Ashvdhaama: Ek yug purush - 14 in Hindi Science-Fiction by bhagwat singh naruka books and stories PDF | Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 14

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 14



          दिल्ली की एक पुरानी इमारत

जिसे सरकारी रिकॉर्ड में “Archive Storage 11-C” नाम दिया गया था।

पर वास्तविक नाम कम लोगों को पता था
भारतीय प्राचीन युद्ध अभिलेखागार।
यह जगह इतनी गुप्त थी कि
बड़े बड़े कई वरिष्ठ अफ़सर भी इसके बारे में नहीं जानते थे।


शाम के 7 बज चुके थे


मौसम में हल्की ठंड और हवा में पुरानी काग़ज़ की गंध फैली थी।

अंदर एक कम रोशनी वाला कमरा,
और कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी अलमारी खुली थी।

अंदर वही बैठा था
डॉ. वेदप्रकाश शुक्ल, विश्व के चुनिंदा इंडो-आर्यन मिथोलॉजी विशेषज्ञों में से एक।

एक 3000 साल पुराना ग्रंथ उसके सामने खुला था।
पन्ने लगभग चूर हो चुके थे,

लेकिन शब्द अब भी तेज तलवार की तरह चमक रहे थे।
वह पढ़ रहा था
“असुर वंश की अंतिम प्रतिज्ञा:
गांधार के विनाश के बाद
जो अवशेष बचेगा,

वह अमर शक्तिशाली अस्तित्व की खोज करेगा।
क्योंकि वही शक्ति उन्हें
‘अंतिम युद्ध’ में विजय दिलाएगी।”

डॉ. वेदप्रकाश ने चश्मा उतारकर सिर पर रखा।
उसका चेहरा गंभीर हो गया।
“गांधार…
यानी आज का काबुल-खैबर-गजनवी क्षेत्र।”
उसने दूसरे पन्ने को पलटा।

अचानक हवा तेज चलने लगी।

ग्रंथ के पन्ने खुद-ब-खुद फड़फड़ाने लगे

मानो कोई अदृश्य उँगली इन्हें पलट रही हो।

वह चौंक गया।
कमरे में कोई नहीं था।

उसने खुद को संयत किया और पढ़ना जारी रखा—
गांधार ग्रंथ का खंड-3:
“अमर की मणि”
पन्ने पर लिखा था:
“उसे श्राप मिला, पर शक्ति नहीं गई।
वह मणि —
सिर्फ़ उसके माथे का आभूषण नहीं,
बल्कि देव और असुर दोनों के लिए
अंतिम द्वार है।
जो इसे प्राप्त करेगा,
वह मानवता या विनाश—
दोनों में से एक को चुन सकेगा।”
वेदप्रकाश की सांस अटक गई।
“यह तो… वही है!”
वह कुर्सी से उठा
और ग्रंथ को उठाकर लाकर एक लकड़ी के बॉक्स में रख दिया।
कमरा फिर भी शांत नहीं था।
जैसे कोई छाया
थोड़ी दूरी पर खड़ी
उसके हर मूवमेंट को देख रही हो।
पुराने ग्रंथ की आख़िरी चेतावनी
वह फिर बैठा और एक अन्य पन्ना खोला।
उस पर लिखा था—
“जब समय का पहिया फिर घूमेगा,
अमर अस्तित्व सक्रिय होगा।
और असुर-वंश,
जो अब आतंक के स्वरूप में होगा,
उस मणि की खोज में रक्त-पथ बनाएगा।”
वेदप्रकाश का दिल तेजी से धड़कने लगा।
उसने तुरंत सपोर्टिंग ग्रंथ खोला।
उसमें गांधार का युद्ध,
शकुनी की सत्ता,
और असुर वंश की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से लिखा था।
एक पंक्ति पर उसकी नज़र टिक गई:
“असुरों का अंतिम लक्ष्य —
अमर मणि
A sudden knock
दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई।
वह चौंक गया।
7 बजे के बाद इस हॉल में कोई नहीं आता।
दस्तक धीमी थी,
कुछ अजीब सी।
टुक… टुक… टुक…
जैसे कोई बेहद भारी हाथों से लकड़ी को छू रहा हो।
वेदप्रकाश ने आवाज़ दी—
“कौन?”
सन्नाटा।
फिर वही दस्तक—
इस बार ज़रा और भारी।
वह धीरे-धीरे दरवाज़े की ओर बढ़ा,
लेकिन जैसे ही वह पास पहुँचा—
अचानक सभी लाइटें टिमटिमाने लगीं।
एक गहरी ठंडी हवा कमरे में दौड़ी।
पूरे हॉल की हवा का तापमान गिर गया।
हल्की सी आवाज़—
मानो कोई बहुत दूर से सांस ले रहा हो।
वेदप्रकाश का दिल धक्का खा गया।
उसने तुरंत ग्रंथ बंद किया
और हाथ में पकड़कर पीछे हट गया।
रहस्यमय लिखावट
टेबल पर रखा खाली कागज़
अपने आप हिलने लगा।
जैसे कोई अदृश्य चीज़ उसे छू रही हो।
धीरे-धीरे उस पर एक शब्द उभरने लगा—
युगे युगे धर्मस्य,,,,,
वेदप्रकाश अवाक रह गया।
कुछ सेकेंड बाद दूसरा शब्द बना—
वेदों का ज्ञान ही उसे रोकेगा वो जन्म ले चुका है यही है 
और अंत में—
“वे आ रहे हैं।”
कागज़ पर तीन शब्द साफ़ दिखाई दे रहे थे:
तुम्हारी मौत निश्चित है ,भाग जाओ 
वे आ रहे हैं
कमरे की हवा अचानक गर्म हो गई—
जैसे कोई ऊर्जा का बड़ा स्रोत पास से गुजर रहा हो।
वह घुटने टेककर बैठ गया।
“अश्वत्थामा…”
उसने खुद से कहा
“तुम हो…
तुम जाग रहे हो…”तुम हो सच में 
लेकिन पल भर में वो ऊर्जा
बिना कोई नुकसान किए
कमरे से गायब हो गई। मौत शब्द बार बार उसको परेशान करने लगा फिर खुद से बाते करने लगा ,मेरी मौत ,,कैसे ओर कौन ,करेगा ,,
हेडक्वार्टर को कॉल
वेदप्रकाश तुरंत बाहर भागा
और अपने विशेष संपर्क—आर्यन ठाकुर—को फोन किया।
वेदप्रकाश:
“आर्यन… मेरा रिसर्च कामयाब हो गया ,, योगेश्वर अग्निवंश ठीक था वो जिंदा है , अश्व धामा जिंदा है आपकी थ्योरी ठीक थी । मुझे वो भी पता चला जिसका आपने जिक्र किया 
वे गांधार वंश के उत्तराधिकारी हैं!
वो वही हैं जिनसे शकुनी का राज्य शुरू हुआ था।
वो मणि की तलाश में हैं…”
आर्यन:
“क्या? आपके पास सबूत?”
वेदप्रकाश:
“मेरे पास उससे भी ज़्यादा है—
अश्वत्थामा की चेतावनी!”
आर्यन हिल गया—
“वो… प्रकट हुआ?”
वेदप्रकाश:
“नहीं।
बस… एक उपस्थिति।
एक संकेत।”
फोन कट गया।
वेदप्रकाश लंबे समय तक वहीं खड़ा रहा।
उसे लग रहा था—
कोई उसकी पीठ के पीछे खड़ा है।
लेकिन पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं हुई।
तभी पीछे खड़े उस परछाई ने जेब से फोन निकाला और सुना अंदर रख लिया और पीछे कमर से एक चीज निकाली ओर फायर किया वेद प्रकाश वही खड़े खड़े गिर गया ।

सवाल : किसने उसको मारा था ? 


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