Inteqam - 34 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 34

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इंतेक़ाम - भाग 34

वही निशा ने विजय के बारे में और पूछताछ की तो डॉक्टर ने कहा कि ऐसे के केसों के मामले में अधिकतर तो कुछ नहीं हो पाता लेकिन अगर भगवान चाहे तो विजय पहले की तरह ठीक हो सकता है ऐसे केसों में 99 परसेंट ठीक नहीं हो पाते लेकिन एक परसेंट कई लोगों के चांस बने भी है,,,,

यह सुनकर निशा बोली कि डॉक्टर आपके कहने के हिसाब से यह नामुमकिन नहीं मुमकिन है और मैं इसे मुमकिन करने के लिए जी-जान से कोशिश करूंगी,,,,

क्या मैं विजय को अपने साथ अपने घर ले जा सकती हूं,,,,

यह सुनकर डॉक्टर ने निशा को कुछ जरूरी बातें बताकर और कुछ जरूरी दवा देकर विजय को अपने साथ ले जाने की परमिशन दे दी,,,,



निशा अस्पताल से विजय को अपने साथ अपने घर ले आई, विजय को देखकर गुनगुन तो अपने पापा को नहीं पहचान पाई थी, लेकिन दीपू अपने पापा को पहचान गया और बोला मम्मा यह है पापा है ना,,,,,

यह सुनकर निशा ने कहा हां बेटा,,,,,

तब दीपू बोला लेकिन मम्मा पापा तो बहुत बुरे हैं फिर आप इन्हें यहां क्यों लेकर आए हो,,,,,

यह सुनकर निशा बोली नहीं बेटा पापा बुरे नहीं है,,,,

नहीं पापा बुरे हैं आज तक पापा हमसे कभी मिलने भी नहीं आए,,,,,

यह सुनकर निशा गुस्से में बोली दीपू फालतू बकवास मत करो और अंदर जाकर अपनी पढ़ाई करो,,,,

अपनी मम्मा की डांट पढ़ते ही दीपू वहां से गुस्से में चला गया, यह देखकर विजय सोचने लगा कि आज उसकी हरकतों की वजह से उसके बच्चे भी उससे नफरत करते हैं ए भगवान मुझे एक बार मौका दे दे मैं मैं हर वह गलती सुधार लूंगा जो मैंने की है यह सोचते हुए विजय की आंखों में आंसू आ गए, अभी उसमें इतनी ताकत नहीं थी कि वह कुछ बोल सके उसका शरीर तो पहले ही बेजान पड़ा था,,,,

तभी वहां सन्नो आ गई, सन्नू को देखकर निशा बोली तुम सन्नो,,,

सन्नो बोली हां वह तुम दो-तीन दिन से ज्यादा परेशान थी ना, इसलिए सोचा कि कहीं तुम्हारी तबीयत तो खराब नहीं है मैंने तुम्हारे पास कॉल किया था लेकिन तुमने नहीं उठाया इसलिए मैंने सोचा कि मैं तुम्हारे पास जाकर ही देख लूं ,,,

यह सुनकर निशा बोली नहीं सन्नू मैं बिल्कुल ठीक हूं,,,,,

तभी शन्नो की नजर बे हिल चेयर चेयर पर बैठे विजय पर पड़ी, उसे देखकर सन्नो हैरानी से निशा की तरफ देखते हुए बोली निशा यह कौन है,,,,,,

यह सुनकर निशा बोली सन्नो यह है विजय है मैंने तुम्हें बताया था ना कि विजय अस्पताल में है उसका एक्सीडेंट हो गया,,,,

तब सन्नो बोली निशा इसने तुम्हारे साथ कितना कुछ किया  फिर भी तुम इसे अपने साथ क्यों लाई हो और इसकी अपने बीवी रोमी वह कहां है वह इसे अपने साथ नहीं ले गई क्या,,,,,

यह सुनकर निशा ने सारी बात सन्नो को बता दी, तब सन्नो गुस्से में बोली अरे ऐसी लड़कियां आखिर में ऐसे ही करती है उन्हें अपने पराए का कुछ फर्क नहीं होता उन्हें सिर्फ पैसों से प्यार होता है सिर्फ पैसों से लेकिन निशा तुम्हें याद है ना कि इस विजय ने तुम्हारे साथ कितना कुछ किया है,,,,,,

यह सुनकर निशा धीरे से बोली सब याद है लेकिन अब मैं उन बातों को याद नहीं करना चाहती अब मैं हमेशा यह  कोशिश करती हूं कि विजय को हर वह खुशी दे सकूं जिससे उसे भी खुशी मिले और वह जल्दी ही ठीक हो जाए, क्योंकि सन्नो चाहे जैसे भी हो लेकिन विजय की इस हालत के जिम्मेदार मैं हूं,,,,,

यह कहते हुए निशा काफी उदास हो गई, तब सन्नो बोली लेकिन निशा,,,,,

तब निशा बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोली सनों मैं जानती हूं तुम क्या कहना चाहती हो लेकिन चाहे जैसे भी लेकिन विजय मेरा पति है और कभी ना कभी तो मैंने उससे प्यार किया था,,,,,,

यह सुनकर सन्नो निशा के कंधे पर हाथ रखते ही बोली तू महान है मेरी बहन तूने आज इस हालत में भी अपने पति को अपनाया है और तू कहती है ना कि तुमने कभी विजय से प्यार किया था लेकिन सच तो यह है कि तुम्हारी आंखों में अब भी उसके लिए प्यार है,,,,,

यह कहकर सन्नो बोली निशा विजय तो बड़ा खुशकिस्मत था जिसे तुम जैसी बीवी मिली लेकिन पैसों के लालच में इसने तुम्हें ठुकरा दिया,,,,

तब सनों का फोन बज उठा और वह बोली ठीक है निशा मुझे कुछ जरूरी काम है और मैं चलती हूं,  कहकर सन्नो संगीता वहां से चली गई,,,,,