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🏙️ भाग 1: एक नया शहर, एक नया पता
अयान और मिहिका अब पेरिस में साथ हैं — एक छोटा सा अपार्टमेंट, दो खिड़कियाँ, और एक दीवार जहाँ मिहिका ने पहली स्केच बनाई थी।
अयान ने कहा:
> “अब ये दीवार सिर्फ तुम्हारी नहीं… हमारी है।”
मिहिका मुस्कराई —
> “और ये शाम अब सिर्फ एक एहसास नहीं… एक घर बन चुकी है।”
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🖼️ भाग 2: दीवारों की भाषा
मिहिका ने घर की दीवारों पर स्केच बनाना शुरू किया —
- एक दीवार पर सूरज
- दूसरी पर एक खुला दरवाज़ा
- तीसरी पर एक लड़की जो किताब पढ़ रही है
अयान ने कहा:
> “तुम्हारी दीवारें बोलती हैं… और मैं हर रोज़ उन्हें पढ़ता हूँ।”
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📷 भाग 3: अयान की नई भूमिका
अयान को एक थिएटर कंपनी में निर्देशक की भूमिका मिली — लेकिन काम ज़्यादा था, और वक्त कम।
वो देर रात लौटता, थका हुआ — और मिहिका उसे कॉफी देती, मुस्कराहट के साथ।
लेकिन धीरे-धीरे, दीवारों पर रंग फीके पड़ने लगे — और खामोशी बढ़ने लगी।
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💬 भाग 4: वो पुरानी याद
एक दिन मिहिका को एक मेल मिला — भारत से, उसकी माँ की पुरानी दोस्त से।
> “तुम्हारी माँ की डायरी मिली है — उसमें तुम्हारे लिए कुछ लिखा है।”
मिहिका चौंक गई — उसने माँ को खो दिया था जब वो 16 की थी।
वो डायरी मंगवाई — और उसमें एक पन्ना था:
> “अगर कभी तुम्हें लगे कि मोहब्बत घर बन सकती है… तो उसे दीवारों से नहीं, दिल से सजाना।”
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🕊️ भाग 5: टकराहट
अयान और मिहिका के बीच अब छोटी-छोटी बातें बड़ी होने लगी थीं।
- अयान की थकान
- मिहिका की चुप्पी
- और वो दीवारें जो अब बोलती नहीं थीं
एक रात अयान ने कहा:
> “क्या हम सिर्फ एक शाम थे?”
मिहिका जवाब नहीं दे पाई — सिर्फ आँसू थे।
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🎨 भाग 6: दीवार पर एक दरार
मिहिका ने एक नई स्केच बनाई — लेकिन दीवार पर एक दरार थी।
उसने उस दरार को नहीं छुपाया — बल्कि उसमें एक पौधा उगाया।
नीचे लिखा:
> “अगर दरार में भी कुछ उग सके… तो मोहब्बत ज़िंदा है।”
अयान ने वो देखा — और पहली बार, बिना कहे माफ़ी माँगी।
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🌌 भाग 7: समापन की शाम
एक शाम दोनों छत पर बैठे — चुपचाप।
मिहिका ने कहा:
> “मैंने तुम्हें घर नहीं दिया… मैंने तुम्हें दीवारें दीं।”
अयान बोला:
> “और मैंने उन्हें समझने में देर कर दी।”
वो दोनों एक-दूसरे की तरफ देखे — और पहली बार, कोई वादा नहीं… सिर्फ एक समझ।
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🏡 भाग 8: एक सुबह, एक सवाल
पेरिस की एक सर्द सुबह — मिहिका खिड़की के पास बैठी थी, कॉफी के साथ।
अयान ने अचानक पूछा:
> “अगर मैं कहूँ कि हम इस रिश्ते को नाम दें… तो?”
मिहिका चौंकी — उसने कहा:
> “नाम से क्या बदल जाएगा?”
अयान बोला:
> “शायद कुछ नहीं… लेकिन शायद सब कुछ।”
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📜 भाग 9: दस्तावेज़ और दिल
अयान ने एक शादी का प्रस्ताव रखा — एक सादा सा रजिस्ट्रेशन, कोई तामझाम नहीं।
मिहिका उलझ गई —
- क्या वो तैयार थी?
- क्या उसकी कला, उसकी आज़ादी, इस रिश्ते में समा पाएगी?
उसने माँ की डायरी फिर से खोली —
> “अगर कोई तुम्हें समझे बिना तुम्हारा नाम लेना चाहे… तो रुक जाना।”
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🖌️ भाग 10: एक स्केच, एक जवाब
मिहिका ने एक नई स्केच बनाई —
- दो पेड़
- एक पुल
- और बीच में एक नाम — “हम”
उसने अयान से कहा:
> “अगर हम एक नाम बन सकें… तो मैं तैयार हूँ।”
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💍 भाग 11: एक अनोखी शादी
कोई मंडप नहीं, कोई घुड़चढ़ी नहीं —
बस एक दीवार, एक स्केच, और दो दस्तखत।
मिहिका ने कहा:
> “ये शादी नहीं… ये समझ है।”
अयान बोला:
> “और ये नाम नहीं… ये हम हैं।”
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🎶 भाग 12: संगीत की शाम
शादी के बाद दोनों ने एक छोटी सी पार्टी रखी —
- मिहिका ने गिटार बजाया
- अयान ने एक मोनोलॉग पढ़ा:
> “नाम वो नहीं जो दस्तावेज़ों में हो… नाम वो है जो दिल पुकारे।”
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🌌 भाग 6: समापन
रात को दोनों छत पर थे —
मिहिका ने पूछा:
> “अब आगे क्या?”
अयान ने कहा:
> “अब हम वो शाम नहीं… वो सुबह हैं, जो हर दिन साथ उगती है।”
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Writer: Rekha Rani