एपिसोड: 'रक्त संबंध या गहरा षड्यंत्र?'
1. परिचय: आभ्या खन्ना
युवती अंदर आई। उसने सादगी भरा सूट पहना था, लेकिन उसके चलने के अंदाज़ में वही रौब था जो खन्ना खानदान की पहचान थी। उसने अपना बैग मेज़ पर रखा और एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर में आर्यन के पिता एक नवजात बच्ची को गोद में लिए हुए थे और उनके पीछे लंदन का एक मशहूर अस्पताल दिख रहा था।
"मेरा नाम आभ्या है," उसने आर्यन की आँखों में आँखें डालकर कहा। "पिताजी ने मुझे लंदन में एक बोर्डिंग स्कूल में रखा था। उन्होंने वादा किया था कि जब सही समय आएगा, वो मुझे घर ले आएंगे। लेकिन उनके जाने के बाद, मुझे लगा कि शायद मैं इस परिवार के लिए एक 'अनचाहा राज़' बनकर रह गई हूँ।"
2. विश्वास और संदेह का द्वंद्व
आर्यन के हाथ कांप रहे थे। वह हमेशा से अकेला महसूस करता था, और आज अचानक उसके सामने उसकी बहन खड़ी थी। वह भावुक होकर उसकी ओर बढ़ा, लेकिन राधिका ने धीमे से उसका हाथ पकड़ लिया।
"आर्यन, ठहरो," राधिका ने फुसफुसाते हुए कहा। फिर वह आभ्या की ओर मुड़ी। "आभ्या, हम तुम्हारी बात पर यकीन करना चाहते हैं, लेकिन खन्ना मेंशन ने हाल ही में बहुत धोखे देखे हैं। क्या तुम्हारे पास इस तस्वीर के अलावा कोई और पुख्ता सबूत है?"
आभ्या मुस्कुराई, पर उसकी मुस्कुराहट में थोड़ी कड़वाहट थी। "मैं जानती थी कि मेरा स्वागत सवालों से होगा। यह रहा मेरा बर्थ सर्टिफिकेट और पिताजी के हाथ से लिखा वह आखिरी खत, जो उन्होंने मेरी १८वीं सालगिरह पर भेजा था।"
3. देब की पैनी नज़र
देब कमरे के कोने में खड़ा सब देख रहा था। उसने गौर किया कि आभ्या के हाथ की कलाई पर एक छोटा सा निशान था—एक ऐसा निशान जो किसी पुराने ज़ख्म जैसा लग रहा था। साथ ही, उसके बात करने के तरीके में एक ऐसी 'ट्रेनिंग' झलक रही थी जो किसी साधारण लड़की में नहीं होती।
देब ने तुरंत अपने फोन से आभ्या की फोटो खींची और अपने नेटवर्क को भेज दी। "इसकी पूरी कुंडली चाहिए, अभी!" उसने मैसेज किया।
4. हवेली के नए समीकरण
आभ्या को मेंशन के एक गेस्ट रूम में ठहराया गया। आर्यन खुश था कि उसे अपना खून मिल गया, लेकिन राधिका का मन अशांत था।
रात के सन्नाटे में, राधिका ने देखा कि आभ्या अपने कमरे से निकलकर चुपके से 'पुरानी तिजोरी' (जहाँ काली डायरी मिली थी) की तरफ जा रही है। राधिका ने उसका पीछा किया। आभ्या वहां खड़ी दीवारों को ऐसे छू रही थी जैसे वह कुछ ढूंढ रही हो।
"क्या ढूंढ रही हो, आभ्या?" राधिका ने पीछे से आवाज़ दी।
आभ्या ज़रा भी नहीं चौंकी। वह धीरे से मुड़ी। "अपनी पहचान, राधिका। इस घर के हर पत्थर में एक कहानी छिपी है। मैं बस यह देख रही थी कि क्या मेरे पिता ने मेरे लिए कोई संदेश यहाँ भी छोड़ा है।"
5. चौंकाने वाला कॉल
अगली सुबह, देब के पास उसके मुखबिर का कॉल आया। देब का चेहरा सफेद पड़ गया। वह दौड़कर आर्यन के पास पहुँचा, जहाँ आर्यन और आभ्या नाश्ते की मेज़ पर बैठे थे।
"साहब, एक मिनट आपसे अकेले में बात करनी है," देब ने गंभीर स्वर में कहा।
बाहर जाकर देब ने जो बताया उसने आर्यन के होश उड़ा दिए। "साहब, लंदन के उस अस्पताल में उस साल किसी 'आभ्या खन्ना' का जन्म नहीं हुआ था। और जो लड़की अंदर बैठी है, वह पिछले दो साल से रूस की एक 'जासूसी एजेंसी' के रडार पर थी।"
आर्यन चौंक गया। "क्या? तो वह कौन है?"
"वह एक प्रोफेशनल 'कॉन-आर्टिस्ट' (ठग) हो सकती है, या फिर..." देब की बात अधूरी रह गई क्योंकि तभी हवेली के अंदर से राधिका की चीख सुनाई दी।
6. नया संकट
आर्यन और देब अंदर भागे। उन्होंने देखा कि राधिका ज़मीन पर गिरी हुई थी और आभ्या गायब थी। लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि दीवार पर खून से एक संदेश लिखा था:
"असली बहन अभी भी कैद में है। अगर उसे ज़िंदा देखना चाहते हो, तो खन्ना एंटरप्राइज़ेस के 'प्रोजेक्ट फीनिक्स' की फाइलें लेकर पुरानी खदान पर आओ।"
आर्यन को समझ आया कि आभ्या केवल एक मोहरा थी, असली खिलाड़ी तो अभी भी पर्दे के पीछे से डोरियां हिला रहा था।