*अदाकारा 54*
उर्मिला दरवाज़े की ओर दौड़ी।
उर्मिला को दरवाज़े की ओर दौड़ता देख वह व्यक्ति सतर्क हो गया।उसने जंप मारकर दौड़ती हुई उर्मिला के दोनों पैरों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिये।और उर्मिला ज़मीन पर औंधे मुँह गिर पड़ी।उसकी नाक से चोट लगने की वजह से खून बहने लगा।औंधे मुंह गिरने से उसके होंठ भी फट गए।दर्द के मारे वह चीत्कार उठी।
काले कपड़े वाला व्यक्ति स्फूर्ति से ज़मीन से उठा और उर्मिला को अपने दोनों हाथोंसे फूलो की तरह उठाकर सोफ़े पर पटक दिया।
"रानी।तेरी कोई भी ताकत या होशियारी मेरे आगे नहीं चलेगी समझी?अब ये बताओ की तुम अपने कपड़े खुद उतारोगी या मैं फाड़ना शुरू कर दूँ?"
जवाब में उर्मिला ने पूरी ताकत से उस व्यक्ति के चेहरे पर थूका।थूक के साथ उसके फटे हुए होंठों से खून भी उड़कर उस व्यक्ति के चेहरे पर आ गिरा।
"छी.ई.गंदी औरत..."
उस व्यक्तिने पहले तो मुँह बिगाड़ा।
और फिर गुस्से में उसने उर्मिला की कुर्ती के गले में हाथ डाला और एक ही झटके में कुर्ती फाड़ दी।कुर्ती के फटने से कुर्ती के अंदर उर्मिलाने जो गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी उस ब्रा से बाहर झांकता उर्मिला का यौवन उस व्यक्ति की नज़रो मे पड़ा।और वह ओर ज्यादा बेसब्र हो गया।
उर्मिलाने चीखने के लिए मुँह खोला ही था कि उस व्यक्ति ने पूरी ताकत से उसके चेहरे पर अपनी हथेली दबा दी।उर्मिला की चीख उसके गले में ही घुट कर रह गई।
"अब इस कुर्ती का इस्तेमाल कौन ओर कैसे करेगा?अगर तुने इसे अपने हाथों से उतार दिया होता तो तेरा क्या जाता?"
वह फिर शांत स्वर में बोला।
और इतना कहकर वह उर्मिला के चेहरे की ओर झुक गया।
उर्मिलाने भी देखा कि अब उसकी इज़्ज़त और जान दोनों ही खतरे में हैं।इसलिए उसने दोनों को बचाने की भरपूर कोशिश की।सोफ़े के पास मेज़ पर एक फूलदानी रखी थी।उसने उसे उठाया और उसके चेहरे पर झुकते हुवे उस आदमी के सिर पर ज़ोर से दे मारा।लेकिन वो निशाना चूक गई और फूलदान सिर की बजाय उस शख्स के ललाट पर लगी।
उस आदमी के ललाट से खून बहने लगा। उसने उर्मिला के मुंह पर रखी हथेली हटाकर अपने कपाल पर लगाई।ओर फिर उसने अपनी हथेली की ओर देखा तो उसकी हथेली खून से लाल हो गई थी।और जैसे ही उसने अपनी हथेली उर्मिला के मुंहसे हटाई
उर्मिला ज़ोर से चीख पड़ी।
"हेल्प...हेल"
लेकिन उस आदमी ने उसे दूसरा मौका नहीं दिया।
"हरामजादी...."
कहते हुवे उसने उर्मिला को एक गाली दी।
अपने माथे का खून हथेली पर देखकर उसका अपना खून खौल उठा था।उर्मिला को भोगने की जो उसकी लालसा थी वो अब खत्म हो गई।खुन्नस उसके दिलो दिमाग पर सवार हो गया।दाँत पीसते हुए उसने पूरी ताकत से अपने दोनों हाथों से उर्मिला का गला भींच दिया।उर्मिला की दोनों आँखें उसकी आँखों के गड्ढों से बाहर निकल आई।
उसकी जीभ मुँह से बाहर निकलकर लटक गई।और उसके अंग शिथिल हो गए।उर्मिला की साँसें रुक गईं।ओर वह बेजान हो गई।
बृजेशने घड़ी देखी और पाया कि ग्यारह बज चुके थे।वह अपनी कुर्सी से उठा और जयसूर्या से बोला।
"चलो जयसूर्या भाई आज की ड्यूटी हमारी खतम हुई।अब कल मिलते हैं।"
"ठीक है,साहब।"
बृजेशने अभी कदम उठाया ही था कि उसका फ़ोन बजने लगा।
सामने पाटिल की डरी हुई आवाज़ थी जिसे शर्मिला पर जासूसी करने के लिए रखा गया था।
"साहब...साहब...लगता है शर्मिला के फ़्लैट में कुछ तो हुआ है।"
"क्या...क्या हुआ है?"
बृजेश की आवाज़ फट गई।
जवाब देने के बजाय पाटिल बोला।
"साहब...आप जल्द से जल्द यहाँ आजाईएँ।"
बृजेशने जयसूर्या से कहा।
"जयसूर्या भाई जल्दी से दो कांस्टेबल ले लो। हमें शर्मिला के फ़्लैट पर जाना है।"
"क्या...क्या हुआ है साहब?"
जयसूर्या ने ऊँची आवाज़ में पूछा।
"पाटिल ने फ़ोन किया था।वहाँ ज़रूर कुछ गड़बड़ हुई है।लेकिन क्या हुआ है यह तो वहाँ जाकर ही पता चलेगा।"
जब वे पुलिस जीप से वहाँ पहुँचे तो शर्मिला के फ़्लैट के सामने काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी।
और उसी समय शर्मिला बुर्का पहने हुए उर्मिला की टू व्हीलर पर वहाँ पहुँची।उसने दूर से ही देखा कि उसके फ़्लैट के सामने भीड़ जमा हुई हे।तो उसके मनमें कुछ बुरा होने की आशंका हुई।उसकी छाती तेज़ी से धड़कने लगी।वह उर्मिला के साथ क्या हुआ होगा उसे लेकर चिंतित थी।लेकिन इस वक्त अपने ही फ़्लैट में जाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी।ओर उसे वहाँ ज़्यादा देर तक खड़े रहना भी उचित नहीं लगा।
वह यू-टर्न लेकर वहाँ से निकलने की सोच ही रहा थी कि तभी काले कपड़े वाला व्यक्ति उसके स्कूटर के पास से दौड़ता हुआ निकला और सामने वाली गली के अँधेरे में गायब हो गया।लेकिन भागते समय उसके हाथ से कुछ शर्मिला के स्कूटर के पास गिर गया।
(उस हत्यारे के हाथ से क्या छूटा?आखिरकार उसने उर्मिला की हत्या क्यों की? जानने के लिए अगला एपिसोड पढ़ें)