तभी निशा की नजर भी विजय और रोमी पर पड़ी फिर निशा ने गुस्से से अपनी नजर दूसरी तरफ कर ली और उद्घाटन के बाद कमेटी अध्यक्ष ने निशा से निवेदन किया कि वह कुछ दो शब्द बोल कर आश्रम की महिलाओं की हौसला अफजाई करें,,,,कमेटी अध्यक्ष के विनती करने पर निशा ने अपने हाथ में माइक लिया, उसने एक बार गुस्से से विजय और रोमी की तरफ देखा और वहां उपस्थित सभी विधवा बेसहारा बेबस लाचार औरतों से कहा कि जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव आते हैं कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहां हमें कोई रास्ता नजर नहीं आता उस वक्त हमें लगता है की अगर हम अपनी जिंदगी ही खत्म कर ले तो ठीक है, लेकिन कभी अपनी जिंदगी में हार मत मानना कभी यह मत सोचना कि अब उनकी जीने की चाह खत्म हो गई है अगर भगवान एक रास्ता बंद करता है तो जीने के लिए कहीं रास्ता खोल देता है, हमेशा अपने आप को कमजोर मत समझो कभी यह मत सोचो कि मैं औरत हूं कुछ नहीं कर सकूंगी,,,,,एक इतिहास गवाह है कि कहीं औरतों ने इतिहास रचा है इसलिए अबला नहीं सबला बनो तुम नारी नहीं काली का रूप हो अपनी शक्ति को पहचानो और अपने अंदर कि जीने की चाह को खत्म ना कर अपने जीने की चाह को जगाओ,,,,,,अगर आज हमारी जिंदगी में दुख है तकलीफ है तो उसके लिए भगवान को कौसो मत उसे धन्यवाद करो क्योंकि यह वही दुख तकलीफ होती है जिससे अपने और पराए की पहचान होती है,,,,,यह कहते हुए निशा ने एक बार फिर गुस्से से विजय और रोमी की तरफ देखा विजय ने शर्म से अपनी आंखें नीचे कर ली,,,तब निशा ने फिर कहा कि जब समय और हालात कमजोर होते हैं ना तो अपने ही नजर फेर लेते हैं किसी के ऊपर निर्भर नहीं आत्मनिर्भर बनो, अपना रास्ता खुद चुनो और बिना संकोच के आगे बढ़ो मंजिल तो खुद ब खुद मिल जाएगी,,,, कभी अपने आप को कमजोर मत समझो एक छोटी सी चींटी भी हाथी की नाक में दम कर देती है अपने आप को दूसरों से मत तोलो तुम अपने आप में श्रेष्ठ हो यह समझो,,,,,अगर हमें रास्ते में ठोकर नहीं लगेगी तो हमें मंजिल की अहमियत कैसे पता लगेगी ,अगर मुसीबतों से अकेले हम खुद नहीं लड़ेंगे तो अपनी शक्ति को कैसे पहचानेंगे,, अपना इतिहास खुद रचो अपनी कहानी खुद बनाओ जीने के लिए जिंदगी मत बनाओ बलिक जिंदगी खुलकर जीने के लिए जियो हमेशा आगे बढ़ो और जीने की चाहत जगाओ,,,,निशा के शब्दों को सुनकर चारों तरफ तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी सभी महिलाओं के चेहरे पर अब अपनी जिंदगी जीने का जज्बा और आगे बढ़ने का हौसला था,,,,,तब निशा ने फिर सबसे अभिवादन किया और माइक वापस कमेटी अध्यक्ष को देते हुए बोली हाथ जोड़कर कहा कि अब मुझे निकलना होगा मुझे कुछ इंपोर्टेंट काम है,,,,,यह कहकर वह वहां से जाने के लिए अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गई,,,,तभी विजय ने उसे पीछे से आवाज लगाई आवाज सुनकर निशा पीछे की तरफ मुड़ी, तभी विजय वहां आया और बोला निशा,,, निशा,,,,,,यह सुनकर निशा ने ऐसे भाव बनाए जैसे वह विजय को जानते ही नहीं हो और फिर वह गुस्से में बोली कि आप कौन मैंने आपको पहचाना नहीं,,,,यह सुनकर विजय बोला निशा मैं जानता हूं कि तुम मुझसे गुस्सा हो लेकिन मुझे तुमसे सिर्फ 2 मिनट बातें करनी है,,,,यह सुनकर निशा गुस्से में बोली मिस्टर मुझे कुछ जरूरी काम है और मुझे जाना है,,,,यह कहकर वह गाड़ी में बैठ गई और ड्राइवर को गाड़ी चलाने का आदेश दिया, विजय कुछ और कह पाता उससे पहले ही धूल उड़ाती हुई निशा की गाड़ी वहां से चली गई, विजय बेबस लाचार था उसे जाते हुए देखता रहा,,,, आते समय सारे रास्ते विजय इसी उधेड़बुन में रहा कि निशा यहां कैसे,,,,रोमी को भी निशा को देखकर हैरानी हो रही थी कि कि निशा इतने मुकाम पर कैसे पहुंच सकती है, तभी वह विजय को सुनाते हुए बोली कि हो सकता है तुम्हारी उस एक्स वाइफ ने किसी करोड़पति को अपने जाल में फंसा कर शादी कर ली हो,,,,अरे सुना है कि उस कंपनी के एक पार्टनर का नाम सुनील दत्त है और सुनील दत्त की बीवी की पहले ही मौत हो चुकी है मुझे तो लगता है तुम्हारी उस एक्स बाइप ने उस सुनील दत्त से शादी कर उसकी कंपनी की मालकिन बन बैठी हो,,,,,लेकिन विजय ने कोई जवाब नहीं दिया उसे रोमी की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,,,निशा वापिस ऑफिस आकर अपने कामों में लग गई लेकिन उसका मन नहीं लग रहा था,,,,,आज 4 साल बाद उसकी विजय से जो मुलाकात हुई थी आज भी उसके दिल में कहीं विजय के लिए इज्जत और प्यार था, लेकिन विजय ने जो कुछ भी उसके साथ किया था,,,,यह सोचकर ही उस को गुस्सा आने लगता और विजय के प्रति उसके दिल में नफरत बढ़ जाती और आज इसी नफरत के चलते उसने विजय के साथ ऐसा व्यवहार किया था,,,,उसने अपने आंसू को रोकने की नाकामयाब कोशिश की लेकिन आंसू उसकी आंखों से निकल ही आए, जब उस पर बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह सन्नू से यह बोलकर कि उसकी तबीयत आज कुछ ठीक नहीं घर आ गई,,,,,आज 4 सालों बाद उसके दिमाग में फिर से पिछली यादें ताजा हो गई ,वह जितना दूर उनसे जाने की कोशिश कर रही थी वह यादें बार-बार उसे अपने पास बुला रही थी, वह पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहती थी लेकिन वह यादें उसे आगे भी कहां बढ़ने दे रही थी,,,,,निशा अकेले में फूट-फूटकर रोई फिर उसने अपने आप को संभाला और अपने आप से कहा नहीं मैं पीछे मुड़कर कभी नहीं देखूंगी, जिस इंसान ने मेरे बच्चों और मेरी कभी कदर नहीं की उस इंसान कि अब मेरी जिंदगी में कोई जगह नहीं है और ना ही कभी होगी,,,,,यह सोचकर उसका चेहरा गुस्से से तमतमाने लगा और उसने आंसू पहुंच लिए और कहा बहुत रो ली में लेकिन अब नहीं,,,,