hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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राम रचि राखा - 4 - 2 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा मरना मत, मेरे प्यार ! (2) अच्छा हो या बुरा, समय तो बीतता ही रहता है। देखते ही देखते तीन साल बीत गए। जैसे-जैसे समय समय बीतता गया मेरे और प्रिया के संबंधों की मिठास कड़व...

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बात बस इतनी सी थी - 3 By Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 3 जब मैं वहाँ से वापिस लौटा, तब मंजरी अपने केबिन में नहीं थी । मैं खुद से ही पूछने लगा - "कहाँ गयी होगी ? क्यों गयी होगी ? कहीं मेरे व्यवहार से नाराज होकर तो नहीं...

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वे दस मिनट By Madhu Kankaria

वे दस मिनट कोलकाता से चेन्नई के लिए ट्रेन में बैठा था. २४ घंटे का सफ़र. साथ में दो एक किताबें रख ली थी. नीचे की बर्थ पाकर संतुष्ट था. सामान लगाया और टीटी से निपटा तो जाने कहाँ से को...

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इक समंदर मेरे अंदर - 2 By Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (2) वह कभी समझ नहीं पायी कि वे अपनी खिड़कियां जानबूझ कर बंद नहीं करती थीं या भूल जाती थीं। कामना अपनी खिड़की पर बैठी टुकुर टुकुर उन तैयार होती महिलाओं...

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अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार By Vijayshree Tanveer

अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार आठ महीने के देबू को कंधे से लगाए अनुपमा गांगुली जब नैहाटी जंक्शन पहुँची तो नौ-पंद्रह वाली लोकल पटरियों पर रेंगने लगी थी। उसने खुद को कोसना भेजा । कैसी...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 9 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (9) सोचकर भी अजीब लगता है, 13 वर्ष की नानी माँ ने, माँ के प्यारे नाम ‘रूबी’ से पुकारकर धीरे-धीरे उनसे बे...

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जय हिन्द की सेना - 6 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म छः ढलान समाप्त हो रही थी। भानु ने गियर बदला, अब जीप हल्की चढ़ाई पर चढ़ रही थी। नदी से पहले का ऊबड़—खाबड़ बीहड़ क्षेत्र। कुछ पल शांतमय बीते। अब जीप उसी नद...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 15 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 15. एक लंबे अरसे बाद दोनो फिर से रिटायर होने के बाद मिले थे|....वो भी उम्र के उस पड़ाव पर.....जहां हर आता दिन कभी भी ज़िंदगी में पूर्ण-विराम के लगने की ओर...

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गवाक्ष - 21 By Pranava Bharti

गवाक्ष 21== निधी को शर्मिंदगी हुई, कैसी बचकानी बातें कर रही है! उसके साथ बैठा हुआ मृत्यु-दूत है, कॉस्मॉस! उसका कार्य-क्षेत्र किसी एक स्थान पर कैसे हो सकता है? उसनेअपने दोनो...

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नागरिक : पुलिसिया त्रासदी की कहानी By Amit Singh

कहानी समीक्षा**************************** नागरिक तमाशेबाज है। मदारी, सँपेरे, नीम -हकीम और सड़क किनारे होने वाले करतब-तमाशे देखने का उसका चस्का बचपन से ही है। वह मिस्टर न...

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कौवा By महेश रौतेला

कौवा:कल १५ जुलाई १७ को, एक कौवे से अचानक भेंट हो गयी। बचपन में माता-पिता कहते थे ,आज कौवा काँव-काँव कर रहा है कोई अतिथि(पौंड़) आने वाला है।और जब भी कौवा काँव-काँव करता तो हम उम्मीद...

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वारिस By Chaya Agarwal

वारिस डरावनी, वीरान और काली रात, जैसे आँखों में काजल लगा कर एकटक घूर रही हो और पछवा के सुरों ने हवा में अपना घरौंदा बना लिया हो। ऊपर से आवा-जाही न होने का घोर सन्नाटा। जँगली झीँगुर...

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चिड़िया ऐसे जीती है By Madhu Kankaria

चिड़िया ऐसे जीती है मधु कांकरिया कहानी उन खूबसूरत सुहाने दिनों की है जब साइबेरिया से आए सुंदर सलोने परिंदे हमारी धरती पर उतरते थे, प्रेम की झील में तैरते थे और स्वप्न भरी उड़ान भरा...

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बना रहे यह अहसास - 3 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 3 दिन बीत रहे हैं। सर्जरी की चर्चा नहीं। भरा है अम्मा का दिल। कभी फैसला नहीं ले पाई। न अपने लिये न दूसरों के लिये। यह पहला फैसला है। पैसा है इसलिये...

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अंदर खुलने वाली खिड़की - 2 By Priyamvad

अंदर खुलने वाली खिड़की (2) इसके अलावा, बुढ़िया की कुछ आदतें विचित्र और पुरानी थीं। उसे थूकने की आदत थी। खिड़की से सर निकाले हुए वह थोड़ी थोड़ी देर में थूकती रहती थी। हालांकि थूकने से पह...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 7 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 7 by Amrita Thakur अमृता ठाकुर हवाओं के रुख ने बदल दी राह ‘आग और पानी में गजब का आकर्षण होता है! नज़र कैसे दोनों पर टिक सी...

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यारबाज़ - 7 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (7) ऐसे ही वक़्त जब पूरी कॉलोनी में डर फैला हुआ था तो श्याम बेहिचक उस दिन क्रिकेट मैदान में अपना बल्ला चला रहा था। ग्राउंड खचाखच चारों तरफ लोगों से भरा हुआ था ।...

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चाँद के पार एक चाबी - 8 - अंतिम भाग By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 8 मां अध्कच्ची नींद से अकबकाकर उठी। पिन्टू ने मां को देखा। मां की आंखों में दहशत थी। इस दहशत ने उसे भी गिरफ्रत में ले लिया। दरवाजे पर पिफर ध्म्म-ध्...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 12 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 12 एकदम डांस के फ्लोर से नीचे उतरते हुए वीणा की निगाह सामने खड़ी निशा पर पड़ी तो वह गिरते हुए बची। "निशा तुम यहाँ कैसे..." उसने लड़खड़ाई आवाज में पूछा। वी...

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शेफाली चली गई By Priyadarshan Parag

शेफाली चली गई प्रियदर्शन `हलो, मैं शेफाली।` आवाज़ की खनक जानी-पहचानी थी। मिलने का समय भी तय था। मिलने की जगह भी तुम्हीं ने बताई थी। फिर भी तुम स्तब्ध से खड़े रहे- बिल्कुल जड़वत। क्...

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त्रिविध ताप By Deepak sharma

त्रिविध ताप मामा के नाम पर प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर शहर में एक विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है| उनके चित्र पर फूलमालाएँ चढ़ाई जाती हैं| उनकी जीवनी व जीवन-चर्या के अनेक प्रसंग...

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गूंगा गाँव - 2 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

दो सूर्य डुबने को हो रहा था। चरवाहे अपने पशु लेकर लौट पड़े थे। गाँव के लोग अपने पशुओं को लेने, गाँव के बाहर हनुमान जी के मन्दिर पर प...

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तू खुश है ना? By अरुण राय

एक छोटी सी रचना है आजकल के कथित प्रेम में पड़कर अपने बाप,भाई,परिवार का मखौल उड़ाने वाली लड़कियों के लिए.वो तो चली जाती है अपने अरमानो को पंख लगाकर अपने सपने को हकीकत बनाने बिना इस अहस...

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क्या मर्द को भी दर्द होता हैं By AKANKSHA SRIVASTAVA

रात के करीब तीन बजे ही रहे होंगे तभी कमरे के बाहर कुछ आहट सी हुई ...नीद टूटी,ओर चारपाई से अभी पूरी तरह सुरेश उठी पा रहा था कि दुबारा से कॉल बेल बजी। इतनी रात को,लगता है जान आगयी अप...

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लौट कर आऊँगा एक बार फिर By Sudha Adesh

लौट कर आऊँगा एक बार फिररितिक का शव घर से निकलते ही निकिता फूट-फूट कर रो पड़ी...आस पास खड़े लोगों की आँखों में भी आँसू झिलमिला रहे थे । रितिक था ही इतना प्यारा कि बरबस सभीं को अपनी ओर...

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उर्वशी - 23 - अंतिम भाग By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 23 उर्वशी ने उससे कई बार कहा कि वह परेशानी न उठाया करे और टिफ़िन ड्राइवर के हाथ भिजवा दिया करे, पर वह कहता कि उसे यह कर के अच्छा लगता है। कल को उसका बच्चा...

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पग घुँघरू बाँध By Nisha chandra

पग घुँघरू बाँध नथनियाने हाय राम बड़ा दुख दीन्हा दूर से आती हुई ठुमरी की आवाज, ढ़ोलक की थाप और घुँघरूओं की आवाज अम्मा को सोने न हीं दे रही थी। दो बार तो थूककर आ गयीं। इन रांड- रडँकु...

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महाराजाओं की विदेशी दुलहिनों की व्यथा कथायें By Neelam Kulshreshtha

महाराजाओं की विदेशी दुलहिनों की व्यथा कथायें [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ ब्रिटिशकाल में राजा महाराजा अक्सर विदेशी महिलाओं से शादी कर लेते थे। ये महिलायें उनकी शान शौकत पर मर मिटती थीं ले...

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बुलडोज़र By Priyadarshan Parag

बुलडोज़र प्रियदर्शन कहानी तब शुरू हुई जब सिर्फ सात महीने पहले ली गई गाड़ी ख़राब हो गई। इंजन बिल्कुल रूठा हुआ था- स्टार्ट होने को तैयार नहीं। गाड़ी के सेंसर तक काम नहीं कर रहे थे। द...

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क्वार्टर नम्बर तेइस By Deepak sharma

क्वार्टर नम्बर तेइस माँ और तीनों बहनों की हँसी अशोक ने बाहर से ही सुन ली| हमेशा की तरह इस बार भी हँसी उसे अचरज तथा रोष से भर गयी| रेल गाड़ियों के धुएं और धमाके के हर दूसरे पल पर डोल...

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राम रचि राखा - 4 - 2 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा मरना मत, मेरे प्यार ! (2) अच्छा हो या बुरा, समय तो बीतता ही रहता है। देखते ही देखते तीन साल बीत गए। जैसे-जैसे समय समय बीतता गया मेरे और प्रिया के संबंधों की मिठास कड़व...

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बात बस इतनी सी थी - 3 By Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 3 जब मैं वहाँ से वापिस लौटा, तब मंजरी अपने केबिन में नहीं थी । मैं खुद से ही पूछने लगा - "कहाँ गयी होगी ? क्यों गयी होगी ? कहीं मेरे व्यवहार से नाराज होकर तो नहीं...

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वे दस मिनट By Madhu Kankaria

वे दस मिनट कोलकाता से चेन्नई के लिए ट्रेन में बैठा था. २४ घंटे का सफ़र. साथ में दो एक किताबें रख ली थी. नीचे की बर्थ पाकर संतुष्ट था. सामान लगाया और टीटी से निपटा तो जाने कहाँ से को...

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इक समंदर मेरे अंदर - 2 By Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (2) वह कभी समझ नहीं पायी कि वे अपनी खिड़कियां जानबूझ कर बंद नहीं करती थीं या भूल जाती थीं। कामना अपनी खिड़की पर बैठी टुकुर टुकुर उन तैयार होती महिलाओं...

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अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार By Vijayshree Tanveer

अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार आठ महीने के देबू को कंधे से लगाए अनुपमा गांगुली जब नैहाटी जंक्शन पहुँची तो नौ-पंद्रह वाली लोकल पटरियों पर रेंगने लगी थी। उसने खुद को कोसना भेजा । कैसी...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 9 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (9) सोचकर भी अजीब लगता है, 13 वर्ष की नानी माँ ने, माँ के प्यारे नाम ‘रूबी’ से पुकारकर धीरे-धीरे उनसे बे...

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जय हिन्द की सेना - 6 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म छः ढलान समाप्त हो रही थी। भानु ने गियर बदला, अब जीप हल्की चढ़ाई पर चढ़ रही थी। नदी से पहले का ऊबड़—खाबड़ बीहड़ क्षेत्र। कुछ पल शांतमय बीते। अब जीप उसी नद...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 15 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 15. एक लंबे अरसे बाद दोनो फिर से रिटायर होने के बाद मिले थे|....वो भी उम्र के उस पड़ाव पर.....जहां हर आता दिन कभी भी ज़िंदगी में पूर्ण-विराम के लगने की ओर...

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गवाक्ष - 21 By Pranava Bharti

गवाक्ष 21== निधी को शर्मिंदगी हुई, कैसी बचकानी बातें कर रही है! उसके साथ बैठा हुआ मृत्यु-दूत है, कॉस्मॉस! उसका कार्य-क्षेत्र किसी एक स्थान पर कैसे हो सकता है? उसनेअपने दोनो...

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नागरिक : पुलिसिया त्रासदी की कहानी By Amit Singh

कहानी समीक्षा**************************** नागरिक तमाशेबाज है। मदारी, सँपेरे, नीम -हकीम और सड़क किनारे होने वाले करतब-तमाशे देखने का उसका चस्का बचपन से ही है। वह मिस्टर न...

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कौवा By महेश रौतेला

कौवा:कल १५ जुलाई १७ को, एक कौवे से अचानक भेंट हो गयी। बचपन में माता-पिता कहते थे ,आज कौवा काँव-काँव कर रहा है कोई अतिथि(पौंड़) आने वाला है।और जब भी कौवा काँव-काँव करता तो हम उम्मीद...

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वारिस By Chaya Agarwal

वारिस डरावनी, वीरान और काली रात, जैसे आँखों में काजल लगा कर एकटक घूर रही हो और पछवा के सुरों ने हवा में अपना घरौंदा बना लिया हो। ऊपर से आवा-जाही न होने का घोर सन्नाटा। जँगली झीँगुर...

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चिड़िया ऐसे जीती है By Madhu Kankaria

चिड़िया ऐसे जीती है मधु कांकरिया कहानी उन खूबसूरत सुहाने दिनों की है जब साइबेरिया से आए सुंदर सलोने परिंदे हमारी धरती पर उतरते थे, प्रेम की झील में तैरते थे और स्वप्न भरी उड़ान भरा...

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बना रहे यह अहसास - 3 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 3 दिन बीत रहे हैं। सर्जरी की चर्चा नहीं। भरा है अम्मा का दिल। कभी फैसला नहीं ले पाई। न अपने लिये न दूसरों के लिये। यह पहला फैसला है। पैसा है इसलिये...

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अंदर खुलने वाली खिड़की - 2 By Priyamvad

अंदर खुलने वाली खिड़की (2) इसके अलावा, बुढ़िया की कुछ आदतें विचित्र और पुरानी थीं। उसे थूकने की आदत थी। खिड़की से सर निकाले हुए वह थोड़ी थोड़ी देर में थूकती रहती थी। हालांकि थूकने से पह...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 7 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 7 by Amrita Thakur अमृता ठाकुर हवाओं के रुख ने बदल दी राह ‘आग और पानी में गजब का आकर्षण होता है! नज़र कैसे दोनों पर टिक सी...

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यारबाज़ विक्रम सिंह (7) ऐसे ही वक़्त जब पूरी कॉलोनी में डर फैला हुआ था तो श्याम बेहिचक उस दिन क्रिकेट मैदान में अपना बल्ला चला रहा था। ग्राउंड खचाखच चारों तरफ लोगों से भरा हुआ था ।...

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चाँद के पार एक चाबी - 8 - अंतिम भाग By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 8 मां अध्कच्ची नींद से अकबकाकर उठी। पिन्टू ने मां को देखा। मां की आंखों में दहशत थी। इस दहशत ने उसे भी गिरफ्रत में ले लिया। दरवाजे पर पिफर ध्म्म-ध्...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 12 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 12 एकदम डांस के फ्लोर से नीचे उतरते हुए वीणा की निगाह सामने खड़ी निशा पर पड़ी तो वह गिरते हुए बची। "निशा तुम यहाँ कैसे..." उसने लड़खड़ाई आवाज में पूछा। वी...

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शेफाली चली गई By Priyadarshan Parag

शेफाली चली गई प्रियदर्शन `हलो, मैं शेफाली।` आवाज़ की खनक जानी-पहचानी थी। मिलने का समय भी तय था। मिलने की जगह भी तुम्हीं ने बताई थी। फिर भी तुम स्तब्ध से खड़े रहे- बिल्कुल जड़वत। क्...

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त्रिविध ताप By Deepak sharma

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गूंगा गाँव - 2 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

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तू खुश है ना? By अरुण राय

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क्या मर्द को भी दर्द होता हैं By AKANKSHA SRIVASTAVA

रात के करीब तीन बजे ही रहे होंगे तभी कमरे के बाहर कुछ आहट सी हुई ...नीद टूटी,ओर चारपाई से अभी पूरी तरह सुरेश उठी पा रहा था कि दुबारा से कॉल बेल बजी। इतनी रात को,लगता है जान आगयी अप...

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लौट कर आऊँगा एक बार फिर By Sudha Adesh

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उर्वशी - 23 - अंतिम भाग By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 23 उर्वशी ने उससे कई बार कहा कि वह परेशानी न उठाया करे और टिफ़िन ड्राइवर के हाथ भिजवा दिया करे, पर वह कहता कि उसे यह कर के अच्छा लगता है। कल को उसका बच्चा...

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पग घुँघरू बाँध By Nisha chandra

पग घुँघरू बाँध नथनियाने हाय राम बड़ा दुख दीन्हा दूर से आती हुई ठुमरी की आवाज, ढ़ोलक की थाप और घुँघरूओं की आवाज अम्मा को सोने न हीं दे रही थी। दो बार तो थूककर आ गयीं। इन रांड- रडँकु...

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महाराजाओं की विदेशी दुलहिनों की व्यथा कथायें By Neelam Kulshreshtha

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बुलडोज़र By Priyadarshan Parag

बुलडोज़र प्रियदर्शन कहानी तब शुरू हुई जब सिर्फ सात महीने पहले ली गई गाड़ी ख़राब हो गई। इंजन बिल्कुल रूठा हुआ था- स्टार्ट होने को तैयार नहीं। गाड़ी के सेंसर तक काम नहीं कर रहे थे। द...

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क्वार्टर नम्बर तेइस By Deepak sharma

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