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Alka rahul Aggarwal

Alka rahul Aggarwal

@alkaaggarwal126584
(813)

किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है, जो खुद पर भरोसा रखना नहीं छोड़ते।

"जो तुम्हारे भाग्य में है, वह तुमसे कोई नहीं छीन सकता; और जो तुम्हारे भाग्य में नहीं है, उसे तुम पकड़कर भी नहीं रख सकते।"
- Alka rahul Aggarwal

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दुनिया की अजीब कहानी, सब सुनते और सुनाते।
अपने मतलब के पीछे ही, दिन-रात लगे रह जाते।।
सच्चाई को समझ न पाते, मन रहता बेचैन।
कैसे कोई समझाए इनको, बहाते आँसू व्यर्थ नैन।।
देखो इनकी हालत कैसी, रहते अक्सर मौन।
इनको देखकर समझ न आए, आखिर ये हैं कौन।।
स्वार्थ भरा है इनके मन में, चैन नहीं एक पल।
कैसे कोई समझाए इनको, समझें जीवन का फल।।
नहीं किसी की परवाह इनको, अपने में खोए रहते।
दूसरों के दुख-दर्द को भी, कभी न अपने संग कहते।।
दया और प्रेम से दूर हैं, मन हुआ है कठोर।
कैसे कोई समझाए इनको, क्या है जीवन का छोर।।
धन-दौलत को सबसे ऊपर, ये लोग मानते हैं।
सच और ईमान की बातें, कम ही पहचानते हैं।।
संतों की सीख भी इनको, लगती बिल्कुल फीकी।
कैसे कोई समझाए इनको, सोच हुई है रीती।।
मानव जीवन के बलिदानों को, ये याद नहीं करते।
झूठे आँसू बहाकर अक्सर, लोगों को बस भरमाते।।
ऐसे लोगों से बचकर रहना, यही बात है गंभीर।
कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।।

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श्रमिकों का महत्व
मेहनत करने वाला व्यक्ति दिन-रात पसीना बहाता है। उसकी भी इच्छा होती है कि वह सुख से जीवन जिए और अपने अधूरे सपनों को पूरा करे।
वह अपनी मेहनत से परिवार का पालन-पोषण करता है। जब श्रमिक आगे बढ़ता है, तब देश भी तरक्की करता है और विकास की नई कहानियाँ लिखता है।
हमें श्रमिकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करना चाहिए। उन्हें कभी भी छोटी नजर से नहीं देखना चाहिए। वे समाज की अमूल्य धरोहर हैं और हमारे अपने भाई-बहन जैसे हैं।
वे दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि अपने परिवार को खुश रख सकें। अच्छा जीवन जीने की इच्छा रखना कोई अपराध नहीं है। उनके अधिकार कोई दान या खैरात नहीं, बल्कि उनका हक हैं।
श्रमिक भीख नहीं मांगते, बल्कि अपनी मेहनत का उचित सम्मान और मेहनताना चाहते हैं। उन्होंने जीवन में बहुत कष्ट झेले होते हैं।
हमारा भी कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान करें, उन्हें अपनापन दें और उनके योगदान को पहचानें।
सच्चा श्रमिक कभी मेहनत से पीछे नहीं हटता। वह लगातार काम करके समाज और देश की सेवा करता है। वह दूसरों के जीवन में खुशियों के बीज बोता है, लेकिन अक्सर उसकी मेहनत का पूरा फल उसे नहीं मिल पाता।

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1. कर्म का फल
जैसे कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा। यदि लोग आपकी बुराई करते हैं तो पहले अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए।
2. मोह से बचें
किसी व्यक्ति या चीज़ से जरूरत से ज़्यादा लगाव दुख का कारण बनता है। इसलिए सोच-समझकर जीवन जीना चाहिए।
3. रिश्तों का मोह
कई बार जिनसे कोई खास रिश्ता नहीं होता, उनसे भी हम बहुत जुड़ जाते हैं। लेकिन हमेशा मर्यादा और संतुलन बनाए रखना चाहिए।
4. भ्रष्ट लोग
समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जो हर जगह भ्रष्टाचार और गलत काम करते रहते हैं। उनका आचरण समाज को नुकसान पहुँचाता है।
5. बुराई का अंत कठिन
ऐसे लोगों को रोकना आसान नहीं होता। वे बार-बार मुश्किलों से बच निकलते हैं और अपनी आदतें नहीं बदलते।
6. जीवन का महत्व
मानव जीवन बहुत मूल्यवान है। बुरी भावनाओं और वासनाओं को नियंत्रित करना चाहिए, नहीं तो वे हमें ही नुकसान पहुँचाती हैं।

एकता का संदेश
मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन लड़ाई नहीं करनी चाहिए। सबके हित के लिए मिल-जुलकर रहना ही सबसे अच्छा रास्ता है।
1. रिश्तों में प्यार की कमी
आज लोगों के बीच पहले जैसा प्रेम नहीं रहा। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ गए हैं और परिवारों में भी तनाव बढ़ रहा है।
2. स्वार्थी समाज
आज कई लोग अपने स्वार्थ में इतने डूब गए हैं कि सच्चा प्रेम और अपनापन कम होता जा रहा है।
बेटियों पर
बेटियाँ माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी और सम्मान होती हैं। उन्हें दुख पहुँचाना पूरे परिवार को दुखी कर देता है।
परंपरा पर व्यंग्य
लोग अक्सर परंपरा के नाम पर बहुत कुछ करते हैं, लेकिन कई बार वे उसके असली उद्देश्य को भूल जाते हैं।
समाज की विडंबना
कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि आज लोग शांति और सरल जीवन से ज्यादा दिखावे और हिंसा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
मदद और इंसानियत
किसी के आँसू पोंछना और उसकी मदद करना अच्छा काम है, लेकिन इसके पीछे स्वार्थ नहीं होना चाहिए।
यमराज का प्रतीक
यहाँ यमराज को एक ऐसे मित्र के रूप में दिखाया गया है जो जीवन की सच्चाई, कर्म और मृत्यु का ज्ञान देता है।
अंतिम संदेश
कवि कहता है कि उसने हमेशा प्रेम, सद्भाव और अच्छे कर्मों का संदेश दिया है। उसकी इच्छा है कि सभी लोग सही रास्ते पर चलें और जीवन में मुस्कुराते रहें।
मुख्य संदेश:
👉 अच्छे कर्म करो।
👉 मोह, लालच और स्वार्थ से बचो।
👉 बेटियों का सम्मान करो।
👉 एकता और प्रेम बनाए रखो।
👉 मानव जीवन को सार्थक बनाओ।

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माया (भ्रम) हर इंसान माया और मोह में फँसा हुआ है। यह माया उसे धोखा देती रहती है और वह दुखी बना रहता है।

. लालच लालच के कारण इंसान सही रास्ते से दूर हो जाता है। ज्ञान, ध्यान और समझ भी उसके सामने बेबस हो जाते हैं।

. माया की गुलामी पता ही नहीं चला कि कब हम माया के अधीन हो गए। आज हम सब परेशान और कमजोर महसूस कर रहे हैं।

. महँगाई महँगाई से आम जनता बहुत दुखी है। लोग दिन-रात चिंता में डूबे रहते हैं और नई-नई परेशानियों का सामना करते हैं।

किसानों की समस्या महँगाई के समय में भी किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिलता। खेती करना और भी कठिन होता जा रहा है।

. गंगा और अहंकार हम गंगा जी की महिमा तो गाते हैं, लेकिन अपने अहंकार में इतने डूब गए हैं कि उनकी पवित्रता का सही सम्मान नहीं करते।

. महँगाई का असर महँगाई लगातार बढ़ रही है और लोगों का जीवन मुश्किल बनाती जा रही है।

. दहेज प्रथा दहेज की वजह से बेटियों का विवाह करना कठिन हो गया है। समाज में दहेज की बुरी प्रथा अभी भी मौजूद है।

पैसे का लालच आज सब कुछ पैसे के इर्द-गिर्द घूमता है। दहेज जैसी बुराइयों की जड़ भी पैसों का लालच ही है।

उम्मीद कवि कहता है कि उसे अब खुद पर भी पूरा भरोसा नहीं रहा, लेकिन ईश्वर से अभी भी आशा बाकी है।

दिखावा आज लोग इंसानियत से ज्यादा पद, पैसा और पहचान को महत्व देते हैं

विज्ञान और मानसिकता विज्ञान में तरक्की के बावजूद इंसान कई मानसिक समस्याओं और कुंठाओं से घिरा हुआ है।

हिंसा और भोगवाद पर व्यंग्य कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि आज का समाज सोच-विचार छोड़कर केवल मौज-मस्ती और स्वार्थ में डूबता जा रहा है।

यह कविता माया, लालच, महँगाई, दहेज, अहंकार और समाज की बदलती सोच जैसी समस्याओं पर प्रकाश डालती है और इंसान को आत्मचिंतन करने का संदेश देती है।

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*एक ऐसी कहानी,*
*जो आपको भावुक कर देगी😢*

एक अट्ठाइस साल की बहुत ही बदसूरत और काली लड़की थी, उसके दाँत भी निकले थे, पर उसे अपने रंग और बदसूरती का जरा भी अफ़सोस नही था | हमेशा खुश रहती और एक नंबर की पेटू और पढ़ने लिखने में महाभोंदू भी थी |

पेटू होने की वजह से शरीर भी बेडौल हो गया था | एक खूबी उसमें यह भी थी की जहाँ रहती, हो-हो-हो कर हस्ती मुस्कुराते रहती और सबको भी हँसाते रहती |
उस नेक दिल लड़की का एक शौक भी था |
खाना बनाने का, वह खूब मन से खाना बनाती और बड़े चाव से मसाला पिसती |
खाना बनाने की किताबे खूब ध्यान लगा कर पढ़ती | टीवी रेडियो पे भी पाक कला के प्रोग्राम को बड़े मनोयोग से देखती सुनती |

जब भी उसे कोई खाना बनाना होता तो वह बड़े प्रेम से बनाती | आटा गूँथती, बड़े प्यार से गीत गुनगुनाते हुए कम आँच पे पूड़ियाँ तलती |
सब्जी चटनी खीर हो या मटर पनीर सब कुछ लाजबाब बनाती | जो भी उसके खाने को टेस्ट करता बिना तारीफ किये ना रहता | उसने पाक कला में अद्भुत और असाधारण प्रतिभा हासिल कर ली थी |

पर वह मनहूस थी उसके काले रंग और बदसूरत होने से कोई उसे प्यार न करता था पर माँ उसे बहुत प्यार करती थी | आज तक माँ ने उसे डाँटा तक नही था और वह भी माँ से बहुत प्यार करती थी |

हर बार की तरह इस बार भी आज सुबह उसकी शादी के लिए जो लोग लड़की देखने आये थे उन सबो ने खाने की बहुत तारीफ की लेकिन लड़की को देखकर नाक मुँह सिकोड़कर चले गए |

वह लड़की भी तैयार होकर किसी को बिना कुछ बताये कहीं चली गयी | शाम में जब वो लौटी तो घर का माहौल बहुत गरम था |

पिता जी माँ पे बहुत गुस्सा थे बोल रहे थे पता नही कौन से पाप के बदले ये मनहूस लड़की मिली | पिता से प्रायः यह सुब सुनती थी उससे उसे कोई असर न होता था |
वह बहुत खुश खुश माँ को कुछ बताने गई और कहा " बड़ी भूख लगी है कुछ खाने को दो पहले" !

उसके हाथों में एक सर्टिफिकेट और एक चेक भी था, पर माँ भी आज बहुत गुस्से में सब्जी काट रही थी उसके तरफ देखे बिना ही बोली "तू सचमुच मनहूस है काश पैदा होते ही मर जाती तो आज ये दिन ना देखना पड़ता |
पचासों रिश्तों आये किसी ने तुझे पसंद न किया " |

उस मनहूस लड़की को माँ से ऐसी आशा ना थी उसका दिल बैठ गया और उसकी ख़ुशी उड़ गई और उदास होकर माँ से बोली " मैं सचमुच मनहूस हूँं माँ क्या मैं मर जाऊँ ?" बोलते बोलते उसका गला रुंध गया और चेहरा लाल हो गया |

माँ ने भी गुस्से में कहा "जा मर जा सबको चैन मिले" |
तभी उस मनहूस लड़की ने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया | थोड़ी देर बाद जैसे ही माँ को अपनी गलती का अहसास हुआ वो दौड़ती हुई उसके कमरे के तरफ गयी | आवाज़ देने पर भी दरवाजा जब नही खुला तो माँ ने जोर का धक्का दिया |
तेज धक्के से जैसे ही दरवाज़ा खुला माँ ने देखा सामने दुपट्टे के सहारे जीभ बाहर निकले उस मनहूस काली लड़की की लाश झूल रही थी |
वही पर एक चिट्ठी, सर्टिफिकेट और एक लाख का चेक रखा था |

चिट्ठी में लिखा था" माँ मैंने आज तक तुम्हारा कहना माना है | आज तुमने मरने को बोला ये भी मान रही | अब तुम मनहूस लड़की की माँ नही कहलाओगी |
मैंने पढ़ने की बहुत कोशिश की पर मेरे दिमाग मे कुछ जाता है नहीं, पर भगवान ने मुझे ऐसा बनाया इसमें मेरा क्या कसूर माँ ?😢
मुझे सबने काली मनहूस भोंदू सब कहा, मुझे बुरा न लगा पर तुम्हारे मुँह से सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा 😢
मेरी प्यारी माँ और हां आज नेशनल लेवल के खाना बनाने वाली प्रतियोगिता में मुझे फर्स्ट प्राइज और एक लाख रूपए का चेक मिला और साथ में फाइव स्टार होटल में मास्टर शेफ की नौकरी भी |😢

और पता है माँ आज मेरी जिंदगी की सबसे खुशी का दिन था क्योंकि पहली बार वहाँ सबने मुझे कहा था
देखो ये है कितनी भाग्यशाली लड़की है 😢😢😢...

नोट- बेटी है तो कल है | उसका सम्मान करे |
उसे ताकत दे,
उत्साहित करें,
माँ बाप का नाम,
देश का नाम रोशन करेगी |

💞🙏🏻💞
*सभी एक 𝗟𝗶𝗸𝗲 अवश्य करें ♥

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_*किस्मत महलों में राज करती है*_
_*और हुनर सड़कों पर तमाशा करती रह जाती है*_

एक हसीन लडकी
राजा के दरबार में
डांस कर रही थी...

( राजा बहुत बदसुरत था )

लडकी ने राजा से एक
सवाल की इजाजत मांगी
.
राजा ने कहा ,
" चलो पुछो ."
.
लडकी ने कहा ,
"जब हुस्न बंट रहा था
तब आप कहां थे..??
.
राजा ने गुस्सा नही किया
बल्कि
मुस्कुराते हुवे कहा
~ जब तुम हुस्न की
लाइन् में खडी
हुस्न ले रही थी , ~
.
~ तो में
किस्मत की लाइन में खडा
किस्मत ले रहा था
.
और आज
तुझ जैसीे हुस्न वालीयां
मेरी गुलाम की तरह
नाच रही है...........
.
इसलीय शायर खुब कहते है,
.
" हुस्न ना मांग
नसीब मांग ए दोस्त ,

हुस्न वाले तो
अक्सर नसीब वालों के
गुलाम हुआ करते है...

" जो भाग्य में है ,
वह भाग कर आएगा,

जो नहीं है ,
वह आकर भी
भाग जाएगा....!!!!!."

यहाँ सब कुछ बिकता है ,
दोस्तों रहना जरा संभाल के,

बेचने वाले हवा भी बेच देते है,
गुब्बारों में डाल के,

सच बिकता है ,
झूट बिकता है,
बिकती है हर कहानी,

तीनों लोक में फेला है ,
फिर भी बिकता है
बोतल में पानी ,

कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे ,
टूट कर बिखर्र जाओगे ,
जीना है तो
पत्थर की तरह जियो ;
जिस दिन तराशे गए ,
" भगवान " बन जाओगे...!!!

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता!

गिद्ध भी कहीं चले गए,
लगता है उन्होंने देख लिया,
कि इंसान हमसे अच्छा नोंचता है!

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर,
क्या मस्त तलवे चाटता है इंसान!

कोई टोपी, तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,
मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है!

जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी,
जिसकी खातिर बाप किडनी बेच देता है!

ये कलयुग है,
कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें,
कली, फल, फूल, पेड़, पौधे सब माली बेच देता है!

धन से बेशक गरीब रहो,
पर दिल से रहना धनवान,
अक्सर झोपड़ी पे लिखा होता है:
*"सुस्वागतम"*

और महल वाले लिखते हैं:
*"कुत्तों सॆ सावधान"*

🙏🙏🙏

*सभी एक 𝗟𝗶𝗸𝗲 अवश्य करें ♥️*

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*दिया* और *बाती,*
अपनी जगह *सही होते* है...
*आग* तो *कोई,*
*तीसरा लगा* जाता है...!!

😢💔🥺

*तकलीफ* देने *वाले,*
*भले पराए* हो...
पर *मजे* लेने *वाले,*
हमेशा *अपने होते* है...!!

☹️❤️‍🩹🥺