अंधेरे की दस्तक और आर्यन का संकल्प
देब ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। उसने तुरंत पाखी और राधिका को लिविंग रूम के बीचों-बीच बने 'सेफ ज़ोन' में रहने को कहा। "आर्यन, तुम मेन स्विच की तरफ जाओ, मैं बैकअप जनरेटर चेक करता हूँ। समीर इतना बेवकूफ नहीं है कि सिर्फ बिजली काटेगा, उसने जरूर घर के अंदर किसी को भेजा है।"
आर्यन ने किचन से एक भारी टॉर्च उठाई और राधिका की तरफ मुड़ा। राधिका की आँखों में आँसू थे, लेकिन आर्यन ने उसके गालों को हल्के से छुआ। "चिटकनी, याद है कल रात मैंने क्या कहा था? संतुलन। अब बस खुद पर भरोसा रख, मैं वापस आकर उस 'गलती' को सही अंजाम तक पहुँचाऊँगा।"
आर्यन की बात सुनकर राधिका के चेहरे पर हल्की सी लाली छा गई, लेकिन डर अभी भी कायम था।
छिपकर वार और असली चेहरा
आर्यन जैसे ही मेंशन के पिछले हिस्से में पहुँचा, उसे झाड़ियों में कुछ सरसराहट सुनाई दी। वहाँ समीर नहीं, बल्कि उसके दो गुर्गे बिजली के तारों से छेड़छाड़ कर रहे थे।
"खेल खत्म, लड़कों!" आर्यन की आवाज़ गूँजी।
एक जबरदस्त हाथापाई शुरू हुई। आर्यन अकेले उन दोनों पर भारी पड़ रहा था, लेकिन तभी अचानक पूरे मेंशन की लाइटें गुल हो गईं। टाइमर 00:00 पर था। अंधेरा इतना घना था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।
उधर, डाइनिंग हॉल में राधिका और पाखी एक-दूसरे का हाथ थामे खड़ी थीं। तभी उन्हें महसूस हुआ कि कोई खिड़की से अंदर दाखिल हुआ है। भारी जूतों की आवाज़ उनकी तरफ बढ़ रही थी।
"राधिका... मैंने कहा था न, मेरी चीज़ को कोई और छुए, यह मुझे पसंद नहीं," अंधेरे में समीर की आवाज़ गूँजी। वह राधिका के करीब पहुँचा और उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की, तभी एक ज़ोरदार थप्पड़ की गूँज सुनाई दी।
राधिका का पलटवार
यह थप्पड़ राधिका ने मारा था। "समीर, तूने शायद मुझे पहचाना नहीं। मैं खन्ना परिवार की होने वाली बहू हूँ और खुद की रक्षा करना जानती हूँ!"
तभी एक इमरजेंसी लाइट जली और सामने आर्यन खड़ा था, जिसके माथे पर हल्की चोट थी लेकिन आँखों में जीत की चमक। उसके पीछे देब था, जिसने समीर के गुर्गों को दबोच रखा था। समीर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन देब ने उसे कॉलर से पकड़ लिया।
"समीर, बिज़नेस में दुश्मनी अपनी जगह है, लेकिन घर की औरतों तक आना... यह मौत को दावत देना है," देब की आवाज़ में वह खौफ था जिससे पूरा शहर डरता था।
नई सुबह का नया अहसास
पुलिस समीर को ले गई। घर में दोबारा रोशनी लौट आई थी। देब और पाखी बाहर पुलिस से बात कर रहे थे, जबकि आर्यन और राधिका बालकनी में खड़े थे। सुबह की ठंडी हवा चल रही थी।
राधिका खामोश थी, उसकी नज़रें ज़मीन पर टिकी थीं। आर्यन ने धीरे से उसका हाथ थामा।
"तो... 'मिस तूफान' ने आखिरकार थप्पड़ मार ही दिया?" आर्यन ने माहौल को हल्का करने के लिए मज़ाक किया।
राधिका ने सिर उठाकर उसकी आँखों में देखा। "आर्यन, कल रात जो हुआ... और आज तुमने जो किया... मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या कहूँ।"
आर्यन थोड़ा और करीब आया, "कुछ मत कहो। कल रात वाली वह 'गलती' शायद मेरी ज़िंदगी का सबसे सही फैसला था। क्या तुम इस संतुलन को हमेशा के लिए बनाए रखने में मेरा साथ दोगी?"
राधिका ने मुस्कुराते हुए अपना सिर आर्यन के कंधे पर रख दिया। साजिश का साया छँट चुका था और खन्ना मेंशन में एक नई प्रेम कहानी की सुबह हो चुकी थी।