Trisha - 48 in Hindi Women Focused by palvisha books and stories PDF | त्रिशा... - 48

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त्रिशा... - 48

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का साहस ही नहीं हुआ। उसे ऐसा लगा कि मानो वो सब उस पर हंसकर उसका मजाक उड़ा रहे है। वह खुद को बहुत ही हीन महसूस कर रही थी। तभी उसकी नजर गुनगुन पर पड़ी जो अपनी मां को देख रही थी और अपनी छोटी छोटी आंखों में मोटे मोटे आंसू भरे खड़ी है। 

अपनी बेटी का चेहरा देखते ही त्रिशा ने खुद को संभाला उसके मन में चल रहे सारे ही भावों को उसने समेटा क्योंकि राजन को भले कुछ ना दिखा हो पर उसे अपनी बेटी के चेहरे और उसकी आंखों में डर साफ साफ नजर आ रहा है। उसने गुनगुन को गोदी में उठाया अपने गले से लगाया। उसे लगातार सहलाती रही मानो उसे बिना कहे इस बात का अहसास दिला रही हो कि बेटा डरने की जरूरत नहीं है, मैं हूं ना। 

और फिर जब गुनगुन थोड़ी शांत हुई तो सबसे नजरें बचाती हुई त्रिशा उसके साथ चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गई। स्कूल से घर तक पूरे रास्ते राजन उन दोनों से कुछ नहीं बोला और त्रिशा चाहकर भी राजन से कुछ कहने का साहस नहीं जोड़ पाई। वह तो बस अपनी बच्ची को गले से लगाकर बैठी रही। ऐसा लग रहा है कि मानों गुनगुन ही उसे इस समय शांति और साहस दे रही है। नहीं तो उसके अंदर चल रहे विचारों के तूफान उसे कब का पागल कर देते। 

"अभी तक हमेशा जब भी राजन ने मुझ पर हाथ उठाया था या कुछ कहा था तो वो नशे में था पर आज..........
आज तो वो पूरे होश में था!!!!!!!!!! 
और अभी तक जब जब उनके बीच ऐसा कुछ हुआ था तो वो हमेशा बंद कमरे में होता आया था जहां उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था पर आज इतने सारे लोगों के आगे............ 
उसने मुझ पर हाथ उठाया।" 
" उसने ना जगह देखी, ना लोग देखे और यहां तक की ना ही गुनगुन को देखा!!!!!!!!" 

त्रिशा के मन में यह बातें बार बार आने लगी। आज इस एक थप्पड़ ने उसे अंदर तक झकझोर के रख दिया है। उसके आत्म सम्मान को तार तार कर दिया है। 

आज सालों बाद उसके मन में वहीं टीस उठी है जो शादी के बाद पहली रात को राजन के पहली बार हाथ उठाने पर उठी थी। आज इस एक थप्पड़ ने उसे अब तक हर एक बार की याद उसकी आंखों के आगे ला दी। उसे वो हर एक घटना याद आने लगी जब जब राजन ने उस पर हाथ उठाया था और तब तब उसने यह सोच कर उसे माफ कर दिया था कि वह तो नशे में है। होश मे होता तो कभी ऐसा ना करता। 

"पर आज........
आज वह होश में था..............." "आज उसने पूरे होशो हवास में सबके आगे उसपर हाथ उठाया।।।।।" त्रिशा के अंदर से चीखती हुई एक आवाज आई।

रास्ते में गाड़ी में गुनगुन त्रिशा की गोदी में उससे चिपक कर सो चुकी थी। पर त्रिशा उससे अभी भी वैसे ही कसकर चिपकी हुई है। उसे ऐसा लग रहा है कि इस समय पूरी दुनिया अभी बस केवल गुनगुन ही एक है जो उसे संभाल सकती है। ऐसा लग रहा है उसे कि अगर गुनगुन उससे एक सैंकैंड को भी दूर हुई तो शायद अपने आसूंओं में वो खुद ही डूब जाएगी। 

गुनगुन के सोने से गाड़ी में इस समय एकदम शांति है। लेकिन त्रिशा के अंदर इस समय भावनाओं का एक ऐसा चक्रवात आया हुआ है जो उसके अंदर सब कुछ खत्म करता जा रहा है। इस समय वह और राजन दोनों आगे ही बैठे है,  पास में भी है एक दूसरे के, पर  आज उसे ऐसा महसूस हो रहा है कि उसका राजन तो उससे ना जाने कितनी दूर जा चुका है। बहुत कुछ है कहने को त्रिशा के मन में। इतना कि शायद वह खुद भी नहीं जानती कि कितना है। 

घर आते ही राजन ने गाड़ी को खड़ा किया और उसके गाड़ी खड़ी करते ही राजन फिर से उसी अजीब से लहजे में बोला," अब यहीं बैठे रहना है तुम्हें???????? उतरो जल्दी!!!!!!!! मुझे यही एक काम नहीं है बस!!!!!!! खाली नहीं हूं मैं तुम्हारे लिए!!!!!!!! और भी बहुत काम करने है मुझे!!!!!!!!!" 

राजन के मुंह से बरसते उन शब्दों को सुनने के बाद त्रिशा ने गुनगुन को उठाया और फिर वह भी गाड़ी से उतरकर अंदर चली गई। अंदर जाकर राजन ने त्रिशा को अनदेखा किया और सीधा अपनी मां के कमरे में चला गया और पांच मिनट में ही वो दोनों बाहर चले गए। उनके जाने के बाद घर का दरवाजा अंदर से बंद करके त्रिशा भी गुनगुन को लेकर अंदर कमरे में चली गई और क्योंकि गुनगुन नींद में थी तो उसने उसे बैड पर लिटा दिया और फिर खुद कपड़े बदलने चली गई। 

त्रिशा ने पहले कपड़े बदले और फिर अपना  चेहरा पानी से धोने के लिए वाॅसबेसन के आगे खड़ी हो गई। उसने अपनी हथेलियों में पानी लिया और चेहरे पर पानी के छींटें मारे जिससे उसकी आंखे बंद हो गई और आंखे बंद होते ही उसे वहीं थप्पड़‌ और वहां खड़े लोगों का उसे तरह तरह घूरना नजर आने लगा और उसने झट से आखें खोल ली। 

उसके बाद उसने दो चार बार अपने चेहरे पर फिर से पानी मारा जैसे उस पानी से वो उस थप्पड़ के निशान को मिटाने की कोशिश कर रही हो जो आज उसके आत्म सम्मान को छलनी कर गया है लेकिन उसका यह प्रयास भी असफल रहा। और इसी चिड़चिड़ाहट में उसने और तेज तेज पानी हाथ में लेकर खुद के चेहरे पर मारना शुरू कर दिया और कुछ पलों के बाद जब वो कुछ शांत हुई तो फिर वह वासबेसन को पकड़ कर खड़ी हो गई और तभी एकाएक उसकी नजर वहां सामने लगे शीशे पर गई और एक पल के लिए वह उसी शीशे में अपनी शक्ल देखने लगी।