HUM PHIR SE MILE MAGAR ISS TARHA - 7 in Hindi Love Stories by MASHAALLHA KHAN books and stories PDF | हम फिर से मिले मगर इस तरह - 7

Featured Books
Categories
Share

हम फिर से मिले मगर इस तरह - 7

💓हम फिर से मिले मगर इस तरह💓
🌹{एपीसोड़ - 7}🌹
🌟(((((((बेक स्टोरी )))))))🌟
आरुषि एक बहुत खुबसुरत समझदार आर्कषक लड़की थी 
उसके बात करने का तरीका बहुत ही सहज और दिल को छू ले जाने वाला था वो जितनी खुबसुरत थी उसका दिल भी उतना ही खुबसुरत था वो कालेज की सबसे मशहूर और खूबसूरत लड़की थी,कालेज के कितने ही लड़के उस पर लट्टू हो चुके थे वह उसके लिए जान देने तक के लिए तैय्यार थे, मगर वह कभी किसी को घास तक नही डालती थी .

अरुण भी कालेज का मशहूर केरेक्टर था वह गुड लुकिंग हैंडसम , टोल फेयर एंड गेरेट डेरेसिंग सेंस का मालिक था, उसके पिछे भी लड़कियो की लाइने लगी थी मगर उसने चूना आरुषि को इस लिये नही की वो खुबसुरत और एक दिलकश लड़की थी, इस लिए कि वह एक अच्छे दिल की मालिक थी, दोनो के बीच मौहब्बत का ये सिलसिला कोलेज के पहले महिने से ही शुरू हो गया था और कॉलेज के आखिरी दिनो तक रहा .

दोनो एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे, अरुण आरुषि को बहुत चाहने लगा था,उसकी हर जरूरत हर खवाहिश पुरी करता था, हालाकि वह कोई बड़े परिवार से नही था, मगर फिर भी आरुषि को खुश रखने के लिए कोई कसर नही छोड़ता था, दोनो हर विकेंड पर साथ मे ही काफी वक्त बिताते थे वह दोनो उस पल को बड़े ही खुबसुरत तरीके से जी रहे थे, दोनो को उस वक्त किसी की भी परवाह नही थी, इसलिए कॉलेज मे दोनो के ही ज्यादा दोस्त नही बने, वह दोनो बस अपनी पढ़ाई और एक दूसरे मे ही खुश थे .

आरुषि को एकटिंग, डानसिंग,मोडलिंग मे दिलचपी थी तो वह कॉलेज के प्रोग्रामो मे हिस्सा लेती थी,और हमेशा फस्ट प्राइज हासिल करती थी, अरुण को उससे कोई प्रोबलम नही थी वह हमेशा उसका साथ देता था मगर आरुषि को धीरे धीरे इस चीज का नशा सा होने लगा था उसने कॉलेज के दिनो से ही एकटिंग के लिए ओडिशन देना शुरू कर दिये थे और एक दिन स्लेक्ट भी हो गई थी उसे अपना पहला शो मिल गया था,और तब शुरू हुई उनके बीच दूरिया बड़ने की शुरुआत .

कॉलेज के आखरी साल मे आरुषि का कॉलेज आना भी कम हो गया था, वह हमेशा अपने एक्टिंग करियर मे बीजी रहने लगी, और अरुण से उसका मिलना कम हो गया, जिसके कारण अरुण कॉलेज मे ज्यादा तर अकेला ही वक्त बिताता था उसके कॉलेज मे कोई दोस्त वगेरा नही थे जिसका कारण आरुषि और उसका प्यार था वह एक दूसरे के अलावा किसी को वक्त नही देते थे, अरुण ने तभी से सिगरेट पीना शुरू कर दिया था वैसे उसे उस वक्त किसी तरह की कोई लत नही थी, मगर आरुषि के यू दूर-दूर रहने से उसे वक्त ना देने से वह उदास रहता था, और कॉलेज के एक कोने मे अकेला बैठा रहता था .

तब उसके करीब रुपाली आयी थी वैसे तो दोनो एक दूसरे को अच्छे से जानते थे, दोनो एक ही क्लास मे जो थे, मगर कभी इतना करीब नही थे, दोनो के बीच बस हाये, हेलो होती थी,रुपाली को अरुण का यू अकेले उदास रहना अच्छा नही लगा, तो वह किसी ना किसी बहाने उसके पास आने लगी,कभी रूपाली अरुण की कोई मदद कर देती थी कभी अरुण रूपाली की मदद कर देता था, इस तरह दोनो के बीच दोस्ती का रिस्ता बन गया,

रुपाली कॉलेज मे एक अलग ही केरेक्टर थी उसका ज्यादातर स्टूडंट मजाक बनाते थे उसके शरीर, उसके लुक्स और उसके अजीब डरेसिंग सेंस को देखकर, उसे कददू कहकर पुकारते थे, पर अरुण ऐसा नही था उसने उसका कभी मजाक नही बनाया,बल्कि वह हमेशा दूसरो को रोकता था उसका मजाक बनाने से,और उसकी रिस्पेक्ट करता था वो जैसी भी है,और उसे कहता भी था तुम जैसी भी हो बहुत अच्छी तुम बेशक हम सबसे अलग दिखती हो मगर तुम भी एक खुबसुरत लड़की हो तुम्हे खुद की रिस्पेक्ट करनी चाहिए,

ये ही बात रुपाली के दिल मे जगाह कर गई थी वह अरुण को पसंद करने लगी थी,वह हमेशा उसकी मदद कर देती थी,वह अब कॉलेज मे अरुण के ही साथ ज्यादा वक्त बिताती थी,आरुषि को रूपाली से कोई प्रोबलम नही थी, वो जानती थी अरुण जैसा हैंडसम समार्ट गुड लुकिंग बंदा रुपाली जैसी डबल शरीर की लड़की को कभी पसंद नही करेगा, वह बस अपने माडलिंग और एकटिंग के करीयर पर ही ध्यान दे रही थी उसे कोई वरवाह नही थी अरुण क्या करे .

रुपाली और अरुण की दोस्ती बहुत गहरी हो चूकि थी, रूपाली तो अरुण को धीरे धीरे प्यार करने लगी थी, रुपाली के होने से अरुण का अकेला पन तो दूर हो गया था, मगर अरुण सिर्फ आरुषि को ही चाहता था, हा उसके दिल मे रुपाली के लिए इज्जत और दोस्ती जैसे भाव थे, जिसके कारण वह अपने दिल की कई बाते उसे बताता था, उन दोनो के बीच ज्यादा तर आरुषि को लेकर ही बाते होती थी, वह रुपाली से आरुषि के करीब रहेने देने की सलाह मांगता था,और रुपाली भी उसे कही अच्छी सलाह देती थी जिससे उसे फायेदा ही होता था.

अरुण अब रूपाली के साथ काफी खुश रहने लगा था आरुषि का उसे टाईम ना देना काफी परेशान करता था मगर रुपाली के साथ उसका कॉलेज का वक्त अच्छा गुजरता था,रूपाली की लम्बी लम्बी बाते, उसका मजाकिया अंदाज, उसका उसे सलाह देने को वह बहुत इंजोय कर रहा था, यहा तक कि वह उसके माता पिता से भी मिला था, रूपाली खाने की बहुत शोकीन थी तो वह उसे कभी कभी बाहर रेस्टोरेंट वगेरा मे खाना खिलाने ले जाता था, आरुषि इस बात को भी इगनोर कर देती थी, वह बस अपने करियर पर ही फोकस कर रही थी, जो अरुण को नागवार गुजर रहा था .

कहानी जारी है......✍️