नागमणि – भाग 8✍️ लेखक – विजय शर्मा एरीप्रस्तावनाप्रिय पाठकों, नागमणि की अब तक की यात्रा में आपने देखा कि किस तरह राजपुर गाँव के साधारण से युवक अर्जुन की ज़िंदगी एक रहस्यमय मोड़ ले लेती है। नागिन चंपा और साधु महात्मा भैरवनाथ के बीच चल रही अदृश्य जंग धीरे-धीरे पूरे गाँव को अपने शिकंजे में ले रही है। अर्जुन अब जान चुका है कि वह नागवंश की रक्षा करने वाले वीरों की अंतिम कड़ी है। नागमणि के रहस्य को पाने के लिए हर कोई अपने-अपने जाल बुन रहा है।अब कहानी का नया अध्याय शुरू होता है – नागमणि भाग 8, जिसमें रहस्य और रोमांच और गहराता है।भाग 8 : अंधकार का खेल१. भैरवनाथ की गुफा मेंरात का सन्नाटा था। दूर जंगल में बैठे उल्लू की आवाज़ गूँज रही थी। गुफा में बैठे भैरवनाथ ने अपनी लाल आँखें खोलीं। उसके सामने जलती धूनी से उठता धुआँ नाग के आकार में घूम रहा था।भैरवनाथ बड़बड़ाया –“बस एक कदम और… नागमणि मेरी होगी। तब सारी सिद्धियाँ मेरे चरणों में नतमस्तक होंगी।”उसके चेले काँपते हुए बोले –“गुरुदेव, अर्जुन और वह नागिन चंपा अब भी हमारे रास्ते में दीवार बने खड़े हैं।”भैरवनाथ की हँसी गूँजी –“दीवार? मैं दीवारों को राख कर देता हूँ। बस देखना, जल्द ही अर्जुन का दिल खुद मुझे नागमणि तक ले आएगा।”२. अर्जुन का सपनागाँव में दूसरी ओर अर्जुन गहरी नींद में था। लेकिन अचानक उसे अजीब सपना आया। उसने देखा कि एक सुनहरी रोशनी से चमकती नागमणि उसके हाथों में है। तभी एक काली छाया आती है और नागमणि छीन लेती है। अर्जुन चिल्लाया –“नहीं… ये मेरा कर्तव्य है… मैं इसे खो नहीं सकता।”चंपा ने अर्जुन को झकझोर कर उठाया –“क्या हुआ अर्जुन? फिर से वही डरावना सपना?”अर्जुन ने माथे से पसीना पोंछते हुए कहा –“हाँ चंपा… लगता है किसी बड़ी विपत्ति का संकेत है।”३. गाँव में डरसुबह गाँव में हलचल थी। दो गायें अचानक मर गईं, कुएँ का पानी लाल हो गया। लोग दहशत में थे। किसी ने कहा –“ये सब भैरवनाथ का काम है। वह काली शक्तियों से खेल रहा है।”गाँव का बुज़ुर्ग पंडित रामकिशन बोला –“जब तक नागमणि हमारे बीच सुरक्षित है, गाँव को बचाया जा सकता है। पर अर्जुन बेटा, तुझे अब और मज़बूत बनना होगा।”४. अर्जुन का संकल्पअर्जुन ने गाँववालों के सामने प्रतिज्ञा ली –“जब तक मेरी साँस चलेगी, नागमणि की रक्षा करूँगा। भले ही मेरी जान चली जाए।”गाँववाले एक स्वर में बोले –“हम तुम्हारे साथ हैं अर्जुन।”५. जंगल का रहस्यरात को अर्जुन और चंपा जंगल में गए। अचानक पेड़ों से सायों की भीड़ निकल आई। वे भैरवनाथ के दूत थे। उन्होंने अर्जुन को घेर लिया।चंपा फुफकारते हुए नागिन का रूप धारण कर बोली –“जो अर्जुन की ओर बढ़ा, उसका नामो-निशान मिट जाएगा।”भयंकर युद्ध शुरू हुआ। चंपा की आँखें अंगारों की तरह चमकीं, उसकी फुफकार से कई दूत धराशायी हो गए। अर्जुन ने भी धनुष उठाया और बाण चलाए। आसमान में बिजली सी कौंध रही थी।लेकिन तभी भैरवनाथ प्रकट हुआ। उसकी हँसी गूँज उठी –“अर्जुन! तेरी बहादुरी व्यर्थ है। नागमणि मुझे देकर तू अपने गाँव को बचा सकता है।”अर्जुन ने दृढ़ स्वर में कहा –“नागमणि तेरे जैसे पापी के हाथ में नहीं जा सकती।”६. भैरवनाथ का छलभैरवनाथ ने मंत्र पढ़ा और ज़मीन से एक विशालकाय नकली नाग प्रकट हो गया। उसकी आँखों से आग बरस रही थी। अर्जुन और चंपा ने मिलकर उससे लड़ाई की। अर्जुन ने अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर बाण चलाया और अंततः वह नकली नाग राख हो गया।लेकिन युद्ध के बाद अर्जुन बुरी तरह घायल हो गया।चंपा ने आँसू बहाते हुए कहा –“अर्जुन… तुझ पर वार मेरे कारण हुआ है। शायद मुझे ही दूर हो जाना चाहिए।”अर्जुन ने उसका हाथ थाम लिया –“नहीं चंपा, तेरा साथ ही मेरी ताक़त है। अगर तू चली गई तो मैं अधूरा हो जाऊँगा।”७. रहस्यमयी साधुअचानक एक वृद्ध साधु वहाँ प्रकट हुआ। उसके माथे पर सफेद भस्म लगी थी, हाथ में त्रिशूल। उसने अर्जुन पर जल छिड़का और कहा –“बेटा, तू नागवंश का रक्षक है। तुझे हारने नहीं दिया जाएगा। पर याद रख, असली युद्ध अभी बाकी है।”अर्जुन ने नम्रता से पूछा –“महात्मा, आप कौन हैं?”साधु ने मुस्कराकर उत्तर दिया –“मैं वही हूँ जिसने सदियों पहले नागमणि की रक्षा का वचन लिया था। अब तेरी बारी है।”८. नागमणि का रहस्यसाधु ने बताया –“नागमणि केवल एक रत्न नहीं है। यह पृथ्वी की जीवन शक्ति है। यदि यह बुरी शक्तियों के हाथ लगी, तो संपूर्ण मानवता खतरे में पड़ जाएगी।”चंपा बोली –“तो हमें क्या करना होगा?”साधु बोला –“नागमणि को अंतिम परीक्षा से गुज़रना होगा। केवल वही इसके योग्य होगा जो अपने स्वार्थ का त्याग कर सकता है।”९. गाँव में विश्वासघातगाँव लौटने पर अर्जुन को एक और झटका लगा। उसका बचपन का दोस्त गगन भैरवनाथ के बहकावे में आ चुका था। गगन ने गाँववालों से कहा –“अर्जुन हमें मौत के मुँह में ले जाएगा। नागमणि भैरवनाथ को दे दो, तभी बचेंगे।”गाँव में दरार पड़ गई। कुछ लोग अर्जुन के साथ, कुछ गगन के साथ हो गए।अर्जुन ने दुःखी होकर कहा –“गगन, तू मेरा भाई था। पर आज तूने दोस्ती की पीठ में छुरा घोंपा है।”१०. निर्णायक रातभैरवनाथ ने घोषणा की –“पूर्णिमा की रात को नागमणि मुझे मिलकर रहेगी। कोई मुझे रोक नहीं सकता।”गाँव के मंदिर में अर्जुन और चंपा ने दीप जलाकर प्रार्थना की –“हे महादेव! हमें वह शक्ति दो कि हम इस अधर्म का अंत कर सकें।”११. महायुद्ध की शुरुआतपूर्णिमा की रात जंगल में गड़गड़ाहट हुई। आसमान में काले बादल छा गए। भैरवनाथ अपने दल-बल के साथ आया। अर्जुन, चंपा और गाँववाले भी जुट गए।भैरवनाथ गरजा –“अर्जुन! नागमणि मुझे सौंप दे, वरना सबका सर्वनाश कर दूँगा।”अर्जुन ने तलवार उठाई –“तेरा अंत आज तय है, भैरवनाथ।”युद्ध छिड़ गया। तलवारों की टकराहट, नागों की फुफकार, मंत्रों की गूँज – पूरा जंगल रणभूमि बन गया।१२. चंपा का बलिदानयुद्ध के बीच भैरवनाथ ने अर्जुन पर घातक वार किया। उसी क्षण चंपा बीच में कूद गई और वार सह लिया।अर्जुन चीख उठा –“चंपा!”चंपा ने काँपते हुए कहा –“अर्जुन… नागमणि की रक्षा करना… यही मेरी आख़िरी इच्छा है।”और उसकी आँखें बंद हो गईं।अर्जुन की आँखों में आग भर गई। उसने पूरी शक्ति से हमला किया।१३. भैरवनाथ का अंतअर्जुन ने महात्मा से सीखे मंत्र का उच्चारण किया और तलवार से वार किया। भैरवनाथ तड़पता हुआ चिल्लाया –“नहीं… नागमणि मेरी थी… मेरी…!”और देखते ही देखते उसका शरीर राख में बदल गया।१४. नागमणि का उजालाभैरवनाथ के नष्ट होते ही आकाश में चाँद की रोशनी फैल गई। नागमणि स्वयं अर्जुन के हाथों में आ गई और उससे निकलती किरणों ने पूरा जंगल आलोकित कर दिया।तभी चमत्कार हुआ। चंपा की निर्जीव देह पर भी उस उजाले की किरणें पड़ीं और धीरे-धीरे उसकी साँसें लौट आईं।अर्जुन ने आश्चर्य से कहा –“चंपा! तू… तू जीवित है!”चंपा ने मुस्कराकर कहा –“नागमणि ने मुझे फिर जीवन दिया… क्योंकि हमारी सच्चाई और बलिदान व्यर्थ नहीं गया।”१५. नया सवेरागाँव में नया सवेरा हुआ। लोग मंदिर में एकत्र हुए। अर्जुन और चंपा ने नागमणि को वहीं स्थापित कर दिया।पंडित जी बोले –“आज से नागमणि गाँव की रक्षा करेगी। अर्जुन और चंपा सदा हमारे नायक रहेंगे।”गाँववालों ने फूल बरसाए और कहा –“जय नागमणि! जय अर्जुन-चंपा!”उपसंहारनागमणि अब सुरक्षित थी। भैरवनाथ का अंत हो चुका था। अर्जुन और चंपा ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चाई और त्याग ही सबसे बड़ी शक्ति हैं।लेकिन रहस्य यहीं खत्म नहीं होता। साधु ने जाते-जाते कहा था –“नागमणि की असली परीक्षा अभी बाकी है। आने वाले समय में और भी बड़ा तूफ़ान आएगा…”और इसी के साथ कहानी नए मोड़ की ओर बड़ती है।