आर्यन और राधिका: वह 'गलती' से हुआ हादसा
आर्यन अपने कमरे में अपनी कीमती गिटार साफ़ कर रहा था, तभी राधिका गुस्से में पैर पटकती हुई अंदर आई। उसके हाथ में आर्यन की एक महंगी सफेद टी-शर्ट थी, जिस पर अब लाल रंग के धब्बे लगे थे।
"आर्यन खन्ना! ये क्या है?" राधिका चिल्लाई।
आर्यन ने बिना नज़रें उठाए कहा, "ये मेरी टी-शर्ट है और इस पर लगा रंग शायद तुम्हारी किसी नेल पेंट का है। वैसे भी, तुम बिना परमिशन मेरे कमरे में क्या कर रही हो?"
"मैंने तुम्हारी टी-शर्ट से पोछा नहीं लगाया है! तुमने मेरी अलमारी के पास अपना गीला तौलिया फेंका था, जिसकी वजह से मेरा फोन गिर गया और उसकी स्क्रीन चटक गई!" राधिका ने टी-शर्ट उसके मुँह पर फेंकते हुए कहा।
आर्यन गिटार पटक कर खड़ा हो गया। वह राधिका से कद में काफी लंबा था, इसलिए वह उसे नीचे झुककर घूरने लगा। "सुनो 'चिटकनी', मेरा फोन गिरा होता तो मैं अब तक तुम्हें गैलरी से नीचे लटका चुका होता। शुक्र मनाओ कि मैं शरीफ हूँ।"
"तुम और शरीफ? जिस दिन तुम शरीफ हो जाओगे, उस दिन हिमालय मुम्बई में शिफ्ट हो जाएगा!" राधिका ने उसे चिढ़ाते हुए जीभ निकाली।
गुस्से में आर्यन उसे पकड़ने के लिए झपटा, "रुको तुम! आज तो तुम्हें सबक सिखाना ही पड़ेगा।"
राधिका पीछे की तरफ भागी, उसका पैर कालीन के मुड़े हुए कोने से उलझ गया। उसका संतुलन बिगड़ा और वह पीछे की ओर गिरने लगी। "आर्यन!" उसने घबराहट में चिल्लाया।
आर्यन ने फुर्ती से उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। ताकत इतनी ज़्यादा थी कि राधिका सीधा आर्यन के सीने से आकर टकराई। आर्यन का संतुलन भी डगमगाया और वे दोनों पास ही पड़े बड़े सोफे पर गिर पड़े। आर्यन नीचे था और राधिका उसके ऊपर।
सब कुछ कुछ सेकंड के लिए थम गया। गिरने के झटके और हड़बड़ाहट में, राधिका का चेहरा आर्यन के चेहरे के बिल्कुल करीब आ गया था। जैसे ही वे दोनों सँभलने की कोशिश कर रहे थे, राधिका का हाथ फिसला और वह और भी नीचे झुक गई।
उसी पल, अनजाने में, राधिका के होंठ आर्यन के होंठों से टकरा गए।
यह एक 'किस' था—पूरी तरह से गलती से हुआ, लेकिन बिजली की गति जैसा। दोनों के शरीर जैसे सुन्न हो गए। कमरे में केवल बारिश की आवाज़ थी और उन दोनों की तेज़ चलती धड़कनें। राधिका की आँखें फटी की फटी रह गईं, और आर्यन की पकड़ उसकी कमर पर मज़बूत हो गई।
कुछ पल बाद, राधिका झटके से पीछे हटी। उसका पूरा चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था। वह बिना कुछ बोले, अपने सैंडल वहीं छोड़कर कमरे से बाहर भाग गई। आर्यन वहीं सोफे पर लेटा रहा, उसका हाथ अनजाने में अपने होंठों पर गया। उसके चेहरे पर गुस्से की जगह एक धीमी, मदहोश कर देने वाली मुस्कान आ गई थी।
देब और पाखी: खामोश मोहब्बत का इज़हार
उधर, मेंशन के मास्टर बेडरूम की बालकनी में देब खड़ा था। बारिश की ठंडी फुहारें उसके चेहरे को छू रही थीं। पाखी हाथ में कॉफी के दो मग लेकर वहाँ पहुँची। उसने एक मग देब की तरफ बढ़ाया।
"नींद नहीं आ रही?" पाखी ने धीरे से पूछा।
देब ने कॉफी ली और एक घूँट भरकर पाखी की ओर देखा। "जब से तुम और राधिका इस घर में आए हो, शांति तो जैसे चली गई है... पर यह शोर बुरा नहीं लगता।"
पाखी मुस्कुराई। "आर्यन और राधिका तो जैसे टॉम एंड जेरी हैं। पर मुझे खुशी है कि राधिका अब हंस रही है।"
देब ने कॉफी का मग पास की मेज पर रखा और पाखी के करीब आया। पाखी की धड़कनें अचानक बढ़ गईं। देब ने कभी इतनी करीब आने की कोशिश नहीं की थी। उसने धीरे से पाखी के चेहरे पर आ रही एक भीगी हुई लट को उसके कान के पीछे किया।
"पाखी..." देब की आवाज़ आज पहले से कहीं ज़्यादा गहरी और नरम थी। "यह शादी एक समझौता थी, मैं जानता हूँ। पर क्या तुम्हें लगता है कि हम इस समझौते से आगे बढ़ सकते हैं?"
पाखी ने ऊपर देखा। देब की आँखों में वह पत्थर जैसी सख्ती आज नहीं थी। वहाँ एक अनकही ज़रूरत थी, एक स्वीकारोक्ति थी। "मैंने तो इस रिश्ते को उसी दिन अपना लिया था, जिस दिन आपने मेरी बहन के लिए बिना सोचे अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।"
देब ने पाखी का हाथ अपने हाथों में लिया। उसके हाथों की गर्मी पाखी के रोम-रोम में समा गई। देब धीरे से झुका और अपना माथा पाखी के माथे से टिका दिया। बारिश की बूँदें उन दोनों के बीच एक पर्दा बना रही थीं।
"मैं ज़्यादा बातें करना नहीं जानता, पाखी। पर इतना वादा करता हूँ, कि अब से तुम इस घर की सिर्फ 'मालकिन' नहीं, मेरी ज़िंदगी का हिस्सा हो," देब ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने पाखी की कमर में हाथ डालकर उसे धीरे से अपनी ओर खींचा और उसके माथे पर एक लंबा और रूहानी चुंबन (Kiss) अंकित कर दिया। यह चुंबन आर्यन और राधिका की तरह बेचैन नहीं था, बल्कि इसमें एक सुरक्षा थी, एक सुकून था। पाखी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर देब के चौड़े सीने पर रख दिया।
आधी रात का सन्नाटा और एक नया अहसास
रात के 2:00 बज रहे थे। राधिका अपने कमरे में बिस्तर पर करवटें बदल रही थी। उसे बार-बार वही 'गलती वाला किस' याद आ रहा था। "पागल है वो आर्यन! और मैं भी... मैंने उसे धक्का क्यों नहीं दिया?" उसने तकिये में मुँह छिपा लिया।
तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया।
आर्यन: "मिस तूफान, नींद नहीं आ रही क्या? वैसे, तुम्हारी लिपस्टिक का टेस्ट बहुत खराब है, अगली बार कोई अच्छा फ्लेवर ट्राई करना। 😉"
राधिका ने मैसेज पढ़ा और गुस्से में फोन फेंक दिया, पर उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जिसे वह खुद से भी नहीं छुपा सकती थी। उसने टाइप किया: "अपनी शक्ल देखी है? और अगली बार कोई नहीं होने वाला, मिस्टर बंदर!"
उधर आर्यन अपने कमरे में लेटा फोन देख रहा था। उसने मैसेज पढ़ा और खिलखिलाकर हँस पड़ा। खन्ना मेंशन में अब केवल दुश्मनी नहीं थी, बल्कि दो अलग-अलग कोनों में दो खूबसूरत कहानियाँ जन्म ले रही थीं। एक तरफ मैच्योरिटी और गहराई थी, तो दूसरी तरफ चुलबुलापन और नई-नई जागी धड़कनें।
लेकिन खिड़की के बाहर, अंधेरे में खड़ी एक गाड़ी और उसमें बैठा वह शख्स, जिसकी नज़रें राधिका के कमरे पर टिकी थीं, यह बता रहा था कि यह खुशियाँ अभी खतरे में हैं।