गाड़ी रोकता है और इधर उधर दैखने लगता है तभी आदित्य दैखता है के विकास वहां से भागते हूए निकलता है ।

आदित्य विकास को दैखकर उसे पुकारता है --

आदित्य :- विकास , विकास ।

विकास आदित्य की आवाज को सुनकर आदित्य की और दैखता है और वहां से जल्दी - जल्दी अपनी कार लेकर चला जाता है । आदित्य विकास को कार पिछे लंगड़ाते हूए कुछ धिर धिरे भागता भी है पर विकास आदित्य को दैखकर वहां से भाग जाता है । ये दैखकर आदित्य और उसके दोस्त हैरान हो जाता है के आखिर विकास उन लोगो को दैखकर भागा क्यों ।

आदित्य कहता है --

आदित्य :- ये विकास को क्या हो गया , वो हमे दैखकर भागा क्यों , कहीं अंदर जानवी किसी मुसीबत मे तो नही है ।

इतना बोलकर आदित्य और उसके दोस्त अंदर जाने लगता है । इधर अंदर मे वो बदमाश जानवी को पकड़कर एक हॉल मे लेकर चले गए थे । उन सबसे पास हथियार था , किसीके पास गन तो किसी के पास चाकु था ।

वो लोग जानवी को जहां तहां टच कर रहा था , और उसके कपड़े को भी फाड़ रहा था । जानवी रोती है और कहती है --

जानवी :- मुझे जाने दो , मेरे पास मत आओ । छोड़ दो मुझे प्लीज । कोई है , हेल्प मी । 

बदमाश :- कोई नही आएगा जानेमन । आज तो हम तेरे हम साथ पुरी रात मजे करेगें । बहोत दिनो बाद तेरे जैसी गौरी चिकनी माल मिली है । आज तो पुरी पार्टी मनाएगें । तु घबरा मत , अगर हमारा साथ देगी तो तुझे भी मजा आएगा और अगर चिखी चिल्लाई तो हमे फिर .....!

जानवी :- नही नही , ऐसा मत करो , भगवान के लिए मुझे जाने दो ।

जानवी के बार बार रिक्वेस्ट करने के बाद भी वो बदमाश जानवी को छुने लगता है , और उनमे से एक जानवी को पकड़कर जमीन मे लिटा देता है , बाकी बचे दो जानवी के दोनो पैर को पकड़ता है , उन लोगो की पकड़ इतनी मजबूत थी के जानवी अब हिल भी नही पा रही थी ।

इधर आदित्य और उसको दोस्त क्लब के अंदर आ चुके थे , सभी जानवी को इधर उधर दैखने लगता है पर जानवी वहां पर कही नही थी । आदित्य जानवी को वहां पर ना दैखकर परेशान हो जाता है । 

तभी इधर उन बदमाशो मे से एक जानवी के करीब आने लगता है , जानवी चिल्लाती है --

जानवी :- नही , छोड़ो मुझे जाने दो । हेल्प मी प्लिज ।


Note :-  आगे क्या होगा कमेंट मे बताए । और प्लीज फोलो जरुर करले , आपकी एक फोलो से हमे बहोत अच्छा लगता है ।

To be continue.....435