विश्वासघात की गहरी जड़ें
देब की बात सुनकर पाखी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। खन्ना मेंशन, जिसे वे अब तक एक सुरक्षित किला समझते थे, असल में अंदर से खोखला किया जा रहा था। देब ने तुरंत अपने भरोसेमंद गार्ड्स को बुलाया और बिना किसी को भनक लगे पूरे घर की कॉल डिटेल्स खंगालने का आदेश दिया।
"पाखी, यह बात आर्यन और राधिका को अभी पता नहीं चलनी चाहिए," देब ने गंभीर स्वर में कहा। "आज उनकी खुशियों का दिन है, मैं नहीं चाहता कि अपनों पर से उनका भरोसा उठ जाए।"
लेकिन सच्चाई को छुपाना इतना आसान नहीं था। खन्ना मेंशन की पुरानी वफादार नौकरानी, सावित्री बुआ, जो पिछले तीस सालों से इस घर का हिस्सा थीं, कोने में खड़ी यह सब सुन रही थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी शिकन थी, जो डर की थी या पछतावे की, यह कह पाना मुश्किल था।
जश्न की तैयारी और छिपी हुई आहटें
मिस्टर सिंघानिया की धमकी के बावजूद, आर्यन ने फैसला किया कि वह डर कर नहीं जिएगा। उसने उसी शाम राधिका के साथ अपनी आधिकारिक सगाई की घोषणा कर दी। पूरे मेंशन को फूलों और रोशनी से सजाया गया। राधिका ने एक गहरे नीले रंग का लहंगा पहना था, जिसमें वह किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रही थी।
आर्यन उसे देख कर मंत्रमुग्ध था। उसने राधिका के पास जाकर उसके कान में धीरे से कहा, "आज इस रोशनी में तुम उस डर को भूल जाओ जो कल रात हमारे बीच था। आज सिर्फ तुम हो और मैं हूँ।"
राधिका मुस्कुराई, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी एक अनजाना सा साया था। "आर्यन, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि कोई हमें दूर से देख रहा है?"
आर्यन ने उसका हाथ थाम लिया। "वह मेरी मोहब्बत का असर है राधिका, और कुछ नहीं।"
महफिल में ज़हर का प्याला
पार्टी अपने चरम पर थी। शहर के बड़े-बड़े लोग वहाँ मौजूद थे। तभी वेटर के भेष में एक आदमी राधिका की ओर बढ़ा और उसे एक ड्रिंक सर्व की। राधिका ने जैसे ही गिलास हाथ में लिया, देब की तेज़ नज़रें उस वेटर पर पड़ीं। देब को कुछ अजीब लगा—वह वेटर बार-बार अपने कान में लगे वायरलेस डिवाइस को छू रहा था।
"राधिका, रुको!" देब की आवाज़ हॉल में गूँजी।
सबकी निगाहें देब पर टिक गईं। देब ने तेज़ी से आकर राधिका के हाथ से गिलास ले लिया। "यह ड्रिंक किसने तैयार की?" उसने वेटर की कॉलर पकड़ते हुए पूछा।
वेटर घबरा गया और भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन आर्यन ने फुर्ती दिखाते हुए उसे बीच रास्ते में ही दबोच लिया। जब उस ड्रिंक की जाँच की गई, तो पता चला कि उसमें एक ऐसा धीमा ज़हर (Slow Poison) मिलाया गया था, जो इंसान को तुरंत नहीं मारता, बल्कि धीरे-धीरे उसके नर्वस सिस्टम को बेकार कर देता है।
असली चेहरे का बेनकाब होना
पूरे हॉल में सन्नाटा पसर गया। आर्यन का गुस्सा सातवें आसमान पर था। "किसने भेजा है तुम्हें? सिंघानिया ने?" आर्यन ने चिल्लाकर पूछा।
वेटर थर-थर कांपने लगा। "न-नहीं साहब... मुझे सिंघानिया ने नहीं, बल्कि इसी घर से किसी ने पैसे दिए थे। उन्होंने कहा था कि अगर राधिका इस घर की बहू बनी, तो जायदाद के हिस्से बदल जाएंगे।"
आर्यन और देब एक-दूसरे को देखने लगे। तभी सीढ़ियों से उतरते हुए चाचा सोमनाथ (आर्यन के सगे चाचा) के हाथ से शराब का गिलास छूटकर गिर गया। उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं।
"चाचा जी? आप?" आर्यन की आवाज़ में एक गहरा दर्द था।
सोमनाथ ने खुद को संभालने की कोशिश की, "आर्यन, यह सब झूठ है! यह लड़का झूठ बोल रहा है!"
लेकिन देब ने समीर का वह फोन निकाला और कॉल रिकॉर्डिंग प्ले कर दी। उसमें सोमनाथ की आवाज़ साफ थी—वे समीर को घर के पिछले दरवाज़े का कोड बता रहे थे और राधिका को रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे थे।
राधिका का साहस और अंतिम फैसला
सोमनाथ को लगा था कि पकड़े जाने पर वह भावनाओं का कार्ड खेलेंगे, लेकिन राधिका एक कदम आगे बढ़ी। उसकी आँखों में अब वह डरपोक लड़की नहीं, बल्कि एक शेरनी थी।
"चाचा जी, आपने रिश्तों का खून किया है। आपने सिर्फ मुझे मारने की कोशिश नहीं की, बल्कि आर्यन के उस भरोसे को मारा है जो वह आप पर करता था।" राधिका ने मुड़कर पुलिस की तरफ इशारा किया, जिन्हें देब ने पहले ही बुला लिया था।
जब पुलिस सोमनाथ को ले जा रही थी, उन्होंने आर्यन की तरफ देखकर चीखते हुए कहा, "तुम सुखी नहीं रहोगे आर्यन! यह जायदाद मेरी होनी चाहिए थी!"
एक नई प्रतिज्ञा
मेहमान जा चुके थे। मेंशन में एक बार फिर शांति थी, लेकिन यह शांति भारी थी। अपनों की गद्दारी ने आर्यन को भीतर से झकझोर दिया था। वह बालकनी की मुंडेर पर हाथ रखे खड़ा था, तभी राधिका उसके पीछे आई।
"सब कुछ खत्म हो गया आर्यन," राधिका ने धीमे से कहा।
आर्यन मुड़ा और राधिका को अपनी बाहों में भर लिया। "नहीं राधिका, सब कुछ अब शुरू हुआ है। आज मुझे समझ आया कि 'संतुलन' सिर्फ खुद पर भरोसा रखने से नहीं, बल्कि सही इंसान को पहचानने से आता है। मैंने एक दुश्मन खोया, लेकिन एक सच्चा साथी पा लिया।"
उस रात खन्ना मेंशन की रोशनी में एक कड़वा सच जलकर राख हो चुका था। आर्यन और राधिका ने एक-दूसरे का हाथ थामकर यह कसम खाई कि अब वे किसी भी बाहरी या भीतरी दुश्मन को अपनी खुशियों के बीच नहीं आने देंगे।
साजिशों का दौर शायद अभी खत्म नहीं हुआ था, क्योंकि सिंघानिया अभी भी बाहर था, लेकिन अब आर्यन अकेला नहीं था। उसके पास राधिका का साहस और देब की चतुराई थी।
उपसंहार:
सुबह की पहली किरण के साथ, आर्यन ने राधिका की हथेली पर अपनी माँ की पुरानी अंगूठी पहनाई। यह सिर्फ एक सगाई नहीं थी, बल्कि हर उस अंधेरे के खिलाफ एक जंग का ऐलान था, जिसने उनके प्यार को चुनौती दी थी। खन्ना मेंशन अब सिर्फ एक आलीशान इमारत नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका था।