Colorless Ishq Deep Love - Episode 12 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 12

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बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 12

अतीत की परछाइयाँ और अनसुना सच
1. लाइब्रेरी का गुप्त रास्ता
राधिका ने जब से कार्यभार संभाला था, वह हर चीज़ को बारीकी से देख रही थी। एक दोपहर, जब वह सोमनाथ के पुराने कमरे (जो अब लाइब्रेरी बन चुका था) में किताबों को तरतीब से लगा रही थी, उसे लकड़ी के फर्श में एक अजीब सी आवाज़ सुनाई दी। जैसे नीचे कुछ खोखला हो।
उसने कालीन हटाया और वहां एक छोटा सा पीतल का छल्ला देखा। उसे खींचते ही एक संकरा रास्ता नीचे की ओर जाता दिखा। राधिका का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, लेकिन उसने पीछे हटने के बजाय अपना फोन निकाला और टॉर्च जलाकर नीचे उतर गई।
नीचे एक छोटा सा कमरा था, जो शायद दशकों से नहीं खुला था। वहां कोई सोना-चांदी नहीं था, बल्कि दीवारों पर पुरानी तस्वीरें और अख़बारों की कतरनें चिपकी हुई थीं। राधिका की नज़र एक हेडलाइन पर ठहर गई: "खन्ना स्टील्स का भीषण अग्निकांड: क्या यह हादसा था या साज़िश?"
उस तस्वीर में तीन लोग थे—आर्यन के पिता, सिंघानिया और वह तीसरा व्यक्ति जिसका चेहरा अब राधिका के सामने साफ़ था। उस तस्वीर के नीचे हाथ से लिखा था: "रणवीर... जिसे हमने आग के हवाले कर दिया।"
2. देब की खोज और कड़वा सच
वहीं दूसरी ओर, देब शहर के पुराने रिकॉर्ड रूम में था। उसने उस जले हुए चेहरे वाले व्यक्ति की धुंधली तस्वीर एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर को दिखाई।
बूढ़े इंस्पेक्टर ने चश्मा ठीक करते हुए लंबी सांस ली। "बेटा, इस आग को शांत ही रहने दो। रणवीर खन्ना, आर्यन के पिता का सबसे बड़ा भाई था। उसे जायदाद के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे गुनाह के लिए घर से निकाला गया था जो उसने किया ही नहीं था। जिस आग में उसे मरा हुआ मान लिया गया, वह आग अपनों ने ही लगाई थी।"
देब के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। "इसका मतलब, वह आदमी अब बदला लेने लौटा है?"
"वह सिर्फ़ बदला लेने नहीं आया," इंस्पेक्टर ने फुसफुसाते हुए कहा, "वह अपना हक मांगने आया है। और उसके पास वह सबूत है जो आर्यन के पिता की 'ईमानदार' छवि को पल भर में राख कर सकता है।"
3. ब्लैकआउट और पैगाम
उसी रात, खन्ना मेंशन की बिजली अचानक गुल हो गई। बैकअप जनरेटर ने भी काम करना बंद कर दिया। पूरा मेंशन अंधेरे में डूब गया। आर्यन ने सुरक्षा गार्डों को आवाज़ दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
"राधिका! देब!" आर्यन चिल्लाया।
तभी डाइनिंग हॉल की बड़ी मेज़ पर एक मोमबत्ती खुद-ब-खुद जल उठी। मोमबत्ती की रोशनी में एक आकृति खड़ी थी। उसका आधा चेहरा जलने के निशानों से भयानक लग रहा था, लेकिन उसकी आँखों में वही चमक थी जो आर्यन की आँखों में थी—खन्ना खानदान की चमक।
"आर्यन... मेरे भतीजे," उस आदमी की आवाज़ ऐसी थी जैसे सूखी पत्तियों पर कोई चल रहा हो। "तुम्हारे पिता ने जो महल खड़ा किया, वह मेरी राख पर बना है। तुम्हें क्या लगा? सिंघानिया असली खिलाड़ी था? नहीं... वह तो बस मेरा एक मोहरा था जिसे मैंने इस्तेमाल किया ताकि मैं यह देख सकूँ कि इस घर की नई पीढ़ी कितनी मज़बूत है।"
आर्यन संभलते हुए बोला, "आप जो कोई भी हैं, सामने आकर बात कीजिये। अंधेरे में छिपना कायरों का काम है।"
रणवीर हंसा। "कायरता तो वह थी जो २५ साल पहले इस घर में हुई थी। मैं यहाँ तुम्हें मारने नहीं आया हूँ, आर्यन। मैं यहाँ तुम्हें यह बताने आया हूँ कि जिस 'विरासत' पर तुम नाज़ कर रहे हो, उसका हर पत्थर झूठ पर टिका है। कल सुबह की हेडलाइन तय करेगी कि खन्ना एंटरप्राइज़ेस रहेगा या मिट जाएगा।"
4. एक नया मोड़: राधिका का दांव
तभी अचानक लाइटें जल उठीं। रणवीर चौंक गया। उसने देखा कि राधिका हाथ में एक पुरानी लेज़र डिस्क और कुछ दस्तावेज़ लिए सीढ़ियों पर खड़ी थी।
"मिस्टर रणवीर खन्ना," राधिका की आवाज़ स्थिर और बुलंद थी। "आपका खेल वहीं खत्म हो गया था जब आपने मान लिया कि हम सिर्फ़ पुरानी कहानियों पर भरोसा करेंगे। मैंने उस तहखाने से वो असली वसीयत और वो वीडियो रिकॉर्डिंग ढूंढ निकाली है, जो आर्यन के पिता ने मरने से पहले बनाई थी।"
रणवीर के चेहरे का रंग उड़ गया।
राधिका नीचे आई और आर्यन का हाथ थाम लिया। "आर्यन के पिता को पता था कि उनके भाइयों ने उनके साथ क्या किया। उन्होंने आग नहीं लगाई थी, बल्कि आपको बचाने की कोशिश की थी। यह सिंघानिया ही था जिसने आप दोनों भाइयों को लड़वाया। यह रिकॉर्डिंग साबित करती है कि आपके पिता ने आपके नाम का ट्रस्ट इसलिए बनाया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि आप एक दिन वापस आएंगे।"
रणवीर की आँखों में नफरत की जगह भ्रम आ गया। "झूठ! सब झूठ है!"
"सच कड़वा होता है, बड़े पापा," आर्यन ने आगे बढ़कर कहा। "हमें लड़ने की ज़रूरत नहीं है। अगर आप अपना हक चाहते हैं, तो यह घर और बिज़नेस आपका भी है। लेकिन नफरत के रास्ते से नहीं, हक के रास्ते से।"
5. अंत या नई शुरुआत?
रणवीर के हाथ कांपने लगे। जिस नफरत को उसने २५ साल तक पाला था, वह एक पल में ढहती नज़र आ रही थी। उसने वह पुरानी तस्वीर जेब से निकाली और उसे मोमबत्ती की लौ में जला दिया।
"मैंने बहुत देर कर दी..." रणवीर ने भारी आवाज़ में कहा और बिना पीछे मुड़े अंधेरे में ओझल हो गया।
देब वहां पहुंचा, वह रणवीर को पकड़ने ही वाला था कि आर्यन ने उसे रोक दिया। "जाने दो देब। वह दुश्मन नहीं, एक टूटा हुआ इंसान है।"
सुबह हुई। सूरज की पहली किरण ने खन्ना मेंशन को फिर से रोशन किया। लेकिन इस बार कोई डर नहीं था। आर्यन, राधिका और देब बालकनी में खड़े थे।
"क्या तुम्हें लगता है वह वापस आएगा?" राधिका ने पूछा।
"पता नहीं," आर्यन ने गहरी सांस ली। "लेकिन अब हमारे पास कोई राज़ नहीं बचा है। और यही हमारी सबसे बड़ी