Mukt - 13 in Hindi Moral Stories by Neeraj Sharma books and stories PDF | मुक्त - भाग 13

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मुक्त - भाग 13

एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....
इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जोरदार कहानी है। इसको समझना आपने है....
एक लकीर.... कितना कुछ कर जाती है। हद भी  बन जाती है। लकीर बड़ी न खुशग्वार कह सकते है। ये एक लकीर की कहानी है....
                             भारत सोने की चिड़िया थी, अब चादी की भी नहीं रही। कितना कुछ समेटा हुआ है इस भारत मुल्क ने.... पिछले ज़ख्म ही कहा भरे है, पटी,रू और मरहम बहुत काम किया।
                              ये लकीर उस तारीख को पड़ी.. ज़ब मुल्क आजाद हुआ... आज़ाद होता है, होने दो आराम से.. लड़ाई के बिना कभी कोई मसला हल कोई नहीं कर सका... महात्मा तो हमारे देश मे इतने पहले ही थे पूछो मत। उस वक़्त महात्मा गाँधी जी थे... रोक सकते थे दो फाड़ होने को देश को, पर कमबख्त कोशिश की ही किसे नहीं होंगी। पक्की बात है।
                       पहले आने की हर किसी ख्वाइशो ने सब को मार कर रख दिया। पहले प्रधान मंत्री कौन ?
श्री जवाहर लाल नेहरू.... नहीं अबे इसे इतना नहीं मालम.... कया ब्रेन साफ किया तेरा कया... जनाब सरदार पटेल थे। बड़ा झगड़ा खड़ा किया...उच्च लेवल का... नेहरू कयो नहीं..हसीं आती है। सच मे... इस मे भी महात्मा गाँधी जी का बड़ा उच्च कोटि का रोल था, या ये कह लो, न होते अगर बापू जी, तो किसी ने लालटेन पकड़ कर अंधेरा थोड़ी काटना था। बस समझ गए हो तो आगे चले..... किसी ने लिखा नहीं होगा जो मै लिख रहा हूँ.. राजनीति या रण नीति समझ लो। थपड पड़ने जरूरी थे पड़ गए। किस के मुँह पर, शेयर सुने " गरीब तो गरीब ही रहा, बस मिल जुल कर  नहारा लगा। " अब किताबों मे शिगार पीते तो लिख नहीं सकते थे, सिगरेट पीते तो लिख नहीं सकते थे, शेपीज पीते दिखा नहीं सकते थे, पूछो कयो, मिडिया नहीं था... होता तो फिर कुछ मानसिकता कुछ और होती। पटेल जी सीधी बात करने वाले जानी कड़वी बात करेले जैसी जिसके फायदे बहुत है।
                              चलो छोड़ो कमबख्तो को, पर लिखना पड़ता है... देश कमजोर कैसे रहा, बंदा भी कमजोर, गरीब भी कमजोर... जिसकी हडीया तक़ दिखती थी.. सच मे हमारा भारत.. जो एक ढंग की रोटी खाना भी जिसके नसीब मे नहीं था। और आशिकी पहले बन जानी चाहिए थी... नेहरू जी अशकाना मिजाज के थे... हम जिसे आज कल कया कहते है, भूल गया, भूल जाना भी अच्छा होता है, सेहत के लिए । बहुत खूब किसने कुछ नहीं कहा... कयो कहे कोई  इनाम थोड़ी था। नेहरू जी की एक बेटी जो इंद्रा बहुत ही समझदार लड़की थी।
                         मै कोई गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ रहा, वही बात ही मुर्दो के बाद होती है, कयो की राजनीति और रणनीति ही यही है। जिन्दे कोई लिखें तो ये काले अंधेरे मे धकेल नहीं देंगे गोरे लोग, इनकी मीठी बाते पर मत जाओ, फैलाये रेते पर जाओ... कया थे कया बन गए। अंदर से भाई लोग सब एक है.. हमें ही सब को लकीर जो एक है, जुदा करते है झूठ बोल कर, धर्म प्रति आग लगा कर... हम कमजोर लोग यही सोचते है, हमारे कर्म...