Colorless Ishq Deep Love - Episode 11 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 11

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बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 11

खन्ना मेंशन की दीवारें अब साज़िशों की गूँज से नहीं, बल्कि सुधार और संकल्प की आहटों से महक रही थीं। सिंघानिया और सोमनाथ के जेल जाने के बाद, बाहर की दुनिया को लगा कि सब शांत हो गया है, लेकिन आर्यन और राधिका जानते थे कि असली चुनौती अब शुरू हुई है—बिखरे हुए साम्राज्य को समेटने की और टूटे हुए विश्वास को फिर से जोड़ने की।

विरासत का बोझ और नई ज़िम्मेदारी

अगले कुछ हफ़्तों तक, आर्यन खन्ना एंटरप्राइज़ेस के दफ़्तर में ही दिन-रात गुज़ारने लगा। विश्वासघात ने कंपनी की जड़ों को कमज़ोर कर दिया था। कई बड़े प्रोजेक्ट्स रुक गए थे और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा था।

एक शाम, जब आर्यन अपनी डेस्क पर सिर धरे बैठा था, राधिका वहां पहुँची। उसके हाथ में कॉफ़ी के दो मग थे और आँखों में एक अटूट निश्चय।

"आर्यन, तुम अकेले इस पहाड़ को नहीं चढ़ सकते," राधिका ने मेज़ पर फ़ाइलें किनारे करते हुए कहा।

"राधिका, यह सिर्फ़ बिज़नेस नहीं है। यह मेरे पिता की इज़्ज़त है। जिसे मेरे ही खून ने नीलाम करने की कोशिश की," आर्यन की आवाज़ में थकावट और दर्द साफ़ था।

राधिका ने उसका हाथ थामा। "तो फिर हम इसे मिलकर बचाएंगे। आज से, मैं सिर्फ़ तुम्हारी मंगेतर नहीं, बल्कि खन्ना एंटरप्राइज़ेस की नई 'चीफ़ स्ट्रैटेजिस्ट' हूँ। मैंने अपनी फाइनेंस की डिग्री सिर्फ़ किताबों में रखने के लिए नहीं ली थी।"

देब, जो दरवाज़े पर खड़ा यह सब देख रहा था, मुस्कुराया। उसने अंदर आते ही एक मोटी फ़ाइल मेज़ पर रखी। "और मैं आपके 'इंटेलिजेंस विंग' का प्रमुख। हमने सिंघानिया की उन बेनामी संपत्तियों का पता लगा लिया है, जिनसे वह हमारी कंपनी के शेयर्स को मैनिपुलेट कर रहा था।"

काली डायरी का रहस्य: एक नया खुलासा

जैसे-जैसे वे बिज़नेस को संभाल रहे थे, सावित्री बुआ ने एक दिन आर्यन को तहखाने के उस गुप्त हिस्से में बुलाया जिसे 'पुरानी तिजोरी' कहा जाता था। उन्होंने आर्यन के हाथ में एक चमड़े की काली डायरी थमाई।

"यह तुम्हारे पिता की निजी डायरी है, आर्यन बाबा। उन्होंने इसमें वह सब लिखा था जो वह कभी कह नहीं पाए," बुआ की आँखों में आँसू थे।

आर्यन ने काँपते हाथों से डायरी खोली। जैसे-जैसे वह पन्ने पलटता गया, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। डायरी में ज़िक्र था कि सिंघानिया (जो आर्यन का सौतेला चाचा था) को जायदाद से इसलिए बेदखल नहीं किया गया था कि वह सौतेला था, बल्कि इसलिए क्योंकि उसने आर्यन की माँ को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी।

डायरी के एक पन्ने पर लिखा था:

"विक्रम (सिंघानिया) को लगता है कि मैं उसे नफरत के कारण निकाल रहा हूँ, लेकिन सच तो यह है कि वह इस घर के लिए एक ज़हर है। मैंने उसके हिस्से की संपत्ति एक अलग ट्रस्ट में रख दी है, जो केवल तब उसे मिलेगी जब वह अपनी नफरत छोड़ देगा।"

आर्यन को एहसास हुआ कि उसके पिता ने कभी भी सिंघानिया के साथ अन्याय नहीं किया था। यह जानकर उसका क्रोध शांत हुआ और उसकी जगह एक गहरी करुणा ने ले ली। उसने तय किया कि वह इस सच्चाई को कोर्ट में पेश करेगा, ताकि न्याय केवल सज़ा न दे, बल्कि सत्य को भी स्थापित करे।

कॉर्पोरेट पुनर्जन्म: 'द फीनिक्स इवेंट'

एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसका नाम दिया गया—'द फीनिक्स'। यह खन्ना एंटरप्राइज़ेस के पुनर्जन्म का जश्न था। शहर के तमाम दिग्गज वहां मौजूद थे।

मंच पर आर्यन खड़ा था, और उसके बगल में राधिका। राधिका ने आज गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जो उसके आत्मविश्वास और नेतृत्व को दर्शा रही थी।

आर्यन ने माइक संभाला, "देवियों और सज्जनों, पिछले कुछ महीनों में हमने जो देखा, वह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं थी, बल्कि अंधेरे और उजाले का संघर्ष था। आज खन्ना एंटरप्राइज़ेस एक नई शुरुआत कर रहा है। अब से, हमारी कंपनी का १०% मुनाफा उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च होगा जिनके पास अपनों का साया नहीं है।"

तभी भीड़ में से एक व्यक्ति ने चिल्लाकर पूछा, "मिस्टर खन्ना, क्या आप अभी भी सिंघानिया को अपना दुश्मन मानते हैं?"

आर्यन ने राधिका की ओर देखा, जिसने उसे धीमे से सिर हिलाकर प्रोत्साहन दिया। आर्यन बोला, "दुश्मन वह होता है जिससे हम डरते हैं। मिस्टर सिंघानिया अब मेरे लिए केवल एक सबक हैं। हमने उनकी नफरत को अपनी ताकत बना लिया है।"

पूरा हॉल तालियों की गूँज से भर गया। देब ने भीड़ के बीच खड़े होकर अपनी पैनी नज़रों से सुरक्षा का जायज़ा लिया। वह जानता था कि बाहरी तौर पर सब ठीक दिख रहा है, लेकिन साज़िशों के बीज अक्सर जीत के जश्न में ही बोए जाते हैं।

एक अनसुनी आहट: क्या युद्ध अभी बाकी है?

पार्टी के अंत में, जब मेहमान जा चुके थे, देब के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। दूसरी तरफ़ केवल गहरी साँसों की आवाज़ थी।

"हेलो?" देब ने सख़्ती से कहा।

"देब... तुम्हें लगा कि सिंघानिया को जेल भेजकर तुमने खेल खत्म कर दिया?" एक भारी, कर्कश आवाज़ गूँजी। "सिंघानिया तो सिर्फ़ एक मोहरा था। असली खिलाड़ी तो अभी भी आज़ाद है। खन्ना मेंशन की नींव में जो खून दबा है, उसका हिसाब होना अभी बाकी है।"

कॉल कट गया। देब का चेहरा पत्थर जैसा सख़्त हो गया। उसने आर्यन और राधिका को इस बारे में कुछ नहीं बताया, क्योंकि वह उनकी पहली सुकून भरी रात को खराब नहीं करना चाहता था। लेकिन वह समझ गया था कि 'खन्ना मेंशन' का इतिहास उतना सीधा नहीं है जितना दिखता है।

खुशियों की दस्तक और नई प्रतिज्ञा

अगली सुबह, आर्यन ने राधिका को बालकनी में बुलाया। ठंडी हवाएं चल रही थीं और सूरज की रोशनी सुनहरी आभा बिखेर रही थी।

"राधिका, इस सफर में तुमने मेरा हाथ तब थामा जब मैं खुद को खो चुका था," आर्यन ने एक छोटी सी डिबिया निकाली। उसमें एक नया हीरा जड़ा हुआ था, जो साफ़ और पारदर्शी था—बिल्कुल उनके रिश्ते की तरह। "पुराना सब राख हो चुका है। क्या तुम इस नई शुरुआत में मेरा साथ दोगी? हमेशा के लिए?"

राधिका की आँखों में खुशी के आँसू थे। "जब तक सादगी और सच्चाई हमारे साथ है, मैं कहीं नहीं जा रही, आर्यन।"

दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, अनजान थे कि दूर पहाड़ियों पर एक गाड़ी खड़ी थी, जिसके शीशे काले थे। गाड़ी के अंदर से कोई दूरबीन से उन दोनों को देख रहा था। उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी, जिसमें आर्यन के पिता के साथ एक तीसरा व्यक्ति भी खड़ा था, जिसका चेहरा जला हुआ था।

उपसंहार: तूफान के बाद का सवेरा

खन्ना मेंशन में अब हंसी गूँजती थी। सोमनाथ के कमरे को एक लाइब्रेरी में बदल दिया गया था। राधिका ने बिज़नेस की कमान संभाल ली थी और आर्यन ने नए प्रोजेक्ट्स पर काम करना शुरू कर दिया था।

देब ने अपनी सुरक्षा टीम को और सतर्क कर दिया था। उसने चुपके से उस 'जले हुए चेहरे' वाले रहस्यमयी इंसान की तलाश शुरू कर दी थी।

खन्ना मेंशन अब केवल एक सुरक्षित किला नहीं था, बल्कि एक ऐसा घर था जहाँ विश्वासघात की राख से विश्वास का फीनिक्स पैदा हुआ था। साज़िशों का दौर शायद अभी खत्म नहीं हुआ था, लेकिन अब राधिका और आर्यन के पास वह कवच था जिसे कोई भेद नहीं सकता था—एक-दूसरे पर अटूट विश्वास और देब की अटूट वफ़ादारी।

रात के अंधेरे में, मेंशन की रोशनी अब और भी तेज़ जलती थी, जैसे वह आने वाले हर खतरे को चुनौती दे रही हो।