That Dreadful Night - 7 in Hindi Horror Stories by Khushwant Singh books and stories PDF | वो खोफनाक रात - 7

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वो खोफनाक रात - 7

पिछली कहानी में हमने पढा कि लावण्या और लक्षिता बहाना बनाकर ट्रिप पर जाना कैंसल कर देती हैं।

 अब आगे..........

लक्षिता और लावण्या नाच ही रही थी कि तभी वो देखती हैं कि अनीशा लावण्या के कमरे के बाहर ही खड़ी है।

अनीशा - तो ये तुम्हारा वो हॉस्पिटल रूम, जहां तुम दोनों अंकल जी को लेकर आए हो!!

लक्षिता और लावण्या समझ गईं थी कि अनीशा कबकी यहां आ चुकी थी। 

लक्षिता - अनीशा! वो...

इससे पहले लक्षिता कुछ बोल पाती अनीशा ने उसे रोक दिया।

अनीशा - मुझे पता ही था कि तुम दोनों ट्रिप पर जाना कैंसल जरूर करोगी इस लिए मैं तुम दोनों को लेने डायरेक्ट यही आ गई ताकि अब तुम दोनों कोई बहाना ना बना सको।

लावण्या - लेकिन अनीशा, हमारा बिल्कुल भी मन नहीं हैं चलने का।

अनीशा - क्यों मन नहीं हैं तुम दोनों का ट्रिप पर चलने का। कोई रीजन हैं तो बताओ मुझे भी।

लक्षिता और लावण्या बस एक दूसरे को देखे जा रही थी। 

अनीशा - बताओ मुझे!

लक्षिता - वो क्या हेना की वहां हम पहले भी जाकर आ चुके हेना तो अब मन नहीं हो रहा हैं वापिस जाने का! हेना लावण्या।

लावण्या थोड़ी घबराते हुए - हहहहहा।

अनीशा - मुझे ऐसा क्यों लग रहा हैं जैसे तुम दोनों मुझसे कुछ छिपा रही हो???

लक्षिता और लावण्या अनीशा की ये बात सुनकर कुछ सोच में पड़ जाती हैं।

अनीशा तब उन दोनों के चेहरे के सामने चुटकी बजा कर उन्हें वापिस ख्यालों से बाहर लाती हैं।

अनीशा - अब मुझे कुछ नहीं सुनना हैं तुम दोनों चल रही हो मेरे साथ रिहासपुर ट्रिप पर। 

तब अनीशा लावण्या और लक्षिता के बैग लेकर नीचे चलने लगती हैं । 

ये देखकर लावण्या और लक्षिता समझ जाती हैं कि अब वे दोनों चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती है।

लक्षिता और लावण्या अनीशा के पीछे पीछे नीचे चली जाती हैं।

अनीशा - अब अगर तुम दोनों का सोचना वगैरह हो गया हो तो चले वरना यही पर लेट हो जायेंगे हम लोग।

तब तक आलोक जी और सुरेखा जी भी वहां आ जाते है।

आलोक जी - बेटा, तुम तीनों अभी तक निकली नहीं क्या कॉलेज के लिए! अगर लेट हो गई तो तुम्हारी बस छूट जाएगी 11 तो यही बज चुके हैं।

अनीशा - अंकल जी, मैं तो कबकी तैयार हु बस इन दोनों के ही बहाने खत्म नहीं हो रहे हैं।

सुरेखा जी - लक्षिता , लावण्या क्या हुआ तुम दोनों को कल से तुम दोनों बहुत परेशान हो! क्या बात हैं बेटा मुझे बताओ तो??

 लक्षिता - अरे नहीं आंटी! ऐसा कुछ नहीं है हम तो बस अनीशा के साथ मजाक कर रहे थे।

अनीशा - मजाक???

लावण्या - हा! वो तो हम बस देख रहे थे कि तू क्या रिएक्ट करती हैं हमारे मना करने परl

अनीशा - अच्छा! अब देख लिया होगा तुम दोनों ने की मैं क्या रिएक्ट करती हु।

लक्षिता और लावण्या - हाहाहाहां देख लिया न हमने।

अनीशा - तो चलो अब तुम दोनों वरना अब मैं तुम दोनों को भी इन बैग्स की तरह खींचकर लेकर जाऊंगी ।।।

लक्षिता और लावण्या को मजबूरी में अनीशा के पीछे पीछे बाहर तक जाना पड़ता हैं। वे तीनों ऑटो में बैठकर कॉलेज के लिए निकल जाती हैं।।।