urgent velly in Hindi Thriller by Neeraj Sharma books and stories PDF | टाम ज़िंदा हैं - 20

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टाम ज़िंदा हैं - 20

---------- टाम ज़िंदा है -------

15 सितंबर तक थाना अब वो नहीं रहा था.... उसकी हद बंदी इतनी जबरदस्त ढंग से की गयी थी नक्शा भवानी के दिमाग़ का था। चार कमरे नए हेडक्वाटर कह सकते थे, हर दीवार पर श्री गांधी की फोटो थी जिसपे लिखा था "सतेमेव जयते " ------ जेल कोठरी जो अब तक खाली थी उसमे कितनी ही कठोर कर्जकुशलता पूर्वक दीवारे थी, और सलाखे थी, इस तरिके से बनी जेल थी.. जिसका सब कुछ थाने मे ही खुलता था कोई सुरग नहीं बना सकता था.... सायरण लगा दिए थे, सेफ्टी चेक फिर अंदर भेजा जाता था। ये भवानी के कोई दिल से पूछे जो उसका दर्द था... जो सामने रखी बड़ी पिक्चर। दो आ चुके थे A. S. I जिन्होंने आते ही बंदरगाहो का कार्य, सड़को का चलता हुआ दौर लोगो का, बजरो का नरीक्षण संभाल लिया था... आते ही वो ऐसे काम पर लगे जैसे छोटे होशयार बच्चे पढ़ाई पर... भूखा आदमी रोटी पर टूट पड़ता है। यही है जीवन बस...... भवानी ने पता लगा लिया था अमरीश जीवत है। उसका D. N .A मैच नहीं करता था... पक्की खबर थी कि अमरीश की शक्ल का आदमी ताबड़तोड़ तबाही कर के गया था। भवानी ने एक सॉफ्ट और साउंड फ्रूफ कमरे मे आज सब से मीटिंग करनी थी.. समय था 11 वजे का। लेकिन डीएसपी का आना एक खबर की तरा घूम गया। मीटिंग का टाइम बदलना पड़ा वो शाम को 7 वजे करना पड़ा। हैरत मे थे सभी। कोई तो है जो फिर दिलचस्पी ले रहा है। किसने खबर को निकाला होगा, कौन होगा गिरगिट.... जो इस महकमे का दुश्मन है।

                        राणा का फोन वज उठा.... रिंग टोन थी प्यारी सी, " भवानी खबर है, अमरीश अंडरग्राउंड है। उसका छोटा जिगरे जान, हमारी बंदूक के निशाने पे आने वाला है " भवानी खुश हो चूका था, "वाह रे मेरे शेर ---" राणा ने चेतावनी दी, " चौहान को मत बंदरगाह पूर्बी भेजना... सुना है कमबख्त केस का कचुम्बर निकाल देता है " ---- "अगर उन्हें भिंक लग गयी तो कमबख्त जहमत मुल ले गा। " अमरीश का भाई मरना लाजमी  है ----" राणा ने फोन काट दिया था।

               सिम दूसरी भवानी के फोन मे थी, -"चौहान तुम कही भी हो, ठाने आओ... जल्दी " चौहान तो आपने क्वाटर मे था, " आया सर, क्वाटर मे हु। " भवानी सुन कर दंग रह गया, दौरे रजिस्टर मे पूर्बी बंदरगाह कयो डाला है.... " फोन कट। पांच मिनट मे चौहान हाज़र -----" सर मेहरा मोहन को भेज दिया " 

"कयो  -----? गुस्से मे था भवानी।

"सर --- गांव से माता जी आये थे, साथ मे छोटी बहन।"

"ओह तभी -----तेरे से जरुरी एक बात करनी है, शाम को.... मोहन दे के स्टाल पर।" 

"कोई बात नहीं सर -----" चुप था... चौहान।

तभी टीवी पे खबर अलायस हुई..... ड्रग डीलर जगमीत, सन्नी, और जो पुलिस की गोली से मरे लेकिन ये बूल्ट पुलिस की नहीं थी जिससे  सिकदर मारा गया। ये बम्बे का गेंग और बड़ा ड्रग डीलर था, जिसको तीन गोलियों ने मार गिराया था.... पर हैरत इस बात की थी जिसको पुलिस ने मारा वो तो शनाक्त के लिए एबुलेस मे रखा गया.... पर उस लाश को उसके करीबीयो ने हाथ नहीं लगाने दिया... रिश्ते मे ये भाई है सगा अमरीश साहब का.... जो पहले किसी अजूबे मे मारे गए और अब भाई..... विद्रोह है लोगो का पुलिस के प्रति, ये जीने नहीं देती। कयो  ----? जबाब किसी के पास नहीं था। 👎(चलदा )