hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • आधा आदमी - 34 - अतिम भाग

    आधा आदमी अध्‍याय-34 ‘‘मैं तुम लोगों से बड़ा नंगा हूँ.‘‘ जब मुझसे बर्दास्त नहीं हु...

  • जोकर

    जो क र - विवेक मिश्र फिर मेट्रो आई रुकी और चली गई. समय से घर पहुँचने का...

  • कुछ से कुछ

    कहानी-- कुछ से कुछ आर....

आधा आदमी - 34 - अतिम भाग By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-34 ‘‘मैं तुम लोगों से बड़ा नंगा हूँ.‘‘ जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया। ‘‘बहन जी छोड़ दीजिए.‘’ सज्जन ने आकर विनती की। मैंने क...

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जोकर By Vivek Mishra

जो क र - विवेक मिश्र फिर मेट्रो आई रुकी और चली गई. समय से घर पहुँचने का एक मौका आया,रुका और आँखों के सामने से सरकता चला गया. एक दिन, एक घंटा जल्दी जाने की मोहलत नहीं मिल...

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हर करम अपना करेंगे, ए - वतन तेरे लिए By AKANKSHA SRIVASTAVA

" यहां सदियों से ये रीत है जी हर डर के आगे जीत है जी, हम रक्षक है इस मिट्टी के बस जीत की राह चलते है, है जीत का परचम हाथो में डर के आगे जीत है....! ये देश है वीर-जवानों किसानों का,...

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कुछ से कुछ By Ramnarayan Sungariya

कहानी-- कुछ से कुछ आर. एन. सुनगरया दरवाजे पर दस्‍तक सुनकर गौर साहब ने दरवाजा खोला। सामने खड़े आगन्‍तुक क...

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मजबूर By Mens HUB

बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ था और पानी से भरे हुए ऐसे ही एक गड्ढे में मिस्टर स्वामी खून से लथपथ लगभग मृत पड़े थे | उनसे थोड़ी दूर जहाँ पर बारिश का पानी नहीं था वही पर ह...

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मेरा सहेरा सजेगा मां के हाथ By Saroj Prajapati

आज मधु जी का पूरा घर फूलों की सजावट व उनकी खुशबू से महक रहा था। घर में रिश्तेदारों की चहल-पहल थी और पकवानों की खुशबू चारों ओर बिखरी हुई थी। घर में मंगलगीतों के साथ, ढोलक की थापें भ...

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आघात.. By Saroj Verma

ये क्या पंडित जी, फिर इतने सारे बतासे ले आए,अभी तो बहुत रखें हुए हैं, पंडिताइन निर्मला अपने पति से बोली।। नहीं, पंडिताइन बतासे घर में कभी खत्म नहीं होने चाहिए,क्या पता कब कौन पी...

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बना रहे यह अहसास - 1 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 1 घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है।...

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तू नहीं और सही, और नहीं और सही By Annada patni

तू नहीं और सही, और नहीं और सही अन्नदा पाटनी छत पर खड़ी थी । इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा । बाज़ू वाली छत पर एक लड़की खड़ी किसी को हाथ से कुछ इशारा कर रही थी । उत्सुकता हुई कि देखूँ...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 5 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 5 by Poonam Jain पूनम जैन अतीत में घूमता मन ऋषिकेश, गंगा का घाट। यहाँ आकर उसे लगा कि वो बेला ही है. मुँह धोने का मन हुआ. प...

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यारबाज़ - 5 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (5) खुराक एक छोटा सा बाजार था। बाजार में बहुत ज्यादा दुकानें तो नहीं थी बस एक आध फर्नीचर की दुकान ,खाद की दुकान , किराना की दुकान, होलसेल कपड़े की दुकान थी। बाज...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 10 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 10 आज बहुत दिन के पश्चात माँ बेटी मार्केट का चक्कर लगाने निकलीं कि अचानक शैली की नजर एक कारडिगन पर पड़ी... "जेनेट रुको... ऐसा ही कारडिगन हमने लिटलवुड्स मे...

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राम रचि राखा - 3 - 5 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा तूफान (5‌) सुबह उजाला होते ही नाविक ने डीजल भरा और नाव चला दी। नाव में अब खाने के लिए थोड़े से कोंदो के अलावा कुछ भी नहीं था। दूध का एक बूँद भी नहीं बचा था। बच्चे क्या...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 29 - अंतिम भाग By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 29. लाली ने शिकायत करते हुए रानी से कहा - "हर दम तेरे ही साथ रहती हूँ ! थोड़ी देर के लिए भी तू मुझे चन्दू-नन्दू के साथ नहीं जाने देती है ! बच्चों के...

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जमील चच्चा By राज बोहरे

जमील चच्चा जमील चच्चा ने अपनी चालीस साल पुरानी साइकिल के हैंडल पर बड़े प्यार से कपड़ा रगड़ा और पिछले पहिये की हवा चैक करने लगे। पिछला पहिया कुछ दिनों से परेशान करने लगा हैं। पं...

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ताई By Sandeep Tomar

"ताई" गॉव से आयी ताई यहाँ ठहरने को तैयार नहीं थी, कतई नहीं। पोटलीनुमा झोला काख में दबाए वह चली आ रही थी। उनका बड़ा बेटा सुबह ही अपने काम पर जा चुका था। बड़ा बिज़नेसमेन होने के ना...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 6 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (6) क़रीब पाँच घंटे की यात्रा के बाद हम अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचे थे। आह! दुनिया के नक़्शे में भले ही प्...

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जय हिन्द की सेना - 4 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म चार हिटलर के बाद संसार का दूसरा सबसे बड़ा जीवित सैनिक तानाशाह की भूमिका इस समय पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्‌या खॉ निभा रहा था। पूर्वी पाकिस्तान में शेख...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 12 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 12. यादों की लड़ियों ने उसे कॉलेज के प्रांगण में लाकर खड़ा कर दिया था। प्रखर से जब भी शिखा मिलती.....साथ में गुज़रे अतीत में चुपचाप ही पहुँच जाती| समय-समय प...

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गवाक्ष - 18 By Pranava Bharti

गवाक्ष 18== "आपको भी संगीत व नृत्य सीखने की आज्ञा नहीं थी, फिर आप कैसे इस कला में प्रवीण हो गईं?आप क्या छिपकर इस कला का अभ्यास करती हैं?""तुम बहुत चंचल हो, चुप नहीं रह सकते...

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उर्वशी - 21 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 21 उसका रक्तचाप बढ़ रहा था। खाना पीना लगभग न के बराबर रह गया था। चूँकि वह किसी से अपने मन की बात नहीं कर पा रही थी तो घुटन भी बढ़ती जा रही थी। अक्सर वह बस...

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अकेली शाम By Mohini

स्मिता और प्रतीक दोनों की अरेंज मैरिज हुई थी,दोनों अपने अपने मा बाप के एक ही संतान थे.. पति पत्नी में..शादी के 10 साल में भी नया नया प्यार जैसा अहसास था...धन दौलत कि कोई कमी नहीं थ...

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चाँद के पार एक चाबी - 6 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 6 ‘इसका बाप अपने आपको बड़का बाभन बूझता है। सरयूपारी। क्या तो तरवा का बिआह सरयूपारिये में करेगा!’ रमेश पांडे ने पिच्च से खैनी के साथ ही जैसे तिताई भी...

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बुखार By Priyadarshan Parag

बुखार प्रियदर्शन वह बाईस मार्च का दिन था। प्रधानमंत्री के आह्वान पर वह अपनी बालकनी पर खड़े होकर एक प्यारी सी घंटी बजा रहा था। यह घंटी उसने अपनी दुछत्ती पर पड़े पुराने सामानों के बी...

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केसरिया बालम - 21 - अंतिम भाग By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 21 केसरिया भात की खुशबू आज बाली घर आने वाला है। सिर्फ अपनी देह के साथ। ऐसी चेतनाविहीन देह जो देह होने का अर्थ भी नहीं जानती। ऐसी देह जहाँ न मन है, न दिमाग...

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कुनबेवाला By Deepak sharma

कुनबेवाला “ये दिए गिन तो|” मेरे माथे पर दही-चावल व सिन्दूर का तिलक लगा रही माँ मुस्कुराती है| वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने है| उस तपेदिक से अभी मुक्त है जो उस ने तपेदिक-ग्रस्...

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जननम - 16 - अंतिम भाग By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 16 वह उसके सामने आराम से बैठी हुई थी। बड़े सहज रूप से मुस्कुरा रही थी। कितनी अच्छी तरह से मुस्कुराती है ! कितनी सुंदर! कितनी सौम्य । इस सौम्यता पर सिर्फ मेरा अधिकार है...

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हार गया फौजी बेटा - 5 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

हार गया फौजी बेटा - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 5 हम जल्दी ही वापस बाहर आकर अपनी खटिया पर बैठ गए। पिता भी मेरे साथ बैठे थे। हम दोनों बिल्कुल शांत थे। खाना-पीना सब खत्म होने के बाद बाहर प...

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एक छोटी सी भूल By Sudha Adesh

एक छोटी सी भूल ‘ अनु, आज मैं बहुत खुश हूँ, आज हमारी पूर्ण परिवार की कल्पना सार्थक हो गई है, पुत्र हो या पुत्री इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन केवल पुत्र या केवल पुत्री के...

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रेसक्यू By Neelam Kulshreshtha

रेसक्यू [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ जब भी टी वी ऑन करो बहुत से प्रदेशों की दिल दहलाने वाली पानी में भरी सूरत होती हैं। सन – 2006 सूरत में भयानक बाढ़ आई थी- प्रशासन व सिंचाई विभाग ग़फ़लत से....

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मुखौटा By Mukesh Pandya

मुखौटा मुकेश पंडया रंगमंच पर अभिनय कला मे अभिनय सहित जरूरी संगीत,गायन,नृत्य,रंगमंच सज्जा,श्रृंगार...

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आधा आदमी - 34 - अतिम भाग By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-34 ‘‘मैं तुम लोगों से बड़ा नंगा हूँ.‘‘ जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया। ‘‘बहन जी छोड़ दीजिए.‘’ सज्जन ने आकर विनती की। मैंने क...

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जोकर By Vivek Mishra

जो क र - विवेक मिश्र फिर मेट्रो आई रुकी और चली गई. समय से घर पहुँचने का एक मौका आया,रुका और आँखों के सामने से सरकता चला गया. एक दिन, एक घंटा जल्दी जाने की मोहलत नहीं मिल...

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हर करम अपना करेंगे, ए - वतन तेरे लिए By AKANKSHA SRIVASTAVA

" यहां सदियों से ये रीत है जी हर डर के आगे जीत है जी, हम रक्षक है इस मिट्टी के बस जीत की राह चलते है, है जीत का परचम हाथो में डर के आगे जीत है....! ये देश है वीर-जवानों किसानों का,...

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कुछ से कुछ By Ramnarayan Sungariya

कहानी-- कुछ से कुछ आर. एन. सुनगरया दरवाजे पर दस्‍तक सुनकर गौर साहब ने दरवाजा खोला। सामने खड़े आगन्‍तुक क...

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मजबूर By Mens HUB

बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ था और पानी से भरे हुए ऐसे ही एक गड्ढे में मिस्टर स्वामी खून से लथपथ लगभग मृत पड़े थे | उनसे थोड़ी दूर जहाँ पर बारिश का पानी नहीं था वही पर ह...

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मेरा सहेरा सजेगा मां के हाथ By Saroj Prajapati

आज मधु जी का पूरा घर फूलों की सजावट व उनकी खुशबू से महक रहा था। घर में रिश्तेदारों की चहल-पहल थी और पकवानों की खुशबू चारों ओर बिखरी हुई थी। घर में मंगलगीतों के साथ, ढोलक की थापें भ...

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आघात.. By Saroj Verma

ये क्या पंडित जी, फिर इतने सारे बतासे ले आए,अभी तो बहुत रखें हुए हैं, पंडिताइन निर्मला अपने पति से बोली।। नहीं, पंडिताइन बतासे घर में कभी खत्म नहीं होने चाहिए,क्या पता कब कौन पी...

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बना रहे यह अहसास - 1 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 1 घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है।...

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तू नहीं और सही, और नहीं और सही By Annada patni

तू नहीं और सही, और नहीं और सही अन्नदा पाटनी छत पर खड़ी थी । इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा । बाज़ू वाली छत पर एक लड़की खड़ी किसी को हाथ से कुछ इशारा कर रही थी । उत्सुकता हुई कि देखूँ...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 5 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 5 by Poonam Jain पूनम जैन अतीत में घूमता मन ऋषिकेश, गंगा का घाट। यहाँ आकर उसे लगा कि वो बेला ही है. मुँह धोने का मन हुआ. प...

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यारबाज़ - 5 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (5) खुराक एक छोटा सा बाजार था। बाजार में बहुत ज्यादा दुकानें तो नहीं थी बस एक आध फर्नीचर की दुकान ,खाद की दुकान , किराना की दुकान, होलसेल कपड़े की दुकान थी। बाज...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 10 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 10 आज बहुत दिन के पश्चात माँ बेटी मार्केट का चक्कर लगाने निकलीं कि अचानक शैली की नजर एक कारडिगन पर पड़ी... "जेनेट रुको... ऐसा ही कारडिगन हमने लिटलवुड्स मे...

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राम रचि राखा - 3 - 5 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा तूफान (5‌) सुबह उजाला होते ही नाविक ने डीजल भरा और नाव चला दी। नाव में अब खाने के लिए थोड़े से कोंदो के अलावा कुछ भी नहीं था। दूध का एक बूँद भी नहीं बचा था। बच्चे क्या...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 29 - अंतिम भाग By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 29. लाली ने शिकायत करते हुए रानी से कहा - "हर दम तेरे ही साथ रहती हूँ ! थोड़ी देर के लिए भी तू मुझे चन्दू-नन्दू के साथ नहीं जाने देती है ! बच्चों के...

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जमील चच्चा By राज बोहरे

जमील चच्चा जमील चच्चा ने अपनी चालीस साल पुरानी साइकिल के हैंडल पर बड़े प्यार से कपड़ा रगड़ा और पिछले पहिये की हवा चैक करने लगे। पिछला पहिया कुछ दिनों से परेशान करने लगा हैं। पं...

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ताई By Sandeep Tomar

"ताई" गॉव से आयी ताई यहाँ ठहरने को तैयार नहीं थी, कतई नहीं। पोटलीनुमा झोला काख में दबाए वह चली आ रही थी। उनका बड़ा बेटा सुबह ही अपने काम पर जा चुका था। बड़ा बिज़नेसमेन होने के ना...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 6 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (6) क़रीब पाँच घंटे की यात्रा के बाद हम अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचे थे। आह! दुनिया के नक़्शे में भले ही प्...

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जय हिन्द की सेना - 4 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म चार हिटलर के बाद संसार का दूसरा सबसे बड़ा जीवित सैनिक तानाशाह की भूमिका इस समय पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्‌या खॉ निभा रहा था। पूर्वी पाकिस्तान में शेख...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 12 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 12. यादों की लड़ियों ने उसे कॉलेज के प्रांगण में लाकर खड़ा कर दिया था। प्रखर से जब भी शिखा मिलती.....साथ में गुज़रे अतीत में चुपचाप ही पहुँच जाती| समय-समय प...

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गवाक्ष - 18 By Pranava Bharti

गवाक्ष 18== "आपको भी संगीत व नृत्य सीखने की आज्ञा नहीं थी, फिर आप कैसे इस कला में प्रवीण हो गईं?आप क्या छिपकर इस कला का अभ्यास करती हैं?""तुम बहुत चंचल हो, चुप नहीं रह सकते...

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उर्वशी - 21 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 21 उसका रक्तचाप बढ़ रहा था। खाना पीना लगभग न के बराबर रह गया था। चूँकि वह किसी से अपने मन की बात नहीं कर पा रही थी तो घुटन भी बढ़ती जा रही थी। अक्सर वह बस...

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अकेली शाम By Mohini

स्मिता और प्रतीक दोनों की अरेंज मैरिज हुई थी,दोनों अपने अपने मा बाप के एक ही संतान थे.. पति पत्नी में..शादी के 10 साल में भी नया नया प्यार जैसा अहसास था...धन दौलत कि कोई कमी नहीं थ...

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चाँद के पार एक चाबी - 6 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 6 ‘इसका बाप अपने आपको बड़का बाभन बूझता है। सरयूपारी। क्या तो तरवा का बिआह सरयूपारिये में करेगा!’ रमेश पांडे ने पिच्च से खैनी के साथ ही जैसे तिताई भी...

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केसरिया बालम - 21 - अंतिम भाग By Hansa Deep

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कुनबेवाला By Deepak sharma

कुनबेवाला “ये दिए गिन तो|” मेरे माथे पर दही-चावल व सिन्दूर का तिलक लगा रही माँ मुस्कुराती है| वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने है| उस तपेदिक से अभी मुक्त है जो उस ने तपेदिक-ग्रस्...

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जननम - 16 - अंतिम भाग By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 16 वह उसके सामने आराम से बैठी हुई थी। बड़े सहज रूप से मुस्कुरा रही थी। कितनी अच्छी तरह से मुस्कुराती है ! कितनी सुंदर! कितनी सौम्य । इस सौम्यता पर सिर्फ मेरा अधिकार है...

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हार गया फौजी बेटा - 5 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

हार गया फौजी बेटा - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 5 हम जल्दी ही वापस बाहर आकर अपनी खटिया पर बैठ गए। पिता भी मेरे साथ बैठे थे। हम दोनों बिल्कुल शांत थे। खाना-पीना सब खत्म होने के बाद बाहर प...

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एक छोटी सी भूल By Sudha Adesh

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रेसक्यू By Neelam Kulshreshtha

रेसक्यू [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ जब भी टी वी ऑन करो बहुत से प्रदेशों की दिल दहलाने वाली पानी में भरी सूरत होती हैं। सन – 2006 सूरत में भयानक बाढ़ आई थी- प्रशासन व सिंचाई विभाग ग़फ़लत से....

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मुखौटा By Mukesh Pandya

मुखौटा मुकेश पंडया रंगमंच पर अभिनय कला मे अभिनय सहित जरूरी संगीत,गायन,नृत्य,रंगमंच सज्जा,श्रृंगार...

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